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आउटसोर्सिंग उद्योग
आउटसोर्सिंग उद्योग
भारत तथा आउटसोर्सिंग:
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आउट सोर्सिंग उद्योग भारत में एक उभरता उद्योग है जो अर्थव्‍यवस्‍था की स्‍थायी संवृद्धि में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। मोटे तौर पर, इसमें 60-70 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से वृद्धि हो रही है। इस उद्योग का मूल्‍य लगभग 52 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है। इसके मुख्‍य प्रेरक बल व्‍यवसाय प्रक्रिया आउट सोर्सिंग (बीपीओ) तथा ज्ञान प्रक्रिया आउट सोर्सिंग (केपीओ) है।

सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवाएं (आईटीईएम) तथा बीपीओ रोजगार अवसरों तथा राजस्‍व सृजन दोनों के अर्थ में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी में तीव्रतम वृद्धिकारी क्षेत्रक हैं नव स्‍नातकों के लिए, विशेषतया सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्रक से स्‍नातकों के लिए ये सर्वाधिक वांछनीय कैरियर विकल्‍प बन गए हैं। ऐसा भारत की लाभप्रद स्थिति के कारण हैं जो उसे निम्‍न लागत, अंग्रेजी भाषाई, वैज्ञानिक तथा तकनीकी योग्‍यता को एक सर्वाधिक बड़ा भंडारण होने के कारण प्राप्‍त है। भारत में नियोजित आईटी तथा आईटीईएम - बीपीओ व्‍यवसायियों की संख्‍या वर्ष 1999-2000 में 2,84,000 से बढ़कर वर्ष 2006-07 में 1.63 मिलियन से अधिक हो गई है। इस उद्योग द्वारा प्रत्‍यक्ष रोजगार विगत दशक में 26 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बड़ा है जिससे यह देश के संगठित निजी क्षेत्रक में सबसे बड़ा नियोक्‍ता बन गया है।

भारत में घरेलू तथा अंतरराष्‍ट्रीय दोनों प्रकार के कॉल सेंटरों की स्‍थापना तथा विकास के अंसख्‍य अवसर विद्यमान हैं। कोई भी कंपनी अपने ग्राहकों के साथ संव्‍यवहार करने के लिए स्‍वयं अपने कॉल सेंटर की स्‍थापना कर सकती है अथवा/तथा यह किसी व्‍यावसायिक फर्म को यह कार्य करने के लिए नियोजित कर सकती है। एक ओर, इससे कुल मिलाकर लोगों के लिए अच्‍छे वेतन पैकेज वाले अधिक रोजगार अवसर स़ृजित होते हें, तथा दूसरी ओर, इससे देश में वैश्विक व्‍यवसायों का आगमन होता है तथा इस प्रकार भारत की राष्ट्रिक आय को बढ़ाने में सहायता मिलती है। अत: विश्‍व में आउट सोर्सिंग क्रियाकलापों के फलने फूलने से भारत को और अधिक विदेशी मुद्रा अर्जन हासिल होंगे।

इसके अतिरिक्‍त भारत से बीपीओ निर्याता वर्ष 2003-04 में 3.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2006-07 में 8.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के स्‍तर पर पहुंच गए हैं। आईटीईएस, बीपीओ सहित भारतीय सॉफ्टवेयर तथा सेवा निर्यातों के वर्ष 2007-08 में 40.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर (163,000 करोड़ रुपए) होने का अनुमान है जबकि इस की तुलना में राजकोषीय वर्ष 2006-07 में यह आंकड़ा 31.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर (141,000 करोड़ रुपए) था, यह डॉलर के अर्थ में 28.3 प्रतिशत की और रुपए के अर्थ में 15.6 प्रतिशत की वृद्धि है1 .इसके अतिरिक्‍त, आईटीईएस - बीपीओ से निर्यात राजस्‍व के वर्ष 2006-07 में 8.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर (37,700 करोड़ रुपए) से बढ़कर वर्ष 2007-08 में 10.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर (44,600 करोड़ रुपए) होने का अनुमान है, जो 30 प्रतिशत (डॉलर के अर्थ में) तथा 18.3 प्रतिशत (रुपए के अर्थ में) से अधिक की वर्षानुवर्ष वृद्धि है।

हालांकि केपीओ क्षेत्रक भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की वृद्धि के लिए वर्धनात्‍मक रूप से सर्वाधिक वरीय विकल्‍प बनता जा रहा है जहां भारतीय कंपनियां अपने प्रमुख ज्ञान कार्य की आउट सोर्सिंग करती है। यहां प्रमुख लाभ तथा अवसर क्षेत्र हैं - लागत बचत, प्रचालनात्‍मक कुशलता कुशल तथा योग्‍य कार्यबल तक पहुंच, बहुभाषाई सक्षमताएं तथा बेहतर गुणवत्ता मानदंड।

इसके अतिरिक्‍त, भारत की आउट सोर्सिंग उद्योग का व्‍यवसाय मुख्‍यत: प्रगतिशील तथा विकसित देशों जैसे युनाइटेड स्‍टेट्स (अमेरिका), युनाइटेड किंगडम (यू.के), इत्‍यादि से प्राप्‍त होता है। इस प्रकार, ऐसे देशों से आय का प्रमुख भाग अधिग्रहीत करना भारत के लिए एक श्रेष्‍ठ अवसर है। साथ ही, इससे भारतीय प्रतिपक्षियों को अपने वर्तमान कर्मचारियों के कौशलों का उन्‍नयन करने, कार्यकारी स्थितियों में सुधार लाने, गुणता मानकों में सुधार लाने, इत्‍यादि के लिए प्रोत्‍साहन मिलता है। यद्यपि, अमेरिका एवं युनाइटेड किंगडम भारतीय आईटी- बीपीओ निर्यातों ( हार्ड वेयर को छोड़कर) के लिए प्रमुख बाजार हैं, जो कुल निर्यातों के लगभग 80 प्रतिशत के लिए उत्तरदायी है,यह उद्योग सुस्थिर रूप से अन्‍य बाजारों जैसे कांटीनेंटल यूरोप तथा एशिया पैसिफिक में अपना उद्भासन बढ़ा रहा है। यह भारतीय आउट सोर्सिंग उद्योग के लिए एक सकारात्‍मक उज्‍ज्‍वल अवसर है।

यद्यपि, भारत की आउट सोर्सिंग को अनेकों चुनौतियों, आंतरिक रूप से तथा साथ ही वैश्विक बाजारों से, का सामना करना पड़ रहा है, फिर भी यह कई नवीन व्‍यवसाय मॉडलों का स़ृजन कर रहा है जो कीमती प्रबंधन समय तथा संसाधनों में वस्‍तुत: बचत कर सकते है तथा साथ ही कंपनियों को अपनी कोर सक्षमताओं पर ध्‍यान संकेंद्रित करना अनुमत करते हैं। अंतरराष्‍ट्रीय मानकों की पूर्ति के लिए, भारत को आउट सोर्सिंग अब केवल मात्र लागत बचतों पर संकेंद्रित होने के बजाए उच्‍च तथा सुस्थिर स्‍थायी गुणवत्ता प्रणालियों पर अधिक संकेंद्रण कर रहा है।

यद्यपि आईटी- बीपीओ क्षेत्र निर्यात चालित है, घरेलू बाजार भी महत्‍वपूर्ण है। घरेलू बाजार में बीपीओ मांग ने विगत कुछ वर्षों में उल्‍लेखनीय अभिवृद्धि परिलक्षित की है। यह न केवल नौकरी के सृजन तथा आय के सृजन में परिणामी हुआ है बल्कि इसने अनेक अनुषंगी उद्योगों जैसे संवहन, स्‍थावर संपदा तथा केटरिंग इत्‍यादि की संवृद्धि प्रक्रिया का आरंभण भी कर दिया है तथा साथ ही उच्‍च व्‍यय योग्‍य आय वाले युवा उपभोक्‍ताओं की उभरती श्रेणी का सृजन करके प्रत्‍यक्ष कर संग्रहणों में वृद्धि की शुरूआत की है तथा उपभोक्‍ता व्‍यय में वृद्धि को प्रणोदित किया है।

इन सबसे यह दर्शित होता है कि भारत आईटी सॉफ्टवेयर, आईटीईएस के आउट सोर्सिंग तथा बीपीओ/केपीओ क्षेत्रकों तथा साथ ही अन्‍य प्रकार की आउट सोर्सिंग श्रेणियों के लिए एक वैश्विक विद्युत गृह (प्रकाश स्‍तंभ) के रूप में उभरने में असंख्‍य अवसर विद्यमान है तथा इसे विश्‍व भर में निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्‍य स्‍थल माना जाता है। इस उद्योग ने प्रौद्योगिकी अनुकूलन बढ़ाने में भी सहायता की है जिससे घरेलू बाजार में निष्‍पादन और प्रतिस्‍पर्धात्‍मकता में वृद्धि होती है तथा साथ ही कार्यबल में महिलाओं की अपेक्षाकृत अधिक प्रतिभागिता में आर्थिक अंतरों को कम करने का प्रयास भी किया है।

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