आउट सोर्सिंग के अंतर्गत अनिवार्यत: तृतीय पक्षकारों को कोर-भिन्न सेवाओं का अंतरण करना सन्निहित है जो ऐसी सेवाएं उपलब्ध कराने में विशेषज्ञता प्राप्त हों। आउट सोर्सिंग करने वालों की आवश्यकताओं के साथ साथ कोर सक्षमता आधार पर इसके अंतर्गत संघटकों की व्यापक श्रृंखला शामिल की जा सकती है।
आउट सोर्सिंग को मोटे तौर पर निम्न किस्मों में श्रेणीकृत किया जा सकता है :-
- सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी);
- मानव संसाधन (एचआर);
- ग्राहक सेवा;
- अभियांत्रिकी;
- ज्ञान सेवाएं;
- अनुसंधान और विकास; इत्यादि।
व्यवसाय प्रक्रिया आउट सोर्सिंग (बीपीओ) तथा ज्ञान प्रक्रिया आउट सोर्सिंग (केपीओ) भारत में आउट सोर्सिंग उद्योग के दो प्रमुख संघटक है।
- व्यवसाय प्रक्रिया आउट सोर्सिंग को एक या अधिक सूचना प्रौद्योगिकी गहन व्यवसाय प्रक्रियाओं का प्रत्यायोजन किसी बाह्य अभिकरण को करने के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जो बदले में निश्चित तथा माप योग्य कार्य निष्पादन के आधार पर चयनित प्रक्रिया का स्वामी होता है, उसको प्रशासित करता है तथा उसका प्रबंधन करता है।
- ज्ञान प्रक्रिया आउट सोर्सिंग को एक उच्च मूल्यवर्धित प्रक्रिया श्रृंखला के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जहां उद्देश्यों की प्राप्ति क्रियाकलाप का संचालन करने वाले लोगों के कौशलों, अधिक्षेत्र संबंधी इस तथा अनुभव पर निर्भर करती है। यह दावा किया जा रहा है कि केपीओ बीपीओ से एक कदम आगे हैं।
केपीओ में व्यवसाय प्रक्रिया आउट सोर्सिंग, अनुसंधान प्रक्रिया बहिस्रोतण तथा विश्लेषण प्रक्रिया आउट सोर्सिंग शामिल है। केपीओ व्यवसाय कंपनियां केवल मात्र प्रक्रिया विशेषज्ञता के बजाए विशिष्ट प्रकार की अधिक्षेत्र आधारित प्रक्रियाएं, प्रगत विश्लेषणात्मक कौशलों तथा व्यवसाय विशेषज्ञता उपलब्ध कराती हैं। केपीओ उद्योग बीपीओ उद्योग से अन्यथा अधिक मात्रा में उच्च कुशल कार्य का प्रहस्तन करता है।
दूसरे शब्दों में, केपीओ अपनी क्षमताशक्ति ज्ञान की गहराई, अनुभव तथा निर्णय से प्राप्त करता है; जबकि बीपीओ आकार, परिणाम तथा कुशलता से संबंधित है।
केपीओ की भावी संभाव्यता काफी उच्च है क्योंकि यह सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) या सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवा (आईटीईसी) क्षेत्रकों तक परिसीमित नहीं हैं तथा इसमें अन्य क्षेत्रक जैसे कानूनी प्रक्रियाएं,बौद्धिक संपदा तथा पेटेंट संबंधित सेवाएं, इंजीनियरी सेवाएं, वेब विकास अनुप्रयोग, व्यवसाय अनुसंधान तथा विश्लेषण, नैदानिक अनुंसधान, बाजार, अनुसंधान, इत्यादि शामिल है।
आज के प्रतिस्पर्धी माहौल में, प्रमुख विशेषज्ञता तथा सक्षमता के क्षेत्रों पर संकेंद्रण करने पर ध्यान दिया जाता है जबकि शेष क्रियाकलापों के लिए बाहरी स्रोत से सेवाएं ली जाती है। अधिकांश संगठन यह मानने लगे हैं कि भिन्न क्रियाकलापों की आउटसोर्सिंग करने से न केवल लागतें न्यूनतम हो जाती हैं तथा कुशलताओं में सुधार होता है, बल्कि संपूर्ण व्यवसाय में भी सुधार हो जाता है क्योंकि व्यवसाय क्रियाकलाप के प्रमुख व़ृद्धि क्षेत्रों की ओर ध्यान केंद्रीत हो जाता है।