आउटसोर्सिंग विश्व के मंच पर एक तीव्रतम वृद्धिकारी उद्योग है। इसमें मुख्य रूप से कंपनियों की आंतरिक प्रक्रियाओं, व्यवसायों मूल संरचना इत्यादि के संघटकों या बड़े खंडों का अंतरण बाह्य सेवा प्रदायकों को किया जाना शामिल है। आउटसोर्सिंग करने वालों की कोर सक्षमता तथा आवश्यकताओं के आधार पर इसके अंतर्गत संघटकों की व्यापक श्रृंखला को शामिल किया जा सकता है। इसे मोटे तौर पर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), मानव संसाधन, ग्राहक सेवा, इंजीनियरी, ज्ञान सेवाएं, विधिक, अनुसंधान और विकास आउटसोर्सिंग, इत्यादि के रूप में श्रेणीकृत किया जा सकता है।
अपने लाभप्रद घटकों यथा विश्व के सर्वोत्तम बौद्धिक तथा इंटरनेट संसाधनों की विद्यमानता, निम्नतर लागत संरचना, बहुभाषाई सक्षमताएं, इत्यादि के कारण भारत 21वीं सदी के सॉफ्टवेयर विद्युत गृह के रूप में उभरा है जो विशेष रूप से आईटी समर्थित सेवाओं (आईटीईएस) तथा व्यवसाय प्रक्रिया आउटसोर्सिंग (बीपीओ) के लिए एक वैश्विक स्रोतण केंद्र के रूप में अनेकों लाभों की पेशकश करता है। आउटसोर्सिंग के पीछे मुख्य उद्देश्य यह है कि इससे कंपनी को गुणता तथा प्रतिष्ठा गवाएं बिना कोर क्रियाशील मदों में अधिक समय, धन तथा मानव संसाधनों का अधिक निवेश करने की गुंजायश हासिल हो जाती है। भारत में कॉल सेंटरों की भी प्रचुरता हो गई है जो विभिन्न विदेशी एयर लाइन्स तथा बैंकों को सेवाएं प्रदान करते हैं।
इसके अतिरिक्त, बीपीओ उद्योग की आर्थिक सफलता के कारण अनेक फमें अपने प्रगत ज्ञान कार्य को अपतटीय गंतव्य स्थलों में ले गई हैं। ज्ञान प्रक्रिया आउटसोर्सिंग (केपीओ), बीपीओ से एक कदम आगे का विस्तार है तथा इसे उच्च मूल्य वर्धित प्रक्रिया श्रृंखला के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जहां उद्देश्यों की प्राप्ति इस क्रियाकलाप को करने वाले लोगों के कौशल, अधिक्षेत्र के ज्ञान तथा अनुभव पर अत्यधिक निर्भर रहती है। केपीओ में विशिष्ट रूप से बीपीओ अनुसंधान प्रक्रिया आउटसोर्सिंग (आर पी ओ) तथा विश्लेषण प्रक्रिया आउटसोर्सिंग (एपीओ) का एक संघटक संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) तथा युनाइटेड किंगडम (यूके) भारतीय आईटी - केपीओ निर्यातों के लिए प्रमुख बाजार हैं।
परिणामस्वरूप, भारत का वैश्विक आउटसोर्सिंग बाजार में प्रबल भागीदार बना रहना जारी हैं जिसके बाजार आकार का मूल्य लगभग 52 बिलियन डॉलर होने का अनुमान लगाया गया है। भारत के आउटसोर्सिंग उद्योग में बैंकिंग तथा वित्तीय सेवाओं का योगदान लगभग 40 प्रतिशत है। किंतु, आउटसोर्सिंग उद्योग को अनेको चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जैसे घोर प्रतिस्पर्धा, प्रशिक्षित तथा कुशल जनशक्ति की अत्यधिक कमी, केपीओ मूल संरचना में अधिक निवेश की आवश्यकता, अपेक्षाकृत उच्च नियंत्रण स्तर की आवश्यकता, उच्चतर गुणता मानकों का अनुरक्षण, इत्यादि। इसके अतिरिक्त, बीपीओ कर्मचारियों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे रात्रि पारियों में कार्य करना, कार्य स्थल पर यौन उत्पीड़न की समस्या, इत्यादि। अपतटीय आउटसोर्सिंग के मामले में, सांस्कृतिक अमेलता अथवा भाषा संबंधी अवरोधों के कारण भारी जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।
केंद्रीय स्तर पर या, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग भारत में आउटसोर्सिंग के समग्र विकास के लिए उत्तरदायी मुख्य प्राधिकरण है। तदनुसार, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में पृथक इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभागों की स्थापना की गई है। केंद्र तथा राज्य सरकारें तथा निजी क्षेत्र/बहु राष्ट्रिक कंपनियों, दोनों ही स्थायी आधार पर इस उद्योग का विकास करने के लिए सतत् प्रयास कर रहे हैं। किंतु अभी भी उन्हें, पर्याप्त योग्यता आधार का विकास करने, बीपीओ कर्मचारियों को तकनीकी ज्ञान प्रदान करने तथा उनके लिए समुचित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अभिकल्पन करने, उचित स्वास्थ्य देखभाल नीतियों का समावेशन करने तथा विशेष रूप से महिलाओं के लिए सुरक्षा उपाय क्रियान्वित करने की आवश्यकता है।
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