भारत में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा (चीन के बाद) डायस्पोरा है जिसकी उपस्थिति सभी 6 महाद्वीपों में पर्याप्त रूप से है। भारतीय डायस्पोरा दुनिया भर के देशों में उनके आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक बल में महत्वपूर्ण योगदान देता है। दुनिया भर के 110 देशों, उनके उद्यमों, आर्थिक शक्ति, शिक्षा और व्यावसायिक कौशलों को व्यापक रूप से मान्यता मिली है। उन्हें आपस में बांधने वाला बंधन दुनिया भर में रहने वाले भारतीय समुदाय को भारत में मौजूद भारतीयता के साथ बांधता है।
विदेशी भारतीय कार्य मंत्रालय (एमओआईए) का गठन भारत तथा इसके डायस्पोरा के बीच आपसी रूप से हितकारी और सहजीविता के संबंध को प्रोत्साहन, पोषण और स्थायित्व प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया है। मंत्रालय में यह भी मान्यता दी जाती है कि हमारे राज्यों के संघ में विभिन्न राज्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अत:, राज्यों को डायस्पोरा के साथ संलग्नता की पूरी प्रक्रिया में एक हिस्सेदारी विकसित करने का और प्राकृतिक पणधारी भागीदार बनने का प्रोत्साहन दिया जाता है। डायस्पोरा ने अपने मूल राज्य में प्रेषण, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई), ज्ञान के अंतरण एवं उद्यमी नेटवर्कों में अपार योगदान दिया है।
भारत की अर्थव्यवस्था तथा समाज में भारतीय डायस्पोरा का योगदान अत्यंत गर्व का विषय है और यह दुनिया भर में भारतीय नागरिकों की उपलब्धि है। भारतीय डायस्पोरा का एक अतुलीय योगदान सामाजिक प्रेषण या विचारों के प्रवाह के रूप में है जिसका शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रभाव है। यह भी बताया जाता है कि प्राथमिक और उच्चतर शिक्षा के साथ कौशल विकास भारत की सर्वाधिक महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक है और यह विदेशी भारतीयों के लिए भागीदारी का सर्वोत्तम संभव क्षेत्र बना हुआ है।
भारतीय डायस्पोरा द्वारा प्रत्येक वर्ष 27 बिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि स्वदेश में वापस भेजी जाती है जो किसी भी देश के लिए सबसे बड़ी राशि है। वे दुनिया के ज्ञान, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्कों, नए विचारों, प्रौद्योगिकियों तथा बाजारों में अपनी मातृ भूमि को योगदान देते हैं। अपने डायस्पोरा के समर्थन से भारत व्यापार प्रक्रिया की आउटसोर्सिंग, सूचना प्रौद्योगिकी और भैषजिकी में दुनिया का अग्रणी देश बन गया है।
यह देखा गया है कि भारत के साथ संलग्नता के स्तर को ऊपर उठाने में भारतीय डायस्पोरा का प्रकरण सशक्त है। विदेशी नेटवर्कों के प्रभाव का वैश्विक अनुभव व्यापार तथा निवेश के स्रोतों और सुविधा प्रदानकर्ताओं के रूप में, प्रेषण के प्रबंधक, साथ ही मस्तिष्क बैंक के रूप में पर्याप्त है।
तीव्र संचार, अंतरराष्ट्रीय यात्रा की सुविधा में विकास, मेजबान देश की उदारता पूर्ण नीतियां आदि भारतीय डायस्पोरा को अपने अपने मेजबान देशों में सहज रूप से समेकित करने में एवं उनके सामाजिक - आर्थिक और राजनैतिक संबंध भारत के साथ उनके पारम्परिक जाति समूहों के साथ भी बनाने में सहायक हैं, जो दुनिया भर में फैले हैं। ऐसे नेटवर्क बहुराष्ट्रीय के साथ उभरते हुए भारतीय बहुराष्ट्रीयों के लिए भी उपयोगी है। वे भारत में वैश्वीकरण की प्रक्रिया को सुविधा प्रदान करते हैं।
भारतीय डायस्पोरा के कुछ हिस्सों ने वैश्विक पहचान अर्जित की है और वे वैश्विक नागरिकता की उभरती संकल्पना के प्रवर्तक हैं। इसके अलावा राजनैतिक रूप से संलग्न डायस्पोरा के युवा सदस्य अपनी बौद्धिक पूंजी, उत्साह, समर्पण तथा ऊर्जा के कारण एक बहुत बड़ी परिसंपत्ति है। साथ ही डायस्पोरा के सदस्य, उनके संगठन और कंपनियां भारत के मेजबान की भूमिका निभा सकते हैं, जो सकारात्मक रूप से उन देशों में भारत की समझ को प्रभावित करते हैं जहां डायस्पोरा की पर्याप्त उपस्थिति है।
दूसरे शब्दों में भारत के डायस्पोरा और भारत देश के बीच वर्तमान संबंध एक वैश्विक शक्ति के रूप में भारत के उभरने में एक सामरिक साधन के रूप में कार्य करता है।