भारतीय डायस्पोरा की असाधारण सफलता को, जो 110 देशों में फैली हुई है और जिसकी संख्या 30 मिलियन है, अब भली भांति मान्यता प्राप्त है। इससे भारत को विश्व की अनेक अर्थव्यवस्थाओं के साथ समेकन में सहायता मिली है और इसने भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन्होंने भारत के लिए एक प्रकार से ब्रांड एम्बेस्डर के रूप में कार्य किया है और ये भारत तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच एक सेतु निर्माता कहे जा सकते हैं। ये भारतीय अर्थव्यवस्था और उद्योग के लिए अवसर के नए द्वार खोलने में सक्षम कहे जा सकते हैं।
प्राप्त सूचना के अनुसार म्यांमार में 2.5 मिलियन स्थानीय भारतीयों के साथ भारतीय मूल के व्यक्तियों की सबसे अधिक संख्या है। आज भारतीय डायस्पोरा का महत्व बढ़ गया है बल्कि यह हमारे देश के लिए अधिक लाभकारी है कि भारतीय नागरिक विदेशों में कार्य करते हैं। इनमें से अधिकांश ने अपने व्यवसाय में उत्कृष्टता हासिल की है, वे शिक्षा जगत से लेकर कॉर्पोरेट जगत में विविध स्थानों पर कार्यरत हैं। उदाहरण के लिए सिलिकॉन घाटी में पारम्परिक भारतीय तकनीकी उद्यमी द्वारा एक महत्वपूर्ण क्षेत्र रचित किया गया है। अमेरिका में उनकी सफलता सॉफ्टवेयर उद्योग में भारत की अपनी सफलता के लिए एक उत्प्रेरक है। शीर्षस्थ 20 भारतीय सॉफ्टवेयर व्यापार में से 19 की स्थापना या प्रबंधन भारतीय डायस्पोरा द्वारा की गई है।
विश्व बैंक के अनुसार भारतीय डायस्पोरा प्रतिवर्ष भारत में 27 बिलियन अमेरिकी डॉलर स्वदेश वापस भेजता है जो देश के लिए सबसे बड़ी रकम है। इससे उनके देश में विश्व के ज्ञान भण्डार, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, नए विचारों, प्रौद्योगिकी तथा बाजार में भी योगदान मिलता है। अपने डायस्पोरा के समर्थन से भारत व्यापार की प्रक्रिया में आउटसोर्सिंग, सूचना प्रौद्योगिकी और भैषजिकी के क्षेत्र में व्यापार की दृष्टि से अग्रणी बन गया है।
अनिवासी भारतीय बड़ी संख्या में भारतीय कंपनियों की इक्विटी भागीदारी का स्वामित्व रखते हैं। मार्च 2008 में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) 100 सूचीबद्ध एनआरआई धारिताओं में लगभग 87 कंपनियां है। आम तौर पर इन्होंने विदेशी संस्थागत निवेशकों की तुलना में अधिक निवेशक प्रदान किए हैं।
पारंपरिक भारतीय समुदाय ने इनमें सक्रिय रूप से भाग लेकर अपने अपनाए गए देशों में राजनैतिक जीवन में भी सक्रिय भागीदारी की है। भारतीय अनेक देशों, विशेषकर अफ्रीका, केरिबियन, यूएसए, एशिया प्रशांत और दक्षिण पूर्वी एशिया में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय नेताओं के रूप में उभरे हैं। भारतीय व्यक्तियों ने अपनी मूल बुद्धिमानी, कठिन परिश्रम तथा जन्मजात क्षमता के माध्यम से मेजबान समाजों और समुदायों में अपने देश की गरिमा को अर्जित किया है।
क्षेत्रीय नेटवर्क में भारत के समेकन का लाभ इसके डायस्पोरा से ही मिला है। भारत और विविध क्षेत्रों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ रहा है। भारतीय कंपनियां बड़ी संख्या में विदेशों की ओर रूख कर रही हैं, बाजारों का विकास हो रहा है और अधिक देशों में उनके प्रचालन आरंभ हो रहे हैं।
इसके अलावा वैयक्तिक रूप से अधिवासी भारतीय भारत में पर्याप्त सहायतार्थ कार्य करते हैं। भारतीय डायस्पोरा ने जरूरत के समय पर्याप्त योगदान दिया है जैसे कि युद्ध काल और प्राकृतिक आपादाओं के के समय में। डायस्पोरा समाज सेवा के अंतरवाह के आकलन करना कठिन है, क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा अनौपचारिक रूप से किया गया है। अधिकांश सहायतार्थ दान विदेशी भारतीयों द्वारा उन संगठनों को दिए गए हैं, जहां किसी पारिवारिक सदस्य या मित्र के माध्यम से कोई व्यक्तिगत संपर्क हो।
भारतीय डायस्पोरा विश्व में दूसरा सबसे बड़ा संगठन हैं और यह भारत को वैश्विक बनने के लिए सहायतार्थ अच्छे स्थान पर है। यहां तक कि ऐसा कहा जाता है कि भारत के लिएजब से यहां सुधार और विनियमन का कार्य 1991 में आरंभ हुआ था, उतना तेजी से प्रगति करना कठिन था, जितनी तेजी से इसने प्रगति की है।