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विदेशी भारतीय कार्य मंत्रालय (एमओआईए)' विदेशी भारतीयों के लिए एक नोडल अभिकरण है, जिसमें भारतीय मूल के व्यक्ति और अनिवासी भारतीय शामिल हैं। यह ऐसा केन्द्रीय बिन्दु है जहां विदेशी भारतीय, डायस्पोरा संघ, व्यापार और उद्योग, कानून निर्माता, विचार समूह और राय निर्माता, समाज के प्रमुख पणधारी और शासन साथ ही राज्य सरकारें जानकारी पाने के लिए संपर्क कर सकते हैं, यहां विदेशी भारतीयों से संबंधित भागीदारी और सभी मामलों की सुविधा उपलब्ध है। यह राज्य में क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के विकास में सक्रिय रूप से शामिल है जो डायस्पोरा की आवश्यकता के साथ संभावित प्रवासियों की जरूरतों का बेहतर प्रत्युत्तर देता है और भारत में उनके सशक्त नेटवर्क की स्थापना के लिए एक रोड मैप बनाता है।
इस मंत्रालय का लक्ष्य 4 कार्यात्मक सेवा प्रभागों के माध्यम से भारतीय और विदेशी भारतीयों के बीच आपसी लाभकारी और सक्रिय संबंध को प्रोत्साहन देना तथा पोषण देना है :
1. डायस्पोरा सेवा प्रभाग
यह प्रभाग विदेशी भारतीयों से संबंधित सभी मामलों पर कार्य करता है जैसे कि विदेशी नागरिकता के मामले, प्रवासी भारतीय दिवस, प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार, अनिवासी भारतीयों/भारतीय मूल के छात्रों को विभिन्न शैक्षिक, तकनीकी और सांस्कृतिक संस्थानों में भारत में प्रवेश दिलाना, भारत में अनिवासी भारतीयों और भारतीय मूल के छात्रों को छात्रवृत्तियों, और पर्यटन, मीडिया, युवा कार्य, शिक्षा, संस्कृति आदि में भारत के साथ विदेशी भारतीयों के मेल जोल को बढ़ावा देने की नई पहलें करना।
2. वित्तीय सेवा प्रभाग
यह भारत में विदेशी भारतीयों द्वारा निवेश को प्रोत्साहन देने के सभी मामलों पर कार्य करता है जिसमें समग्र सरकारी नीतियों के अनुरूप नवाचारी निवेश और नीतिगत पहलें शामिल हैं विशेष रूप से विशिष्ट तौर पर विदेशी भारतीयों के लिए बनाए गए विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड), विदेशी भारतीयों द्वारा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से संबंधित निवेश आयोग के साथ अंत:क्रिया, विदेशी निवेश प्रवर्तन मंडल और विदेशी निवेश कार्यान्वयन अभिकरण में प्रतिनिधित्व, इसके साथ ओआई द्वारा व्यापार, स्वास्थ्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी आदि जैसे क्षेत्रों में अंत:क्रिया के लिए नई पहलें। कुल मिलाकर मंत्रालय द्वारा विदेशी भारतीयों को निवेश नीतियों, उभरते निवेश अवसरों एवं अन्य वित्तीय सेवाओं संबंधित विषयों की एक व्यापक परास पर सूचना तथा मार्गदर्शन दिया जाता है।
3. प्रवास सेवा प्रभाग
यह भारत से विदेशी देशों में जाने के लिए और प्रवासियों के वापस लौटने तक प्रवास अधिनियम, 1983 के तहत सभी प्रवासों से संबंधित मामलों पर कार्य करता है। मंत्रालय का यह प्रभाग एक अधिक प्रभावी रूप से में संभावित प्रवासियों की जरूरतें पूरी करने के लिए राज्यों में क्षमता निर्माण को प्रोत्साहन देता है। इसके दायित्वों में प्रवास प्रबंधन को सुधारने, विधायी परिवर्तन प्रस्तावित करने, संस्थागत परिवर्तनों सहित प्रवास सुधारों के कार्यान्वयन एवं ई - शासन, प्रवासियों के लिए कल्याण योजनाओं का निर्धारण और अंत:राष्ट्रीय प्रवास में द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को प्रोत्साहन देने से संबंधित हैं।
4. सामाजिक सेवा प्रभाग
यह विदेशी भारतीयों के साथ हुए विवाह से उत्पन्न समस्याओं एवं संभावित दुल्हनों और उनके परिवारों के बीच उन सावधानियों के प्रति जागरूकता सृजन के मामलों पर कार्य करने वाला प्रभाग है, जो इन्हें ऐसी शादियों में रखनी चाहिए। मंत्रालय द्वारा प्रभावित भारतीय महिलाओं को कानूनी परामर्श और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसने कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जैसे कि :- (i) शादियों का अनिवार्य पंजीकरण; (ii) संभावित दुल्हनों और उनके परिवारों को शिक्षित करने के लिए जागरूकता अभियानों का आयोजन; (iii) उन धाराओं पर चर्चा करने के लिए अंतर-मंत्रालयीन उप समिति का गठन जिसे भारत का अन्य देशों के बीच द्विपक्षीय करारनामों में शामिल किया जा सके ताकि धोखेबाज व्यक्तियों के साथ शादी और असफल व्यक्तियों के हितों की सुरक्षा की जा सके।
इन कार्यात्मक सेवाओं के अंदर, मंत्रालय ने एक गैर लाभकारी न्यास के रूप में भारतीय उद्योग संघ (सीआईआई) के साथ भागीदारी में सार्वजनिक - निजी गठबंधन से 'विदेशी भारतीय सुविधा केन्द्र (ओआईएफसी)' का गठन किया है। यह केन्द्र विदेशों में स्थित भारतीयों के हितों की रक्षा के लिए एकल बिन्दु स्थान के रूप में कार्य करता है, जैसे कि अनिवासी भारतीय और भारतीय मूल के व्यक्ति। यह भारत के राज्यों, भारतीय व्यवहार और संभावित विदेशी निवेशकों को एक ही मंच पर लाने और निवेश के अवसरों को अभिज्ञात करने के माध्यम से निवेशकों को इसकी पूरी जानकारी देने के लिए लक्षित है। इसने अपने दो व्यापक क्षेत्रों को शामिल करने का अधिदेश बनाया है नामत: 'निवेश सुविधा' और 'ज्ञान नेटवर्किंग'। ओआईएफसी के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं :
- विश्वसनीय और वास्तविक समय सूचना देकर भारत में विदेशी भारतीयों के निवेश को प्रोत्साहन देना तथा व्यापार भागीदारी की सुविधा प्रदान करना।
- विदेशी भारतीयों के डेटाबेस के सृजन द्वारा डायस्पोरा ज्ञान नेटवर्क (डीकेएन) की स्थापना और रखरखाव, जो एक ज्ञान डायस्पोरा के रूप में कार्य करेगा तथा जिनके ज्ञान संसाधनों का उपयोग आईसीटी मंच के माध्यम से किया जा सकेगा।
- निवेश संबंधी सभी जानकारियों के लिए एक समाशोधन गृह के रूप में कार्य करना, जो आईसीटी मंच के माध्यम से एक वास्तविक समय आधार पर संसाधन सूचना द्वारा किया जाएगा।
- मूल संरचना और सामाजिक क्षेत्रों में विदेशी भारतीयों को निवेश के अवसर प्रदान करने में भारत के राज्यों की सहायता करना ।
- भारतीय मूल के व्यक्तियों और अनिवासी भारतीयों को सलाहकारी सेवाओं की मेजबानी प्रदान करना, जिसमें दूतावास संबंधी प्रश्न, भारत में प्रवास, निवेश और वित्तीय मुद्दे आदि शामिल हो सकते हैं।
- इच्छुक विदेशी भारतीयों को परामर्शी, सलाहकारी और सहायता देने की सेवाएं व्यापक संख्या में प्रदान करना, जो भारत के व्यापक क्षेत्रों में निवेश करना चाहते हैं जैसे कि पूंजी बाजार निवेश, निर्माण और सेवा क्षेत्र, निवेश, कराधान के मुद्दे, रियल एस्टेट निवेश आदि।
देश में एक अन्य महत्वपूर्ण संगठन 'वित्त मंत्रालय' हैं, जो विदेशी भारतीयों से संबंधित वित्तीय मुद्दों पर कार्य करता है। यह सात नीतिगत उपाय और पहलें करते हुए भारत के परिवेश को निवेशकों के लिए आकर्षक बनाता है, यह निवेश आयोग, विदेशी निवेश प्रवर्तन मंडल, आदि जैसे अभिकरणों के माध्यम से कार्य करता है।
मंत्रालय में 'आर्थिक कार्य विभाग' के अधीन अनिवासी भारतीय प्रकोष्ठ है जो अनिवासी भारतीयों के लिए निवेश नीति, भारतीय निवेश केन्द्र, विदेशी संस्थागत निवेशक, पोर्टफोलियो, विदेशी उद्यम पूंजी निवेश में नीतियां, यूरो - साम्या / विदेशी मुद्रा बदलने योग्य बॉन्ड और रुपए के संदर्भ में विदेशी निवेश पर नीति, जो पूंजी बाजार में परिवर्तन योग्य प्रतिभूतियां हैं, से संबंधित कार्यों को निपटाता है।
भारतीय निवेश केन्द्र वित्त मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय के रूप में कार्यरत है जो विदेशी निजी निवेशों के साथ अनिवासी भारतीयों के निवेश को प्रोत्साहन देता है। यह अनिवासी भारतीयों, भारतीय मूल के व्यक्तियों तथा विदेशी नैगम निकायों द्वारा निवेशों के लिए एक नोडल अभिकरण है। यह भारत सरकार की निवेश नीतियों पर मार्गदर्शन और सूचना प्रदान करता है। यहां मूल संरचनात्मक सुविधाओं, प्रोत्साहनों, निवेश के अवसरों की उपलब्धता है और साथ ही यह सलाहकारी सेवाएं भी प्रदान करता है। अर्थात यह अनिवासी भारतीयों के निवेशों वाली परियोजनाओं के लिए एकल बिन्दु अभिकरण के रूप में कार्य करता है तथा ऐसी परियोजनाओं को स्थापित करने के लिए सभी अनिवार्य आवश्यकताएं पूरी करता है।
पुन: 'विदेश मंत्रालय (एमईए)' द्वारा विदेशों से संबंधों के सभी पक्षों का दायित्व लिया जाता है अर्थात विदेशी देशों में रहने वाले भारतीयों के साथ, उनके दूतावासों / राजदूतावासों आदि से संबंध बनाए रखना।
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