एक बार जब अपेक्षित कार्मिकों के प्रकार और संख्या अनुमानित हो जाती है तब भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। भर्ती की परिभाषा संभावित कर्मचारियों का पता लगाने और कम्पनी में नौकरी के लिए आवेदन करने के लिए उन्हें अभिप्रेरित करने की प्रक्रिया है। इसका प्रयोजन, खोजना या पड़ताल करना, मूल्यांकन करना, संभावित कर्मचारियों को प्रेरित करना और उनसे वचनबद्धता लेना है ताकि उद्यम के सफल कार्यकलाप के लिए अपेक्षित पदों को भरा जा सके। भर्ती प्रबंधन के लिए उम्मीदवारों का पूल प्रदान करती है ताकि विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए उपयुक्त उम्मीदवारों का चयन किया जा सके। यह एक समारात्मक प्रक्रिया है चूंकि यह आवेदकों की संख्या बढ़ाती है जिससे वास्तविक चयन किया जाता है। नए उद्यम को बाह्य स्रोतों से सभी कर्मचारियों की नियुक्ति करना पड़ता है। भर्ती के लिए विभिन्न बाह्य स्रोत निम्नलिखित हैं :-
विज्ञापन
समाचार पत्रों व्यापार या व्यवसायिक पत्रिकाओं में विज्ञापन भर्ती का एक बहुत ही लोकप्रिय स्रोत हैं विशेषतया व्यापारी उद्यमों में वरिष्ठ पदों के लिए। यह उम्मीदवारों के विभिन्न वर्ग प्रदान करता है जिसमें से प्रबंधन अपना चयन कर सकता है। संगठन के बारे में विस्तृत जानकारी, कार्य वर्णन और कार्य विशिष्टता विज्ञापन में दी जा सकती हैं जिससे कि सम्भावित उम्मीदवारों की स्वजांच सुकर किया जा सकता है। यह सुविधाजनक और किफायती तरीका है। इसका लाभ यह है कि इससे प्रत्युतरों की बाढ़ आ जाती है और कई बार बिलकुल की अनुपयुक्म उम्मीदवारों से भी उत्तर आने लगते हैं
रोजगार केन्द्र
रोजगार केन्द्र में नौकरी चाहने वालों का विस्तृत रिकार्ड का रखरखाव किया जाता है और नियोक्ता के लिए उपयुक्त उम्मीदवार सुझाया जाता है। इन केन्द्रों में नियोक्ता को अपनी आवश्यकता की सूचना देनी पड़ती है। एजेंसियां नौकरी चाहने वालों और नियोक्ताओं के बीच सम्पर्क का कार्य करके कार्मिक की मांग और आपूर्ति में ताल-मेल करती है। वे कुछ सेवाएं भी प्रदान करती हैं जैसे व्यसायिक मार्गदर्शन, व्यवसायिक अनुसंधान, डिजाइनिंग, परीक्षण और चयन के कार्यक्रम, रोजगार सूचना का संग्रहण और प्रकाशन आदि। सरकार द्वारा चलाए जाने वाले रोजगार केन्द्र अकुशल, अर्धकुशल और कौशल संचालनात्मक कार्यों के लिए भर्ती के अच्छे स्रोत माने जाते हैं।
राष्ट्रीय रोजगार सेवा या रोजगार केन्द्र, श्रम मंत्रालय में रोजगार और प्रशिक्षण महानिदेशालय द्वारा चलाए जाते हैं। यह रोजगार केन्द्र (रिक्तियों की अनिवार्य अधिसूचना) अधिनियम, 1959 और उसके अधीन बनाए गए नियमों ( रोजगार केन्द्र (रिक्तियों की अनिवार्य अधिसूचना) नियमावली, 1960 ). के जरिए कार्य संचालन करता है। अधिनियम के अनुसार रिक्तियों की अधिसूचना जो सभी सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों में उत्पन्न होती हैं और निजी क्षेत्र में जहां 25 या अधिक कर्मगार की नियुक्ति अनिवार्य है, के गैर कृषि प्रतिष्ठानों में उत्पन्न होती हैं।
राष्ट्रीय रोजगार सेवा जो 945 रोजगार केन्द्रों (31.12.2003 की स्थिति के अनुसार) के नेटवर्क के माध्यम से कार्य करती है, निम्नलिखित कार्य करती है :-
- नौकरी चाहने वालों का पंजीकरण और नियोजना ताकि मांग एवं पूर्ति में संतुलन सुनिश्चित हो।
- श्रम की मांग और पूर्ति के प्रभावी प्रबंधन में उपयोग करने के लिए परामर्श और व्यवसायिक मार्गदर्शन के लिए व्यवसाय साहित्य तैयार करने हेतु डाटा बेस के सृजन के निमित्त तिमाही आधार पर व्यापक रोजगार बाजार सूचना एकत्र करना।
- कैरियर परामर्श और व्यवसायिक मार्गदर्शन
- विशेष कर ग्रामीण अनौपचारिक क्षेत्र में नौकरी ढूंढने वालों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहन देने के लिए अपेक्षित उपलब्ध कौशल और विपणनीय कौशल को आकलन के लिए क्षेत्र विशेष का विशिष्ट अध्ययन। सर्वेक्षण करना।
- कुछ राज्य सरकारें रोजगार केन्द्रों के माध्यम से उनके पास पंजीकृत कुछ विशेष श्रेणी के बेरोजगारों के लिए बेरोजगार भत्ते के संवितरण की व्यवस्था करती हैं।
राष्ट्रीय रोजगार सेवा में सिक्किम को छोड़कर सभी राज्य और संघ राज्य क्षेत्र शामिल हैं।
शैक्षिक संस्थाएं
प्रबंधन और प्रौद्योगिकी कॉलेज और संस्थान प्रौद्योगिकिय और प्रबंधकीय कार्यों के लिए भर्ती के लोकप्रिय स्रोत बन गए हैं। ऐसी भर्ती कैम्पस भर्ती कहलाती है। बहुत से बड़े संगठन विश्वविद्यालयों, व्यवसायिक संस्थानों और प्रबंधन संस्थानों के साथ विभिन्न कार्यों में भरती के लिए निकट सम्पर्क में रहने है। विद्यार्थियों को उपयुक्त नौकरी प्राप्त करने में सहायता करने के लिए सुप्रसिद्ध शैक्षिक संस्थाओं में नियोजन कक्ष की स्थापना की गई है। बहुत से व्यापारी उद्यम शैक्षिक संस्थाओं में विद्यार्थियों से नौकरी के लिए आवेदन प्राप्त करने के लिए परिपत्र भेजते हैं।
सीधी भर्ती
इसके अंतर्गत उद्यम की सूचना पट्ट पर सूचना दी जाती हैं जिसमें उपलब्ध नौकरी का ब्यौरा विनिर्दिष्ट होता है। निश्चित तारीख को नौकरी चाहने वाले संगठन के बाहर जमा हो जाते हैं और उसी स्थान पर चयन किया जाता हैं। यह कारखाने के प्रवेश द्वार पर भर्ती भी कहा जाता है। यह प्रचालन अकुशल या अर्धकुशल नौकरियों के निमित्त अनियमित रिक्तियों के लिए प्रचलित है। इस स्रोत के माध्यम से छोटे कार्यशालाएं भर्ती करते हैं।
श्रमिक संविदाकार (ठेकेदार)
श्रमिक संविदाकार श्रमिकों के साथ निकट सम्पर्क रखता हैं और वे कम समय की सूचना पर अपेक्षित संख्या में श्रमिक उपलब्ध करा सकते हैं। वे भारत के बहुत से उद्योगों में भर्ती के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। कर्मगारों की भर्ती श्रम संविदाकारों के माध्यम से होती है जो अपने आप संगठन के कर्मचारी होते हैं। इस सिस्टम की कमियां यह है कि यदि संविदाकार अपने आप संगठन छोड़ने का निर्णय लेता है, तो उसके द्वारा भर्ती किए गए सभी कर्मगारों को भी छोड़ना पड़ेगा। |