भारत सरकार द्वारा अपने विभिन्न कानूनों के समन्वय में विभिन्न योजनाओं, नीतियों और प्रोत्साहनों को घोषित किया गया है ताकि इनसे विदेशी भारतीयों को निवेश के ढेर सारे अवसर मिल सके। वे अनिवासी भारतीयों / भारतीय मूल के व्यक्तियों को विभिन्न सुविधाओं की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान कर सकें जैसे कि बैंक के खाते, निवेश के नियम और विनियमन आदि।
यहां 'प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति', है जो भारत में विदेशी निवेश के विभिन्न पक्षों का नियंत्रण करती है। इस नीति का लक्ष्य भारतीय अर्थव्यवस्था के सभी अनुमत क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करना और साथ ही इसके विकास प्रभाव को विसारित करना है। लगभग सभी भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मुक्त रूप से अनुमत है। यह दो मार्गों से किया जा सकता है जो हैं स्वचालित मार्ग और सरकारी मार्ग। पहले मार्ग के तहत विदेशी निवेशकों को भारतीय रिजर्व बैंक या भारत सरकार से निवेश की अनुमति नहीं लेनी होती है। जबकि दूसरे मार्ग में विदेशी निवेश प्रवर्तन मंडल, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार का पूर्व अनुमोदन लेकर ही निवेश किया जा सकता है। ये शर्तें विदेशी भारतीयों पर भी लागू हुई है।
एक महत्वपूर्ण योजना होने के नाते 'पोर्टफोलियो निवेश योजना (पीआईएस)', जिसके तहत अनिवासी भारतीयों / भारतीय मूल के व्यक्तियों को मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के शेयरों में निवेश की अनुमति है अर्थात वे भारतीय कंपनियों द्वारा जारी किए गए शेयरों और परिवर्तन योग्य डिबेंचरों की ब्रिकी और खरीद कर सकते हैं। इसके लिए वे अधिकृत डीलर बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अधिकृत बैंक की नामनिर्दिष्ट शाखा से योजना के प्रशासन के लिए संपर्क कर सकते हैं और वे योजना के तहत निवेश करने के लिए एक अनिवासी भारतीय / भारतीय मूल के व्यक्ति को खाता खोलने के लिए अनुमति दिला सकते हैं।
अनिवासी भारतीय / भारतीय मूल के व्यक्ति पीआईएस मार्ग के तहत स्वदेश आने और स्वदेश नहीं लौटने के आधार पर सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के डिबेंचरों की प्रत्येक श्रृंखला के भुगतानित मूल्य / कंपनी की भुगतानित पूंजी के 5 प्रतिशत की राशि का निवेश कर सकते हैं। शेयरों का कुल भुगतानित मूल्य या सभी अनिवासी भारतीयों / भारतीय मूल के व्यक्तियों द्वारा खरीदे गए डिवेंचरों की राशि कंपनी की भुगतानित पूंजी के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। यद्यपि यह सीमा भारतीय कंपनी द्वारा महा निकाय प्रस्ताव पारित करके 24 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है।
पुन: अनिवासी भारतीयों / भारतीय मूल के व्यक्तियों को विदेश से भेजे गए पैसे, विदेश से लाई गई मुद्रा या भारत में उनके पास देय कानूनी रूप से उनके अपने पैसे से भारत के बैंक में खाता खोलने की अनुमति है। ये खाते इस विषय में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विशेष रूप से अधिकृत बैंक में खोले जा सकते हैं। इस कार्य में वे उनके अधिकृत डीलर हैं। ऐसी योजनाएं हैं जो अनिवासी भारतीयों या भारतीय मूल के व्यक्तियों के लिए उपलब्ध बैंक खातों के विभिन्न प्रकारों से निपटान करती हैं, इस प्रकार हैं :
- अनिवासी (बाह्य) रुपया खाता योजना (एन आर ई खाता) -
इस योजना के तहत अनिवासी भारतीयों और भारतीय मूल के व्यक्तियों को भारत के अधिकृत बैंकों में एन आर ई खाता खोलने की पात्रता है। ये खाते भारतीय रुपयों में नाम निर्दिष्ट परिवर्तन योग्य विदेशी मुद्रा खाते हैं और इन्हें बचत, चालू या सावधि जमा खातों के रूप में चलाया जा सकता है। ऐसा खाता खोलने के लिए धनराशि को संभावित खाता धारक के निवास के देश से किसी बैंक के माध्यम से भारत में भेजा जाना होता है। इसमें अनिवासी भारतीयों / भारतीय मूल के व्यक्तियों को संयुक्त खातों को चलाने की अनुमति भी है। अनिवासी एनआरई खाते द्वारा निम्नलिखित लाभ पा सकते हैं :- (i) एक वर्ष और इससे अधिक अवधि के लिए सावधि जमा को अनिवासी भारतीयों द्वारा भारत में रहने वाले व्यक्तियों की तुलना में अधिक ऊंची दर पर निवेश किया जा सकता है; (ii) जमा राशि पर ब्याज और भारतीय आयकर से मुक्त खातों में धनराशि पर ब्याज कमाकर; (iii) इन खातों में रखी जाने वाली राशि संपत्ति कर से मुक्त है; (iv) एनआरई खातों से नजदीकी संबंधियों को दी जाने वाली उपहार की राशि को छूट है; (v) संपूर्ण क्रेडिट राशि (इस पर अर्जित ब्याज सहित) भारत से बाहर किसी भी समय रिजर्व बैंक को संदर्भ दिए बिना स्वदेश में वापस की जा सकती है; (vi) इन खातों से स्थानीय संवितरण स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है ; (vii) खाता धारक अपने एन आर ई खातों से सावधि जमा की प्रतिभूति की तुलना में ऋण / ओवर ड्राफ्ट का लाभ उठा सकते हैं।
- विदेशी मुद्रा (अनिवासी) खाता (बैंक) योजना (एफसीएनआरबी) -
इस योजना के तहत अनिवासी भारतीयों को अधिकृत डीलर के साथ एफसीएनआर खाते खोलने और उनके रखरखाव की पात्रता है। जबकि इन खातों को बांगलादेश / पाकिस्तानी राष्ट्रीयता वाले व्यक्तियों / इकाइयों / स्वामित्व द्वारा खोलने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता होती है। एक खाता बैंकिंग के सामान्य चैनल द्वारा भारत के बाहर से भेजी गई धनराशि द्वारा या भारत में अधिकृत डीलर के साथ अनिवासी बैंक के खाते में नामे डाल कर या ऐसी धनराशि के साथ जो भारतीय रिजर्व बैंक के विनियमनों के संदर्भ में रिपेट्रिएट करने योग्य है। इन्हें मौजूदा एनआरई / एफसीएनआर खातों से धनराशि के अंतरण द्वारा भी खोला जा सकता है। पुन: एफसीएनआर (बी) खाते केवल सावधि जमा के संदर्भ में खोले जा सकते हैं। इनमें जमा राशि उस अवधि के लिए स्वीकार की जाती है जो एक वर्ष से अधिक किन्तु तीन वर्ष से कम हो। एक अनिवासी भारतीय अन्य अनिवासी भारतीयों / भारतीय मूल के व्यक्तियों के साथ संयुक्त खाते खोल सकता है। भारत में रहने वाले व्यक्ति के साथ अनिवासी भारतीय द्वारा संयुक्त खाता खोलने की अनुमति नहीं है।
- अनिवासी साधारण रुपया (एनआरओ) खाता योजना -
इस योजना के तहत भारत के बाहर रहने वाला कोई भी व्यक्ति एक अधिकृत डीलर के साथ एनआरओ खाता खोल सकता है या एक अधिकृत बैंक से रुपए में किए गए लेन देन के मूल रूप के माध्यम से रखने के प्रयोजन हेतु इसे रख सकता है जिसमें फेमा के नियमों अथवा इसके तहत बनाए गए विनिमयमों का कोई उल्लंघन नहीं किया गया हो। जबकि बंगलादेश, पाकिस्तानी नागरिकों के व्यक्तिगत / इकाई के रूप में / स्वामित्व द्वारा खाता खोलने के लिए रिजर्व बैंक के पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता होती है एनआरओ का खाता चालू, बजट, आवर्ती या निश्चित समय के लिए जमा खातों के रूप में बनाए रखा जाए। इन खातों पर देय ब्याज की दर और इन खातों को खोलने, प्रचालित करने तथा रखरखाव का कार्य समय समय पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी निर्देशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाएगा। ये खाते निवासियों के साथ और / या अनिवासियों के साथ संयुक्त रूप से बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा एनआरओ खाता (चालू / बचत) को भारत में आने वाले अनिवासी मूल के विदेशी नागरिकों द्वारा बैंकिंग चैनल के माध्यम से भारत के बाहर से भेजी गई राशि या उसके द्वारा भारत में लाई गई मुद्रा की बिक्री द्वारा खोला जा सकता है।
अन्य योजनाएं इस प्रकार हैं :-
1. भारतीय विदेशी नागरिकता (ओसीआई) योजना - यह योजना 02.12.2005से दोहरी नागरिकता प्रदान करने के लिए प्रचालित की गई थी। इसका अर्थ है भारत की नागरिकता के साथ एक विदेशी देश की नागरिकता रखना। एक विदेशी नागरिक, जो 26.01.1950 को भारत का नागरिक बनने का पात्र था या 26.01.1950 के बाद किसी समय भारत का नागरिक था या 15.08.1947 के बाद भारत का हिस्सा बनने वाले क्षेत्र का था और उसके बच्चे और बच्चों के बच्चे, बशर्तें कि उसके देश की नागरिकता में स्थानीय कानून के अनुसार या अन्य रूप में दोहरी नागरिकता की अनुमति है, तो उसे ओसीआई के रूप में पंजीकरण की पात्रता होगी। इन व्यक्तियों के अल्प वयस्क बच्चे भी इसके पात्र हैं। जबकि यदि आवेदक पाकिस्तान या बंगलादेश का नागरिक रहा है तो उसे ओसीआई की पात्रता नहीं होगी।
2. भारतीय मूल के व्यक्ति की कार्ड (पीआईओ कार्ड) योजना 2002 - यह योजना 1999 की पीआईओ कार्ड योजना के संशोधन के रूप में आरंभ की गई है जो भारतीय मूल व्यक्तियों के लिए एक व्यापक योजना है। इसका लक्ष्य भारतीय मूल के व्यक्तियों को भारत वापस आने की यात्रा सरल, सहज, लचीली और पूरी तरह से बाधा मुक्त बनाना है। इस में भारतीय मूल के व्यक्तियों को लाभों की एक श्रृंखला प्रदान की गई है और इसमें उन्हें देश के अंदर वीसा मुक्त प्रवेश की अनुमति दी गई है। इस योजना के तहत भारतीय मूल के व्यक्ति विदेश में कहीं भी रहने के बाद चौथी पीढ़ी तक अपने जीवन साथी के साथ भारत के नागरिक बने रहते हैं, सिवाए कुछ देशों के। यह कार्ड पात्र आवेदकों को संबंधित भारतीय दूतावासों / उच्च आयोगों / राजदूतावास के माध्यम से दिया जाता है और जो लोग लंबी अवधि के बीसा पर भारत में रहने लगे हैं, उन्हें संबंधित विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई) तथा विदेश मंत्रालय के विदेशी प्रभाग से भी दिया जाता है। इस कार्ड का शुल्क 15,000 रु. है और इसकी वैधता एक वर्ष की है तथा अल्पवयस्कों (18 वर्ष से कम) के लिए इसका शुल्क 7,500 रु; है। इस योजना से भारतीय मूल के व्यक्तियों को विभिन्न आर्थिक, वित्तीय और सांस्कृतिक लाभ मिलते हैं, जिसमें शामलि हैं:-
- भारत आने के लिए वीसा की कोई आवश्यकता नहीं। महाविद्यालयों / संस्थानों में प्रवेश के लिए कोई पृथक ''छात्र वीसा'' या ''रोजगार वीसा'' की आवश्यकता नहीं होती है जो उन्हें रोजगार या पढ़ाई के लिए लेना हो।
- एक भारतीय मूल के कार्ड धारक को पंजीकरण की आवश्यकताओं से छूट दी जाती है यदि वह भारत में एक बार आने पर अधिक से अधिक 180 दिनों तक रहें।
- इन्हें आर्थिक, वित्तीय और शैक्षिक क्षेत्रों आदि में उपलब्ध सुविधाओं के संदर्भ में अनिवासी भारतीयों के समान सुविधाएं प्राप्त हैं। इन सुविधाओं में शामिल हैं :
- भारत में कृषि / पौधरोपण संपत्तियों के अधिग्रहण के कुछ मामलों के अलावा अचल संपत्ति के अधिग्रहण, धारण, अंतरण और निपटान की सुविधा।
- भारत में शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश पाने के लिए अनिवासी भारतीयों के बच्चों हेतु उपलब्ध सुविधाएं, जिसमें सामान्य श्रेणियों में चिकित्सा महाविद्यालय, अभियांत्रिकी महाविद्यालय, आईआईटी, आईआईएम आदि।
- एलआईसी, राज्य सरकार और अन्य सरकारी अभिकरणों की विभिन्न आवासीय योजनाएं।
- तीव्र समाशोधन के लिए आप्रवास जांच पोस्ट पर विशेष काउंटर।
- सभी भावी लाभ जो अनिवासी भारतीयों को दिए जाएंगे, वे भारतीय मूल के कार्ड धारक व्यक्तियों को भी उपलब्ध होंगे।
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