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व्‍यापार आरंभ करने हेतु वित्तपोषण:
वित्तीय आवश्‍यकता के प्रकार
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व्‍यापार की वित्तीय आवश्‍यकताएं स्‍थायित्‍व के विस्‍तार के आधार पर दो वर्गों में वर्गीकृत की जा सकती हैं :-

नियत पूंजी

नियत या टिकाऊ परिसम्‍पत्तियों की खरीद के लिए आवश्‍यक पूंजी को नियत पूंजी या दीर्घा‍वधिक पूंजी के रूप में जाना जाता है। नियत या टिकाऊ परिसम्‍पत्तियों में भूमि, भवन, मशीनरी, भण्‍डार गृह और अन्‍य शामिल हैं। व्‍यापार करते समय संबंधित प्रतिष्‍ठानों को ऐसी परिसम्‍पत्तियों में अपेक्षाकृत कम निवेश करने की आवश्‍यकता होती है। ये परिसम्‍पत्तियां आय अर्जन करना जारी रखती हैं और लम्‍बे समय तक फायदा पहुँचाती है। एक बार नियत परिसम्‍पत्तियों पर खर्च की गई निधि को वापस नहीं लिया जाता और दूसरे पर नहीं लगाया जा सकता है।

कार्यचालन पूंजी

अल्‍पावधिक परिसम्‍पत्तियों या वर्तमान परिसम्‍पत्तियों पर निवेशित धन को कार्यचालन पूंजी के रूप में जाना जाता है। इसमें कच्‍ची सामग्री की खरीद, मजदूरी और वेतन का भुगतान, किराया, ईंधन, बिजली और पानी, मशीनरी की मरम्‍मत और रखरखाव, विज्ञापन आदि शामिल है। इसके अतिरिक्‍त ऋण पर माल की बिक्री ऋण अदाता के शेष चारिता और प्राप्‍य हुंडियों प्राप्‍त होती है। इन सभी प्रयोजनों के लिए वित्त की आवश्‍यकता अल्‍प अन्‍तरालों पर उत्‍पन्‍न होती है। कार्यशील पूंजी परिचालित पूंजी अथवा घूर्णन पूंजी के रूप में भी ज्ञात है क्‍योंकि ऐसी परिसम्‍पत्तियों में निवेश किए गए धन की भरपाई कैश का भुगतान करके की जा सकती है तथा उसे पुन: सम्‍पत्तियों में पुननिर्वेश कर दिया जाता है। अपेक्षित कार्यशील पूंजी की राशि मुख्‍यतया व्‍यापार की प्रकृति, विनिर्माण प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अपेक्षित समय तथा उन शर्तों पर र्नि‍भर करती है जिन पर माल का क्रय किया जाता है और माल की बिक्री की जाती है। उदाहरणार्थ व्‍यापार करने वाली कम्‍पनियों को विनिर्माण कम्‍पनियों की अपेक्षा अधिक कार्यशील पूंजी की आवश्‍यकता होती है।

 
उपयोग की अवधि के आधार पर व्‍यापार की वित्तीय आवश्‍यकता को निम्‍नलिखित में वर्गीकृत किया जा सकता है :-

दीर्घकालीन पूंजी

दीर्घकालीन पूंजी की ज्‍यादा लम्‍बी अवधि अर्थात पांच वर्ष या उससे अधिक का अवधि के लिए आवश्‍यक होती है। निर्धारित परिसम्‍पत्ति तथा कार्यशील पूंजी के स्‍थायी भाग का इसके द्वारा वित्तपोषण किया जाता है।

लम्‍बी अवधि के वित्त के महत्‍वपूर्ण स्रोत है :-

  • शेयर निर्गम
  • डिबेन्‍धर का निर्गम
  • वित्तीय संस्‍थाओं से ऋण
  • लाभों का पुनर्निवेश

अल्‍पावधिक पूंजी

अल्‍पावधिक पूंजी की आवश्‍यकता अपेक्षाकृत अल्‍प अवधि के लिए होती हैं अर्थात एक वर्ष से कम/इसमें वर्तमान परिसम्‍पत्तियों का वित्तपोषण और दैनंदिन व्‍ययों को पूरा करना शामिल है।

अल्‍पा अवधि के वित्त के महत्‍वपूर्ण स्रोत है :-

  • बैंक
  • व्‍यापार ऋण
  • किस्‍त ऋण

मध्‍यावधिक पूंजी

मध्‍यावधिक पूंजी की आवश्‍यकता 2 से 5 वर्ष की अवधि के लिए होती है। इसमें कुछ कार्यकलापों का वित्त पोषण जैसाकि भवन का पुनरूद्धार, मशीनरी का आधुनि‍कीकरण, विज्ञापन पर भारी व्‍यय आदि शामिल है।

मध्‍यावधि वित्त के मुख्‍य स्रोत निम्‍नलिखित हैं :-

  • शेयरों का निर्गम
  • डिबेन्‍धरों का निर्गम
  • बैंकों और अन्‍य वित्तीय संस्‍थाओं से उधार
  • लाभों का पुनर्निवेश

दीर्घावधिक और अल्‍पावधिक दोनों प्रकार की पूंजी आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए जुटाई गई निधियां निम्‍नलिखित रूप होती हैं :-

स्‍वामित्‍व पूंजी

यह स्‍थायी द्वारा व्‍यापार में निवेशित पूंजी की राशि है। निवेशित राशि के आधार पर स्‍वामी व्‍यापार के लाभों का हकदार होता है। एकल स्‍वामित्‍व के अंतर्गत व्‍यष्टि स्‍वामी साधारणत: अपनी स्‍वयं की बचत से पूंजी निवेश करता है। साझेदारी में, साझेदारों के बीच परस्‍पर सहमति के अनुसार प्रत्‍येक साझेदार पूंजी का अंशदान करता है। जबकि पूंजी के लिए अंशदान करने वाले निवेशक अपनी शेयर धारिता के कारण स्‍वामी बन जाते हैं। स्‍वामी के निवेश पर प्रतिफल की दर अर्जित लाभ के स्‍तर पर निर्भर करता है और इस लाभ में से लाभांश प्राप्‍त करने के हकदार बनते हैं। स्‍वामित्‍व पूंजी का उपयोग साधारणत: स्‍थायी पूंजी या दीर्घावधिक पूंजी के रूप में किया जाता है।

उधार पूंजी

व्‍यापार की वित्तीय आवश्‍यकताओं को बहुधा ऋण जुटाकर पूरा किया जाता है। उधार धन राशि में ब्‍याज भुगतान करने का नियत दायित्‍व और मूलधन की पुर्नअदायगी शामिल हैं जैसे जब देय हों। एक स्‍वामित्‍व के कारोबार में स्‍वामी अपनी व्‍यक्तिगत जमानत पर या अपनी मौजूदा परिसम्‍पत्ति की जमानत पर रुपए उधार लेता है। साझेदारी फर्म व्‍यष्टि साझेदारों की व्‍यक्तिगत जमानती पर ऋण जुटा सकता है। कम्‍पनी या तो डिबेन्‍चर या बांड जारी करके उधार लेती हैं या प्रत्यक्ष ऋण लेती है। रुपए अल्‍पावधि के लिए और दीर्घावधि के लिए अर्थात वित्त नियत परिसम्‍पति तथा वर्तमान परिसम्‍पत्तियां।

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