भारत आउट सोर्सिंग के संसाधन प्रदान करने में अग्रणी रहा है और यह दुनियाभर के देशों को कई प्रकार की आउट सोर्सिंग सेवाएं प्रदान करता है। वर्ष 2007-08 में व्यापार प्रक्रिया आउट सोर्सिंग (बीपीओ) में 52 बिलियन अमेरिकी डॉलर को शामिल करते हुए आईटी तथा आईटी समर्थित सेवाएं (आईटीईएस) का संयुक्त राजस्व शामिल हैं।
व्यापार प्रक्रम आउट सोर्सिंग (बीपीओ) एक व्यापक पद है जो सभी क्षेत्रों की आउट सोर्सिंग से संबंधित है। एक बीपीओ स्वयं को नई प्रौद्योगिकी लाकर अथवा मौजूदा प्रौद्योगिकी को प्रक्रिया में सुधार के नये तरीके के साथ प्रस्तुत करते हुए भिन्न दर्शाता है। बीपीओ सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवा (आईटीईएस) उद्योग के सबसे तेजी बढ़ते खंडों में से एक है। भारतीय बीपीओ उद्योग में मूलभूत आंकड़े, बाजार अनुसंधान, साम्यता अनुसंधान, प्रबंधन, अभियांत्रिकी डिजाइन, ऐनीमेशन और सिमुलेशन शामिल है। इसके साथ चिकित्सा सामग्री और सेवा तथा शिक्षा और प्रकाशन भी शामिल है।
यह भारतीय बीपीओ क्षेत्र का विकास और परिपक्वता जिसमें ज्ञान प्रक्रिया की आउट सोर्सिंग के वैश्विक आउट सोर्सिंग परिदृश्य में एक नई तरंग उठा दी है। दूसरी शब्दों में भारत में प्रचालित आउट सोर्सिंग व्यापार प्रक्रिया में अनेक विदेशी कंपनियों द्वारा प्राप्त सफलता से उन्हें हाइ एण्ड ज्ञान कार्य में आउट सोर्सिंग आरंभ करने का प्रोत्साहन भी मिला है। भारत विश्व में एक प्रमुख केपीओ देश है जहां अपनी बौद्धिकता और इंटरनेट संसाधन के कारण अनेक अंतर्निहित लाभ मिलते हैं।
भारत में आउट सोर्सिंग से निम्नलिखित रूपों में संगठन को प्रतिस्पर्धी आयाम मिलता है :
- बड़ी संख्या में शिक्षित, प्रशिक्षित और उच्च कौशल वाले व्यासायिकों के कारण गुणवत्ता में समझौता किए बिना लागत प्रभावी सेवाएं।
- सॉफ्टवेयर, प्रौद्योगिकी और मूल संरचना में नवीनतम साधनों के उपयोग से उच्च गुणवत्ता की सेवाएं।
- भारत और अमेरिका तथा ब्रिटेन जैसे देशों के बीच समय क्षेत्र का लाभ कंपनियों को 24x7x365 दिन ग्राहक सहायता या हेल्प डेस्क सहायता देने में मिलता है।
- लोकतांत्रिक व्यवस्था और स्थायी सरकार से भारत में आईटी तथा आईटीईएस उद्योग की विस्तार को पूरा समर्थन मिलता है।
इन सभी लाभों के कारण आउट सोर्सिंग सेवाएं देने वाले संगठनों की संख्या भारत में हर वर्ष बढ़ रही है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार ज्ञान प्रक्रिया आउट सोर्सिंग उद्योग 2010 तक 17 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाने की आशा है, जिसमें से 12 बिलियन अमेरिकी डॉलर भारत को आउट सोर्स किया जाएगा। एक अन्य रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2010 तक केपीओ क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक की होगी।