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आउटसोर्सिंग उद्योग
आउटसोर्सिंग उद्योग
भारत तथा आउटसोर्सिंग:
भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था पर प्रभाव
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भारत में सॉफ्टवेयर तथा बीपीओ उद्योग ने देश की अर्थव्‍यवस्‍था को प्रमुख प्रोत्‍साहन दिया है। यह सैकडों भारतीयों को रोज़गार उपलब्‍ध कराता है। भारत में बीपीओ उद्योग का मूल्‍य 11 बिलियन डॉलर है। वर्ष 2007-08 के दौरान, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में मंदी आ गई थी तथा इसकी राजस्‍व व़ृद्धि दर विगत वर्ष में 41 प्रतिशत के आंकड़े से कम होकर 21 प्रतिशत हो गई है। किंतु अभी भी यह पूर्वानुमान लगाया गया है कि भारतीय बीपीओ तथा आईटी उद्योग संवृद्धि हासिल करता हुआ वर्ष 2012 तक एक 132 मिलियन डॉलर मूल्‍य की कंपनी बन जाएगा। बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं का भारत के आउट सोर्सिंग उद्योग में लगभग 40 प्रतिशत का योगदान है।

वष्र 2008 में, एक अध्‍ययन ने बैंगलोर, चैन्‍नई, दिल्‍ली राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र, हैदराबाद, मुंबई तथा पुणे के छ: भारतीय शहरों को विश्‍व के शीर्षस्‍थ 10 आउट सोर्सिंग गंतव्‍य स्‍थलों में सूचीबद्ध किया है।

चीन भारतीय आउट सोर्सिंग उद्योग का एक प्रमुख बड़ा प्रतिस्‍पर्धी है। किंतु, भारत लागत लाभ की पेशकश करता है जिसे मात देना आसान नहीं हैं। तथापि, आईटी व्‍यवसायियों के बढ़ते वेतन बिल तथा वैश्विक वित्तीय मंदी आउट सोर्सिंग व्‍यवसाय प्रक्रियाओं के लिए एक वरीय गंतव्‍य स्‍थल के रूप में भारत की स्थिति को चुनौती दे रही है।

फिर भी, भारत में बीपीओ उद्योग में भारी उछाल ने उनके कर्मचारियों के लिए अनेकों लाभों सहित अनेकों रोजगार अवसरों का सृजन किया है। उनमें से कुछ निम्‍न स्‍वरूप के हैं :-

  • भविष्‍य निधि;
  • उपदान;
  • समूह मेडीक्‍लेम बीमा योजना;
  • वैयक्तिक दुर्घटना बीमा योजना;
  • आर्थिक सहायता प्राप्‍त खाद्य पदार्थ तथा संवहन;
  • कंपनी द्वारा लीज पर दिए गए आवास;
  • मनोरंजन, कैफेटैरिया, एटीएम तथा द्वारपाल सुविधाएं;
  • कॉर्पोरेट क्रेडिट कार्ड;
  • सेल्‍युलर फोन/लैपटॉप;
  • वैयक्तिक स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल (नियमित चिकित्‍सा जांच);
  • शै‍क्षणिक लाभ;
  • निष्‍पादन आधारित प्रोत्‍साहन;
  • लचीला समय;
  • नम्‍य वेतन लाभ;
  • मात़ृत्‍व अवकाश;
  • कर्मचारी स्टॉक विकल्‍प योजना; इत्‍यादि

सामान्‍यत:, बीपीओ उद्योग की संवृद्धि किसी देश के विद्यमान अवस्थिति संबंधी कारकों द्वारा अधिकांशत: प्रभावित होती है। इसमें कार्यबल का आकार, वेतन परिवर्ती, सुस्थिर तथा अनुकूल व्‍यवसाय माहौल, दूर संचार मूल संरचना, कारोबार प्रतिबंध तथा सर्वोपरि भाषा संबंधी सक्षमताएं शामिल हैं। भारत कुछेक अवरोधों को छोड़कर इन सभी विशिष्‍टताओं का स्‍वामी होने का श्रेय ले सकता है।

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