क्षेत्र विशेष का चयन करने के बाद अत्याधिक सुविधाजनक स्थल के चयन संबंधी समस्या अपेक्षाकृत सरल होती है। अब दो अति महत्वपूर्ण बातें जिनकी ध्यान दिया जाना है, वे निम्नलिखित है।
भूमि की कीमत
व्यापार का स्थान निर्धारण करने के लिए सटीक स्थल का चयन करते समय यह महत्वपूर्ण कारक है। चूंकि भूमि की अधिक कीमत अन्य कारकों की उपलब्घता द्वारा मुहैया कराए गए लाभों को समाप्त कर सकता है। यदि भूमि को पट्टे पर देने का प्रस्ताव किया जाता है तब किराया और कर संबंधी विषयों पर विचार किया जाना है प्रभार कार्यचालन व्यय को बढ़ाएंगे। विचाराधीन भू-खण्ड भी पर्याप्त रूप से बड़ा हो ताकि व्यापार की भावी विस्तार की आवश्यकताएं पूरी की जा सके।
सीआरईडीएआई (भारतीय स्थावर सम्पदा विकासक संघ परिसंघ) संगठित स्थावर सम्पदा विकास के लिए भारत भर में निर्माणकर्ताओं का शीर्ष निकाय है। 8 राज्य शहर स्तरीय संघ अर्थात आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल जो भारत भर में 17 राज्यों में फैले हुए है, वे क्रेडाई के सदस्य हैं, जिनमें 3,500 से अधिक व्यष्टि सदस्य है। संगाठित निजी राज्य/शहरों में विकासकों की संख्या 60 प्रतिशत भारत में है।
'उद्योग और सेवाएं' भाग में अधिक ब्यौरा होगा।
अपशिष्ट प्रबंधन
बहुत से कारखानों के लिए सटीक स्थल का चयन करने के लिए अपशिष्ट का प्रबंधन महत्वपूर्ण विषय है। द्रवित अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए उचित जल-मल निकासी या नदी तक नहर की आवश्यकता होती है। जबकि ठोस अपशिष्ट के निपटान के लिए इस प्रयोजन के लिए कूड़े डालने की जगह या अतिरिक्त भू-खण्ड की उपलब्धता की आवश्यता होती है। यदि अपशिष्ट से दुर्गन्ध आती है तो उत्पादन शुरू होने के पहले ही समस्या का समाधान किया जाना है अन्यथा यह कर्मचारियों के स्वास्थ्य और उनके जीवन को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगा।
निपटान स्थल के लिए उचित कार्य एवं रखरखाव के दिशानिर्देश
'कानूनी पहलू' भाग में अधिक ब्यौरा होगा।. |