चयन में ऐसे व्यक्तियों का पता लगाने के लिए जो कार्य के लिए उपयुक्त होते हैं जांच या आवेदन का मूल्यांकन शामिल है। इसके अंतर्गत प्रत्येक उम्मीदवार की योग्यता और उसके अनुभव की तुलना कार्य की अपेक्षा से की जाती है और अन्य उम्मीदवारों की योग्यता और अनुभव से तुलना की जाती है। चयन का मूल प्रयोजन संगठन में विभिन्न पदों और रिक्तियों को भरने के लिए सही उम्मीदवार को चुनना है। इसमें कार्य की अपेक्षा के अनुरूप उम्मीदवारों के गुणों की तुलना शामिल है। चयन की सटिक प्रक्रिया, संगठल के आकार और चुने जाने वाले कार्मिकों को प्रकार के अनुसार अलग-अलग होती है। परन्तु साधारणत: निम्नलिखित क्रम का अनुसरण किया जाता है :-
प्रारंभिक साक्षात्कार
यह प्रक्रिया प्रारंभिक साक्षात्कार से शुरू होती है। इसमें संगठन और उम्मीदवार से संबंधित सूचना का अल्प आदान-प्रदान शामिल होता है। इसका उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि क्या आवेदन खाली छोड़ना आवेदक के लिए उपयुक्त है अथवा नहीं। यह साधारणत: संक्षिप्त होता है और इसका आयोजन पूर्ण रूपेण अनुपयुक्त उम्मीदवारों को हटाना होता है। अत: यह संगठन और आवेदक दोनों के लिए लाभप्रद होता है।
आवेदन खाली
यह उम्मीदवार का संक्षिप्त जीवनवृत है जिसमें नाम, आयु, योग्यता, अनुभव आदि होता है। इसका उपयोग आवदेकर की हस्तलिपि में उसके संगत सूचना प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त होता है। यह उम्मीदवार का व्यक्तित्व का द्योतक है और नौकरी के लिए उसकी उपयुक्तता का पता लगाने में सहायक होता है। प्रचालन में विभिन्न प्रकार के कोरे आवेदनों का उपयोग होता है परन्तु विभिन्न संगठनों के कोरे आवेदनों में बहुत अधिक समानताएं हैं चूंकि सभी वर्गों में अपेक्षित मूल जानकारी समान होती है। बड़े संगठनों में अधिकांश आवेदन प्रपत्र इस तरह से तैयार किए जाते हैं ताकि संगठन को प्रशिक्षण कार्यक्रम की योजना बनाने, विशेष कार्य सौंपने या पदोन्नति देने में समर्थ बनाता है यदि कर्मचारी संगठन के लिए लिया जाना हैं।
रोजगार परीक्षण
कर्मचारी के चयन में रोजगार परीक्षण लोकप्रिय जांच उपकरण बन गए हैं। परीक्षणों की डिजाइन उम्मीदवार के व्यक्तित्व के चुनिंदा पहलुओं को मापने के लिए की जाती है और यह पूर्वानुमान लगाने के लिए कि आवदेक कितनी सफाई से कार्य का निष्पादन कर सकता है। विभिन्न प्रकार के रोजगार परीक्षण प्रयुक्त किए जा सकते हैं :-
- बुद्धि परीक्षण : आवेदक की मानसिक क्षमता जांचने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
- अभिरुचि परीक्षण : आवेदक की क्षमता और विकास की संभावना की माप की जाती हैं।
- व्यक्तित्व परीक्षण : समग्र रूप में व्यक्तित्व के गुणों को प्रमाणित करना, अभिरुचि दिलचस्पी और सामान्य मनोभाव एवं मिजाज का मिश्रण।
- प्रवीणता परीक्षण : व्यष्टि द्वारा पहले से ही प्राप्त कौशल की माप के लिए डिजाइन किए जाते हैं।
- रुचि परीक्षण : रुचि के पैटर्न का पता लगाना अर्थात किसी स्रोत में व्यष्टि विशेष क्षमा और संलिप्तता दर्शाता है।
रोजगार साक्षात्कार
चयन प्रक्रिया में व्यैक्तिक या आमने-सामने बैठकर साक्षात्कार अति लोकप्रिय कदम है। यह उम्मीदवार के विषय अतिरिक्त जानकारी मुहैया कराता है। यह उम्मीदवार की उपयुक्तता जांचने में सहायता करता है और कोरे आवेदन पत्र या परीक्षणों के जरिए प्राप्त सूचना की जांच के रूप में कार्य करता है। इसका उपयोग कार्य और संगठन के बारे ब्यौरेवार सूचना देने के लिए किया जा सकता है।
शारीरिक/चिकित्सा परीक्षा
कुछ संगठन चिकित्सा विशेष से फिटनेस प्रमाणपत्र की मांग करते हैं जबकि अन्य अपने पैनल के डाक्टरों द्वारा चिकित्सा जांच पर जोर देते हैं। अच्छी तरह की चिकित्सा जांच कर्मचारी के उच्च स्तरीय स्वास्थ्य और शारीरिक फिटनेस सुनिश्चित करेगी और दुर्घटना की दर कम करेगी अनुपस्थिति घटेगी और श्रम उत्पादन बढ़ेगा।
नियुक्ति पत्र
जिस उम्मीदवार ने चयन के सभी अड़चनों को पार कर लिया है को नियुक्ति पत्र जारी करके या उसके साथ सेवा करार करके नियुक्त किया जाता है।
नियोजन
चयनित उम्मीदवारों को उपयुक्त कार्य पर तैनात किया जाता है। इसे नियोजन के रूप में जाना जाता है। प्रत्येक नए कर्मचारी को उसकी क्षमता, अभिरुचि कौशल आदि के आधार पर विशेष कार्य करने को दिया जाता है। साधारणत: उम्मीदवरों की नियुक्ति स्थायी आधार पर नहीं की जाती है चूंकि उन्हें कुछ माहों तक आजमाना बेहतर समझा जाता है यह सेवा की अधिवीक्षा काल के दौरान होता है। यह इसलिए होता है कि चयनित उम्मीदवार के बारे में उसके व्यक्तित्व और गुणों की समग्र छवि का पता लगाने में कोई भी चयन प्रक्रिया अपने-आप में पूर्ण नहीं होती है। यह ध्यान दिया जाए कि कर्मचारी का उचित नियोजन स्थायी कार्य बल का निर्माण करने में लम्बे रेस का घोड़ा सिद्ध होगा और इसके परिणामस्वरूप श्रम लागतें कम होगी। जब चयनित कार्मिकों का सही नियोजन किया जाता है तो यह उनकी क्षमता और कार्य संतुष्टि को बढ़ाता है। यह उनकी उत्पादकता भी बढ़ाता है। |