आज के प्रतिस्पर्धी माहौल में, प्रमुख विशेषज्ञता तथा सक्षमता के क्षेत्रों पर संकेंद्रण करने पर ध्यान दिया जाता है जबकि शेष क्रियाकलापों की आउट सोर्सिंग की जाती है। अधिकांश संगठन यह मानने लगे है कि कोर-भिन्न क्रियाकलापों की आउट सोर्सिंग करने से न केवल लागतें न्यूनतम हो जाती हैं तथा कुशलताओं में सुधार होता हैं बल्कि संपूर्ण व्यवसाय में भी सुधार हो जाता है क्योंकि संकेंद्रण व्यवसाय क्रियाकलाप के प्रमुख संवृद्धि क्षेत्रों की ओर अंतरित हो जाता है।
आउट सोर्सिंग का लक्ष्य मेज़बान संगठन के महत्व को बढ़ाना है। जब कोई कंपनी किसी अन्य कंपनी के साथ दीर्घावधिक अपतटीय आउट सोर्सिंग संबंध स्थापित करती है तो इस उद्यम की सफलता की नींव वार्ताकारी अवधि के दौरान ही रख दी जाती है।
आउट सोर्सिंग प्रस्तावों का मूल्यांकन तथा निष्पादन अक्सर सेवाओं तथा लागतों के बारे में अपर्याप्त सूचना के साथ किया जाता है। यह एक ऐसे समझौते में परिणामी हो सकता है। जिसमें अपेक्षित सेवाओं के पूर्ण समूह को परिभाषित न किया जाए, जिसके परिणामस्वरूप प्रत्याशित लागत बचतें हासिल न हों तथा जिसमें सेवा कमियों को दूर करने तथा आउट सोर्सिंग करने वाले की निगरानी करने के लिए महत्वपूर्ण संख्या में आंतरिक स्टॉक को प्रतिधारित रखना आवश्यक हो जाए।
सेवाओं तथा लागतों के संपूर्ण अवबोधन, परिवर्तन के प्रभाव तथा संबद्ध जोखिम इत्यादि के संपूर्ण अवबोधन पर आधारित होते हैं। इन में यह जांच की जानी शामिल है कि क्या कोई संगठन ऐसे कार्य की व्यवस्था करने में प्रभावी तथा कुशल है जो व्यवसाय के लिए महत्वपूर्ण है।
आम तौर पर चर्चा की गई कुछ सर्वोत्तम आउट सोर्सिंग प्रक्रियाएं निम्नानुसार हैं :
- किसी विशिष्ट सेवा के आउट सोर्सिंग के स्पष्ट उद्देश्य स्थापित करना;
- आउट सोर्सिंग कर्ता कंपनी की संस्कृति तथा व्यवसाय उद्देश्यों के साथ सही अनुभव, संचार कौशलों तथा कार्य करण की शैली के साथ सुसंगत होना चाहिए;
- व्यवसाय प्रचालनों में ऐसे आधारभूत अंतरण के लिए न्यायोचित दीर्घावधिक परिणाम पर संकेंद्रण करना;
- अच्छा परिदाय हासिल करने पर संकेंद्रण करना;
- यह सुनिश्चित करना कि सेवा प्रदायक परियोजना की विशिष्टताओं को समझता हैं जिसके लिए काफी अधिक समन्वय तथा परस्पर संचार की आवश्यकता है;
- स्थल पर यह देखने के लिए उपस्थित रहना कि वस्तुत: क्या हो रहा है;
- सफल संबंध कायम रखने के लिए आवधिक औपचारिक पुनरीक्षा बैठकें का आयोजन करना;
- प्रोत्साहन तथा परिसंपत्ति योजनाओं का पूर्ण निर्धारण करना ताकि सेवा प्रदायक निर्धारण आधारित कीमत निर्धारण कसौटी अपना कर स्थापित ग्राहक प्रत्याशाओं को पूरा करने के लिए अभिप्रेरित हो;