उद्यम की स्थापना करने के लिए क्षेत्र का चयन निम्नलिखित कारकों पर आधारित है :
कच्ची सामग्री की उपलब्धता
अपेक्षित मात्रा में गुणवत्ता वाली कच्ची सामग्री की उपलब्धता निकटवर्ती जगहों पर होना, नए उद्यम की सफलता के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। उस क्षेत्र में फर्म की आवश्यकता वाली सस्ती कच्ची सामग्री की बहुलता होनी चाहिए। ऐसे स्थान उत्पादन जारी रखने की प्रक्रिया को सुनिश्चित करता एवं परिवहन लागत कम करता है। कुछ कच्ची सामग्री जैसे खनिज, सड़ने वाले खाद्य, कपास आदि संयंत्र के स्थान को प्रभावित करने में मुख्य भूमिका अदा करते हैं। उदाहरण के लिए विनिर्माण संयंत्र के लिए बड़ी मात्रा में नियमित रूप से शुद्ध जल की आवश्यकता होती है और इसलिए उन्हें साधारणत: नदी के तट पर अवस्थित किया जाता है।
श्रम की आपूर्ति
अपेक्षित ग्रेड के श्रम की उपलब्धता अर्थात अर्ध कौशल या अकुशल, एक महत्वपूर्ण कारक है जो उद्योग के स्थान को प्रभावित करती है। इसके अतिरिक्त श्रम की लागत और उत्पादकता, व्यापार संघ का मनोभाव और क्षेत्र विशेष में औद्योगिक संबंध की स्थिति भी महत्वपूर्ण है। इसमें विशेष राज्य में कुछ उद्योगों की संघनता की भी व्याख्या की जाती है।
उत्पाद बाजार से निकटता
फर्म द्वारा उत्पादित माल के लिए उद्योग को बाजार के समीप होना चाहिए। इससे एक ओर तैयार उत्पाद को बाजार तक ले जाने की लागत कम होती है और दूसरी ओर प्रतिस्पर्धी कीमतों पर माल बेचकर अधिक लाभ सुनिश्चित करता है। साधारणत: ऐसे उद्योगों के लिए जिनके बाजार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हैं, संयंत्र विभिन्न भौगोलिक क्षेत्र में फैले हुए हैं ताकि बाजारों से इनकी निकटता हो। क्षेत्रीय मांग के मामले में, संयंत्र विलकुल पास के बाजार के पास स्थित होता है।
परिवहन सुविधाओं की उपलब्धता
फैक्टरी के लिए कच्ची सामग्री ले जाने के लिए और अपने तैयार उत्पाद को बाजारों तक ले जाने दोनों के लिए परिवहन सुविधाओं की आवश्यकता होती है। इसलिए स्थान ऐसा चयन किया जाए ताकि इसकी कुल परिवहन लागत कम से कम हो। परिवहन लागत के दो तत्वों में से स्थान निर्धारण में कौन सा निर्णायक होगा यह कच्ची सामग्री की विशेषता और विनिर्माण प्रक्रिया की प्रकृति पर निर्भर करता है। यदि फैक्टरी के लिए भारी मात्रा में वस्तुओं की आवश्यकता होती है जैसे लौह अयस्क, चूना पत्थर आदि, तो इसे कच्ची सामग्री के स्रोत के पास स्थित होना चाहिए। परन्तु यदि विनिर्माण प्रक्रिया ऐसी हो कि कच्ची सामग्री का बहुत अधिक भार कम हो जाता है जैसाकि रसायन और भेषज उत्पादों के मामले में, तो फैक्टरी को बाजार के निकट स्थित होना चाहिए। इसलिए, ऐसा क्षेत्र जो पर्याप्त परिवहन सुविधा उपलब्ध कराता है, उद्योगपतियों का आकर्षित करता है।
'आधारभूत संरचना भाग में अधिक ब्यौरा होगा।
विद्युत की आपूर्ति
बढ़ती यांत्रिकीकरण के साथ-साथ ऐसा स्थान जो नियमित और पर्याप्त मात्रा में विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करता है और कारोबार के लिए ईंधन मुहैया कराता है वह अपरिहार्य आवश्यकता बन गया है।
आधारभूत संरचना भाग में अधिक ब्यौरा होगा।
जलवायु संबंधी कारक
विशेष प्रकर के उद्योगों के लिए विशिष्ट प्रकार की जलवायु की आवश्यकता होती है, उदाहरण के लिए आटा चक्की के निमित सूखी जलवायु जबकि सूत के कारखाने के लिए आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है। बागवानी, मत्स्य, कृषि आदि जैसे निष्कर्षक उद्योगों के लिए प्राकृतिक कारक विशेष रूप से महत्वपूर्ण होते हैं। जलवायु कामगारों की कार्य क्षमता को भी प्रभावित करती है। परन्तु प्रौद्योगिकीय आगमन जैसे कृत्रिम आर्दताकरण और वातानुकूलन ने कारक के रूप में जलवायु के महत्व को कम कर दिया है।
सरकार के विनियम और नीतियां
केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों ने समय-समय पर उद्योगों के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए अनेकानेक नीतियां बनाई और घोषणाएं की है। विशेषकर पिछड़े क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन योजनाएं प्रदान की गई है। उपयुक्त स्थान का चयन करते सभी ये सभी महत्वपूर्ण कारक बन गए है।
''निवेश के अवसर और प्रोत्साहन'' खंड में अधिक ब्यौरा होगा।
कानून व्यवस्था
प्रत्येक उद्यमी उस क्षेत्र की कानून व्यवस्था तथा राजनीतिक स्थिरता के विषय चिन्तित होता है जिसके आस-पास वह अपना उद्योग स्थापित करना चाहता है। प्रत्येक उद्यमी के लिए ऐसी जगह पर अपने यूनिट को स्थापित करना स्वभाविक ही है जहां दंगे फसाद और राजनीतिक अशांति नहीं होती है। कोई भी उद्योगपति ऐसे राष्ट्रीय और सामरिक बिन्दुओं की अनदेखी नहीं कर सकता है जब वह अपने उद्योग के लिए स्थान का चयन करता है।
पूरक और प्रतिस्पर्धी उद्योगों की मौजूदगी
ऐसा स्थान एक ओर उद्योगों के लिए आगे –पीछे सहायता प्रदान करता है और दूसरी ओर उनके लिए यह प्रतिस्पर्धी माहौल मुहैया कराता है। यह अपेक्षित कच्ची सामग्री की आपूर्ति में वृद्धि करता है और उत्पादित माल की मांग में अभिवर्धन् करता है। यह कुशल और अकुशल दोनों प्रकार की श्रम शक्ति आकर्षित करके श्रम बाजार का संवर्धन करता है। यह बैंकिंग, क्रेडिट और क्षेत्र में संचार सुविधाओं का संवर्धन भी करता है। यह विभिन्न वाणिज्यिक सेवाओं को उत्पन्न करता है जैसे भण्डारण, पैकिंग, अग्रेषण, ग्रेडिंग, मूल्यांकन करना, विज्ञापन देना आदि, जो विशेष क्षेत्र में सभी व्यापारी फर्मों के विकास और विस्तार में सहायता करता है। |