कार्य स्थल का अभिप्राय वह स्थान है जहां कार्य किया जाता है, इसका तात्पर्य वह स्थान है जहां कोई कर्मचारी या कर्मचारीगण उस अनुलाभ या परितोष के लिए, जिस पर नियोजक का पहुंच या नियंत्रण का अधिकार है, उनमें उस के निष्पादन या सेवाएं प्रदान करने के लिए नियुक्त हैं, कर्मचारियों को उनके कार्य और उस कारोबारी संगठन जिसमें वह कार्यरत है, के प्रति अपना सर्वोत्तम योगदान करने के लिए संतुष्ट होना चाहिए और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। कामगारों को उचित कार्य की दशाएं और उचित वेतन प्रदान किया जाना चाहिए। कामगारों को उचित कार्य की दशाएं और उचित वेतन प्रदान किया जना चाहिए क्योंकि यह कर्मचारियों की संतुष्टि और कल्याण ही है जो किसी भी कारोबार की इष्टतम उत्पादकता और समृद्धि के लिए उच्च श्रेणी का मनोबल और प्रेरणा प्रदान करता है। अत: कई ऐसे मुद्दे हो सकते हैं, जिनका निपटान नियोजक या कर्मचारियों को संगठन में काम करते हुए करना पड़ता है। इन मुद्दों को ‘कार्यस्थल से जुड़े मुद्दे’ के रूप में माना जाता है। ये मुद्दे समस्याओं, सुझावों, पर्यावरणीय विनियमों, सांस्कृतिक पहलुओं, राजनैतिक मूल्यों, नियमों तथा नियमों के रूप में हो सकते हैं अथवा किसी निर्णय प्रक्रिया से संबंधित हो सकते हैं। इन मुद्दों का निपटान, यदि सही समय पर नहीं किया गया तो इनमें किसी व्यक्ति तथाकुल मिलाकर किसी संगठन की वृद्धि को बाधित इसे की प्रवृत्ति होती है। वे किसी व्यक्ति के उसके कार्य में सर्वोत्तम प्रयासों को करने में बाधक हो सकते हैं। इन कार्यस्थल से जुड़े मुद्दों पर सावधानीपूर्वक ध्यान दिए जाने तथा नियंतमित किए जाने की आवश्यकता है ताकि उनके सकारात्मक पहलुओं को आगे लाया जा सके और उनके नकारात्मक पहलुओं को दूर किया जा सके।