लगभग सभी राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों की सरकारें अपने अपने राज्य की अर्थव्यवस्था के प्रत्येक क्षेत्र में निवेशों के लिए आदर्श परिस्थितियों के सृजन के सभी संभव प्रयास करती हैं। वे केन्द्र सरकार के समन्वय से देश में विकास की गति भी बनाए रखती है। तदनुसार वे विभिन्न राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित करने के लिए नीतियों की सुसंरचित रूपरेखा तैयार कर रही है। ऐसी कुछ नीतिगत पहलें इस प्रकार हैं
1. केरल की औद्योगिक नीति, के तहत, सरकार का उद्देश्य पारिस्थितिक तंत्र और पर्यावरण को प्रभावित किए बिना वाणिज्यिक गतिविधियों में बड़ी छलांग लगाने और तीव्र औद्योगिकीकरण के माध्यम से उच्च और स्थायी आर्थिक वृद्धि को अर्जित करना है। इस नीति में केरल के लोगों को बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर देना तथा केरल को एक निवेशक अनुकूल गंतव्य के रूप में बदलना शामिल हैं। अर्थात यह केरल को विनिर्माण, कृषि संसाधन, स्वास्थ्य सेवाओं, ज्ञान आधारित उद्योगों तथा सेवाओं के एक मनपसंद गंतव्य के रूप में बनाने के इच्छुक है। इसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सहित अनिवासी भारतीयों और अनिवासी केरलवासियों को अपने अधिशेष निवेश योग्य धन को राज्य में लाने के लिए आकर्षित करने की योजनाएं बनाई जानी है और इस प्रकार वे विनिर्माण और सेवाओं के मुख्य क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता का दोहन करने में समर्थन बनेंगे। इसमें अनिवासी भारतीय निवेशकों के लिए विशिष्ट औद्योगिक पार्कों की स्थापना भी शामिल है।
2.
आंध्र प्रदेश की औद्योगिक नीति की घोषणा आंध्र प्रदेश को औद्योगिक निवेशों तथा विदेशी निवेशों के माध्यम से एक आकर्षक गंतव्य बनने को प्रोत्साहन देने हेतु की गई है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को कौशल अंतरण, ज्ञान और प्रौद्योगिकी को राज्य में लाने का एक महत्वपूर्ण मार्ग माना गया है तथा यह औद्योगिक निष्पादन का एक महत्वपूर्ण प्रेरक है। इस प्रकार निवेषकों को राज्य में परियोजनाएं कार्यान्वित करने के लिए उच्चतम प्राथमिकता दी जाती है। इस नीति में निजी क्षेत्र के औद्योगिक मूल संरचनात्मक विकास में निवेश की सुविधा द्वारा राज्य की मूल संरचना को सुधारा जाना है। इन उद्देश्यों के अनुसार एक स्वायत्त निकाय (आंध्र प्रदेश निवेश) का सृजन प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की आवश्यकता आकलन और मानचित्रण के लिए एवं औद्योगिक इकाइयों की स्थापना हेतु समय पर समाशोधन और सहायता प्रदान करने में सहायता देने हेतु किया गया है।
3. उत्तर प्रदेश राज्य में औद्योगिक तथा सेवा क्षेत्र निवेश नीति 2004 की घोषणा उद्योग, व्यापार, वाणिज्य और सेवाओं के क्षेत्र में वृद्धि की गति तेज करते हुए राज्य के चहुंमुखी विकास को प्राप्त करने हेतु की गई है। इसमें ये कार्यनीतियां शामिल है जैसे कि : औद्योगिक विकास में नीति भागीदारी को प्रोत्साहन, अत्यंत छोटे, छोटे और भारी क्षेत्रों का संतुलित विकास, निर्यातों को प्रोत्साहन, अनिवासी भारतीयों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को प्रोत्साहन, जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए आश्वासन, सेवा क्षेत्र की भूमिका को मान्यता आदि। इस नीति में यह माना गया है कि राज्य में अनिवासी भारतीयों से बड़ी मात्रा में निवेश आकर्षित करने की अपार संभाव्यता निहित है। साथ ही अनिवासी भारतीयों के उद्यम कौशल और क्षमताएं उत्तर प्रदेश के होने के नाते विश्व भर में मान्यता पाते हैं। इस प्रकार यह नीति राज्य में अनिवासी भारतीयों द्वारा आकर्षक निवेश परिवेश सृजित करने पर लक्षित है, ताकि अनिवासी भारतीयों द्वारा इस प्रक्रिया विधि को नियमों तथा प्रक्रिया विधि में पर्याप्त बदलाव लाकर सहज बनाया जा सके, अनिवासी भारतीयों का एक विस्तृत सर्वेक्षण करना ताकि उन्हें अपेक्षित सुविधाएं एवं प्रोत्साहन दिया जा सके ताकि वे भूमि विकास, मूल संरचना, खनन, सेवा क्षेत्र आदि जैसे क्षेत्रों में अधिक से अधिक निवेश राज्य में कर सकें। ये सभी प्रयास विदेशी भारतीयों के प्रस्ताव पर उच्चतम प्राथमिकता देने के लिए लक्षित है।
4. निवेश और व्यापार को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से कर्नाटक सरकार द्वारा औद्योगिक विकास के संदर्भ में राज्य की नीतियों के निर्धारण और कार्यान्वयन किए गए हैं। यह प्रगतिशील नीतियों और कार्य नीतियों के माध्यम से राज्य में प्रत्यक्ष विदेशी निवेशों को आकर्षित करने के सभी प्रयास करती है। भारत सरकार की संघीय नीति के मार्गदर्शी सिद्धांत भी राज्य में परियोजनाएं स्थापित करने पर लागू है। राज्य के लिए अनुमोदित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रस्ताव की निगरानी इनके शीघ्र कार्यान्वयन की सुविधा प्रदान करने के लिए उच्चतम स्तर पर की जाती है।
राज्य में नई औद्योगिक नीति 2006-2011 है जो स्थायी वृद्धि उन्मुख औद्योगिकीकरण के साथ राज्य के समग्र सामाजिक -आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देने पर लक्षित है। नीति के अन्य उद्देश्य इस प्रकार
हैं :
- पुरानी अर्थव्यवस्था और नए अर्थव्यवस्था क्षेत्रों में शक्ति के साथ विविधीकृत औद्योगिक आधार को प्रोत्साहन देना।
- आर्थिक अवसरों, रोजगार और वृद्धि के मामले में क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने की सुविधा प्रदान करना।
- निवेश के त्वरित प्रवाह आदि की सुविधा द्वारा निरंतर औद्योगिक वृद्धि को प्रोत्साहन देना।
5. मध्य प्रदेश की पिछली औद्योगिक नीति अधिक पूंजी के निवेश आकर्षित करने के माध्यम से राज्य में औद्योगिक विकास के त्वरण और सुदृढ़ीकरण पर लक्षित है। नीति के उद्देश्य इस प्रकार हैं :
- मध्य प्रदेश को औद्योगिक दृष्टि से विकसित राज्यों की श्रेणी में लाना।
- ''उद्योग रहित'' विकास खण्डों में अतिरिक्त सुविधाएं देकर संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करना।
- राज्य के मानव और प्राकृतिक संसाधनों की अधिक उपयोगिता के माध्यम से राज्य के औद्योगिक विकास की गति में तेजी लाना।
- रोजगार के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अवसरों की संख्या बढ़ाना।
- ग्रामीण उद्योगों के त्वरित विकास के लिए विशेष अवसरों का सृजन करना।
- लघु स्तर के क्षेत्र के विकास हेतु नए अवसरों का सृजन।
- बड़े और मध्यम क्षेत्रों में निवेश के नए अवसरों का सृजन करना।
- छोटे स्तर की इकाइयों और बड़े तथा मध्यम उद्यमों के बीच सहक्रियात्मक सहसंबंधों की सुविधा प्रदान करना।
- उच्च प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देना।
- अनिवासी भारतीयों द्वारा निवेश को प्रोत्साहन देना।
- मूल संरचना विकास आदि में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन देना।
एक नई नीति औद्योगिक प्रवर्तन नीति 2004 में उद्योग अनुकूल प्रशासन के सृजन, रोजगार के अवसर अधिकतम बनाने, औद्योगिक बीमारी से निपटने एवं फलते फूलते निजी क्षेत्र की भागीदारी के सृजन की संकल्पना की गई है। नीति में इन बातों पर प्रमुख बल दिया गया है :
- बध्य प्रदेश व्यापार और निवेश सुविधा निगम की स्थापना।
- औद्योगिक सुविधा अधिनियम लागू करना और एकल बिंदु प्रणाली निर्णायक तथा परिणाम उन्मुख विचार से व्यापार के नियमों में बदलाव करना।
- अभिज्ञात औद्योगिक समूहों की उन्नति हेतु मूल संरचना का विकास करना।
- विशेष पैकेज प्रदान करते हुए बंद हो चुकी / बीमार औद्योगिक इकाइयों को नया जीवन देना।
6. गुजरात राज्य में एक औद्योगिक नीति है जिससे राज्य के स्थायी औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन देने के लिए निर्धारित किया गया है। यह नीति गुजरात में उद्योगों के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा अर्जित करने और इसे निवेश का सर्वाधिक प्रतियोगी गंतव्य बनाने पर लक्षित है। नीति के उद्देश्य इस प्रकार हैं :
- निवेशकों के लिए एक प्रेरक परिवेश का सृजन करना।
- संगत क्षेत्रों में नवीनतम जानकारी से नए और मौजूदा उद्यमियों को सज्जित करना।
- नीति क्षेत्र के निवेश द्वारा सर्वोत्तम मूल संरचना सुविधाओं का विकास।
- विकास संबंधी दायित्वों को पूरा करने के लिए औद्योगिक एस्टेट का सशक्तीकरण।
- राज्य में जीवन की गुणवत्ता उन्नत बनाना।
- राज्य में परिपक्व विनिर्माण खण्डों को सशक्त बनाना।
- उद्योगों को प्रोत्साहन देना जो श्रमिक सघन प्रकार के हैं, ताकि राज्य के बड़े स्तर के रोजगार अवसरों का सृजन किया जा सके।
- स्वस्थ वृद्धि के लिए छोटे स्तर के उद्योगों को सहायता प्रदान करना।
- मौजूदा औद्योगिक समूहों को मजबूत बनाना तथा नए समूहों को प्रोत्साहन देना।
- बैंक से धनराशि प्राप्त करने के लिए छोटे और मध्यम उद्योगों की सहायता करना।
- विश्व व्यापार संगठन की नीतियों की चुनौतियों को पूरा करने के लिए गुजरात में उद्योगों को तैयार करना।
- अंतरराष्ट्रीय मंच पर गुणवत्ता और ब्रांड छवि वाले उत्पादों के संदर्भ में गुजरात को अतुलनीय स्थान पर स्थापित करना।
राज्य में अनिवासी भारतीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियों से निवेश आकर्षित करने के महत्व को समझा गया है। इससे राज्य को प्रौद्योगिकी मानक उद्योगों में प्रौद्योगिकी अंतरण, निर्यात बढ़ाकर, नवीनतम निर्माण प्रथाएं प्रारंभ करने के माध्यम से, मूल संरचना के विकास और रोजगार के अवसर बढ़ा कर उन्नत बनाने में सहायता मिलेगी। इसी के साथ गुजरात सरकार द्वारा अनिवासी भारतीयों की समस्याओं और चिंताओं पर भी ध्यान दिया जाता है, जब वे राज्य में निवेश करते हैं। उन्हें अतिरिक्त आराम देने के लिए राज्य द्वारा उन विभिन्न विकल्पों की तलाश भी की जाती है जो अनिवासी भारतीयों की आकांक्षाओं तथा राज्य की जरूरतों को पूरा कर सकें। अनिवासी भारतीयों की जरूरतों के स्व आकलन और राज्य की विकास संबंधी जरूरतों के बीच के अंतराल को पाटने के लिए यहां भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक से अनिवार्य अनुमोदन प्राप्त करते हुए अनिवासी भारतीय निवेश न्यास बैंक स्थापित करने पर विचार किया गया है।
7. अन्य राज्यों की औद्योगिक नीतियों में राज्य में निवेश के लिए अनेक विशेषताएं शामिल की गई हैं:-
विधायी रूपरेखा
विभिन्न राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों की सरकारें अपने औद्योगिक संगठन में निवेश के अवसरों को प्रोत्साहन देने के लिए अनेक विधानों को लागू करती है। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण कानून संबंधित राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों में लागू औद्योगिक सुविधा प्रदान करता अधिनियम है जो औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन देने तथा विनियामक रूपरेखा को सरल बनाकर नए निवेशों की सुविधा प्रदान करने एवं प्रक्रियागत आवश्यकताओं को कम करने में लक्षित है यह अधिनियम मुख्य रूप से औद्योगिक परियोजनाओं के शीघ्र कार्यान्वयन के उपाय प्रदान करता है तथा राज्य में उद्यमियों को एकल बिंदु समाशोधन प्रदान करते हुए मौजूदा उद्योगों की सुचारु कार्रवाई सुनिश्चित करता है। यह अर्थव्यवस्था में व्यापार के लिए एक प्रेरक परिवेश के सृजन का इच्छुक है जो दुनिया भर से निवेशकों को आकर्षित कर सके और इसमें विदेशी भारतीयों के निवेश भी शामिल हों। इनमें से कुछ अधिनियम इस प्रकार हैं :
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