आज के तेजी से बदलते व्यापार परिदृश्य में राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों के बीच अपनी अपनी अर्थव्यवस्थाओं में निवेशों को आकर्षित करने के लिए सघन प्रतियोगिता है। निवेशक आम तौर पर ऐसे राज्य / संघ राज्य को चुनते हैं जहां औद्योगिक तथा सामाजिक मूल संरचना का सर्वोत्तम संयोजन, प्रौद्योगिकी से परिचित कार्यबल और व्यापार अनुकूल परिवेश की उपस्थिति मिलती है। तदनुसार अनेक नीतिगत पहलें और उपाय विभिन्न राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों की सरकारों द्वारा की जाती है।
पिछले कुछ वर्षों से अधिक से अधिक भारतीय राज्य / संघ राज्य क्षेत्र अपने अनिवासी भारतीयों और अन्य विदेशी भारतीयों को आकर्षित कर रहे हैं। वे अलग अलग अर्थव्यवस्थाओं के प्रबलन क्षेत्रों की मौजूदा संभाव्यताओं को उभारने के लिए अनिवासी भारतीयों को प्रोत्साहित करने के कदम निरंतर उठा रही है और साथ ही इसके अनुसार अधिक से अधिक निवेश किए जा रहे हैं। विदेशी भारतीय नागरिकों को राज्य / संघ राज्य क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। भारी निवेश धारण करने वाले कुछ प्रमुख निवेश के अवसर हैं : कृषि आधारित उद्योग, औषधियां और भैषजिकी, सूचना प्रौद्योगिकी और आईटीईएस, चमड़े के उत्पाद, रसायन, ऑटो मोबाइल, बिजली के सामान, मूल संरचना आदि।
प्रत्येक राज्य / संघ राज्य क्षेत्र में उद्योग विभाग और / या औद्योगिक विकास निगम कार्यरत है जो औद्योगिक विकास के लिए आकर्षित निवेश के मार्ग प्रदान करते हैं। वे विदेशी भारतीयों द्वारा निवेश के प्रोत्साहन की अनेक गतिविधियां करते हैं। इन विभागों के अंदर अलग अलग अनिवासी भारतीय प्रकोष्ठ या संबंधित अभिकरण हैं जैसे कि गुजरात, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक आदि में। जबकि कुछ अन्य राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों में अनिवासी भारतीयों के लिए सुविधा केन्द्र हैं जैसे कि उड़ीसा, मध्य प्रदेश आदि।
इसके अलावा मौजूदा तथा आने वाली औद्योगिक नीतियां तथा अधिनियम राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा बनाए गए हैं, जिनमें अनिवासी भारतीयों तथा अन्य विदेशी भारतीयों द्वारा निवेशों की सुविधा प्रदान करने तथा प्रोत्साहन के विशेष प्रावधान हैं और राज्य / संघ राज्य क्षेत्र में औद्योगिक विकास की सुविधा भी दी जाती है।
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