अपने विकास के आरंभ के समय से, भारत का आउटसोर्सिंग उद्योग अनेक चुनौतियों तथा प्रतिबंधों का सामना कर रहा है जो बीपीओ कंपनियों तथा उनके कर्मचारियों की अभिवृद्धि को प्रभावित करते हैं। अंतरराष्ट्रीय गुणता मानकों को पूरा करने के उद्देश्य से, यह समय समय पर नए व्यवसाय मॉडल प्रदर्शित कर रहा है तथा साथ ही अपने कर्मचारियों के प्रशिक्षण में अधिक प्रयास तथा निधियों का व्यय कर रहा है। भारतीय बीपीओ उद्योग को भली भांति ज्ञात है कि ग्राहक संतुष्टि के साथ साथ सुसंगतता एवं निरंतरता भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल निम्नतर लागतों तथा बहुभाषाई क्षमताओं जैसे लाभों के साथ ही संभाग्यताओं के पूर्ण लाभ नहीं ले सकता। इसके अतिरिक्त, यह अपने क्लायंट के व्यवसाय का अधिक्षेत्र ज्ञान सक्रिय रूप से प्राप्त करके अपने ग्राहकों का मूल्यवर्धन कर सकता है। इस प्रकार, वर्तमान समय की आवश्यकता भारत में बीपीओ/केपीओ के ठोस तथा स्वस्थ विकास के लिए कुछ उपयोगी कदम उठाने की है।
अर्थव्यवस्था में आउटसोर्सिंग क्रियाकलापों के बेहतर प्रबंधन के लिए तथा भारत की स्थिति को वैश्विक मंच पर बहिस्रोतण के केंद्र के रूप में स्थिर बनाए रखने के लिए सरकार द्वारा केंद्र तथा राज्य दोनों स्तरों पर उनके कदम उठाए गए है। इनको मद्देनज़र रखते हुए, कुछ सुझाव नीचे सूचीबद्ध किए गए हैं :
- तकनीकी ज्ञान के लिए पर्याप्त अवसरों का सृजन करके/ उन्हें प्रोत्साहित करके योग्यता आधार का विकास करना।
- बीपीओ कर्मचारियों के लिए समुचित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अभिकल्पन करना।
- व्यापक तथा अनिवार्य व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराना
- कंपनियों द्वारा प्रयुक्त चुनावों तथा प्रक्रियाओं में सुधार लाना तथा अधिकाधिक संगठनों को आउटसोर्सिंग मॉडल की ओर संचालन के लिए प्रेरित करके आउटसोर्सिंग को अपेक्षाकृत सहज बनाना।
- कर्मचारियों की भर्ती में नैतिकता की उचित संहिता तथा प्रक्रियाविधियों का अनुसरण करना।
- उचित नियंत्रण एवं गुणता प्रबंधन प्रणालियां सुनिश्चित करना।
- समुचित सामाजिक सुरक्षा कानूनों का अधिनियमन ।
- स्वास्थ्य तथा सुरक्षा के खतरों संबंधी सर्वोत्तम व्यवहार समाविष्ट करना।
- कार्यस्थल पर महिलाओं की उचित सुरक्षा के साथ ठोस कार्य माहौल का विकास करना।
बेहतर स्वास्थ्य देखभाल नीति का अनुसरण करना जिसमें कर्मचारियों की नियमित स्वास्थ्य जांच शामिल हो तथा इस विशिष्टिता को अनिवार्य बना दिया जाना चाहिए।
समय प्रबंधन तथा अन्य कार्यनीतियों का विकास करना ताकि बीपीओ कर्मचारियों की स्वास्थ्यकर जीवन शैली की आदतों को प्रोत्साहित किया जाए जैसे उचित नींद लेना, थकावट तथा तनाव की रोकथाम करना, इत्यादि।
इसके अतिरिक्त, ग्राहक देखभाल तथा सहायता सेवाओं के साथ साथ अन्य सेवा लाइनों पर भी व्यापक तरीके से विचार किया जाना चाहिए जैसे वित्त, मानव संसाधन कानूनी प्रक्रियाविधि विषयवस्तु विकास, इत्यादि। सर्वाधिक महत्वपूर्ण यह है, कि आउटसोर्सिंग उद्योग में भारत के लाभों को स्थायी बनाने के लिए तथा सभी दोहन न किए गए क्षेत्रों का अन्वेषण करने के लिए सरकारी तथा निजी क्षेत्रकों द्वारा संयुक्त प्रयास किए जाने चाहिए। वर्धित नवाचार तथा प्रौद्योगिकी अनुकूलन मार्गदर्शन बल होने चाहिए।