| ' एक अभिकर्ता' वह व्यक्ति है जो किसी अन्य की ओर से कार्य करने के लिए सहमत है और उसे इसके लिए अधिकृत किया गया है। इस अन्य व्यक्ति को 'प्रधान' कहते हैं, जो अभिकर्ता को अपनी कानूनी कार्रवाइयों करने के लिए अपने प्रतिनिधि के रूप में अधिकृत और सशक्त बनाता है। जब अभिकर्ता और प्रधान आपस में सहमत होते हैं तो उनके बीच 'अभिकरण संबंध' आरंभ होता है। इस संबंध से अभिकर्ता को प्रधान की ओर से उसके व्यापार संबंधी लेन-देन करने का अधिकार मिलता है। वास्तव में तीसरे पक्ष के साथ बातचीत करते समय अभिकर्ता अपने प्रधान के कदमों पर चलता है और उसके द्वारा की गई सभी कानूनी कार्रवाइयां प्रधान पर बाध्य होती हैं।
एक अभिकर्ता एक व्यक्ति, एक कंपनी या व्यक्तियों का एक संघ हो सकता है। अभिकर्ता को अधिकार प्रदान करने वाला दस्तावेज़ 'मुख्तारनामा' (पावर ऑफ एटॉर्नी) कहलाता है, जिसका निष्पादन प्रधान द्वारा अभिकर्ता के पक्ष में किया जाता है। जब पावर ऑफ एटॉर्नी एक विशेष लेन-देन से संबंधित होता है और इसका एक विशेष प्रयोजन होता है तो इसे 'विशिष्ट पावर ऑफ एटॉर्नी' कहते हैं। जबकि पावर ऑफ एटॉर्नी सामान्य लेन-देन से संबंधित है तो इसे 'सामान्य पावर ऑफ एटॉर्नी' कहते है। पावर ऑफ एटॉर्नी का पंजीकरण कराया जा सकता है और नहीं भी।
एक अभिकर्ता को प्रधान के सभी अधिकार प्राप्त होते हैं और प्रधान पर उसकी सभी कानूनी कार्रवाइयों की बाध्यता होती है। वह प्रधान के नाम पर तीसरे पक्ष पर मुकदमा कर सकता है और उसे व्यापार से संबंधित उसके द्वारा किए गए सभी व्ययों के लिए प्रति पूर्ति पाने का अधिकार होता है परन्तु इसी के साथ एक अभिकर्ता को उसे सौंपे गए अधिकारों के अनुसार कार्य करना चाहिए और उसे अपने प्रधान के सर्वोत्तम हित में कार्य करना चाहिए। उसे सभी लेन-देनों का उचित हिसाब रखना चाहिए और इन्हें प्रधान को सौंप देना चाहिए।
अभिकर्ताओं के कराधान हेतु प्रावधान
एक अभिकर्ता को आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत लिया जाता है। यह आयकर से संबंधित सभी मामलों का व्यापक अधिनियम है और इसमें अधिनियम के प्रावधानों के कार्यान्वयन हेतु नियम बनाने (आयकर नियम,1962) बनाने के लिए केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को अधिकार दिया गया है। सीबीडीटी वित्त मंत्रालय में राजस्व विभाग का एक हिस्सा है। इसे भारत में विभिन्न प्रत्यक्ष करों से संबंधित मामलों का कार्य सौंपा जाता है और यह आयकर विभाग के माध्यम से प्रत्यक्ष कर के प्रशासन के लिए उत्तरदायी है। आयकर को वित्त अधिनियम, द्वारा वार्षिक संशोधनों के अधीन रखा जाता है, जिसका अर्थ है संगत वर्ष के लिए आयकर की ‘दरें’ और अन्य प्रकार के कर।
एक अभिकर्ता का कराधान "व्यक्ति" की श्रेणी पर निर्भर करता है, जो आयकर के अधिनियम के तहत आती है। शब्द ‘व्यक्ति’ में इस अधिनियम के तहत निम्नलिखित शामिल हैं:-
- व्यक्ति
- कॉर्पोरेट
- फर्मे
- व्यक्तियों का संघ या व्यक्तियों का निकाय
- हिन्दु अविभाजित परिवार
अभिकर्ताओं के माध्यम से अनिवासी व्यक्तियों का आकलन
एक अनिवासी व्यक्ति का आकलन भारत में प्रत्यक्ष रूप से या अभिकर्ताओं के माध्यम से कराधान के लिए किया जा सकता है। आयकर अधिनियम (धारा 163), के अंतर्गत अनिवासी व्यक्ति को उसके अभिकर्ता के माध्यम से आकलन करने का प्रावधान उसकी देय करों की प्रभावी वसूली की संभावनाओं और आकलन की प्रक्रियाओं के दौरान उसकी वास्तविक उपस्थिति में आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए दिया गया है।
एक अनिवासी व्यक्ति के ‘अभिकर्ता’ के रूप में लिए जा सकने वाले भारत के नागरिक इस प्रकार हैं:-
- अनिवासी व्यक्तियों के न्यासी या कर्मचारी;
- एक ऐसा व्यक्ति जिसके पास अनिवासी व्यक्ति के साथ व्यापारिक संबंध होते हैं;
- एक ऐसा व्यक्ति जिससे या इसके माध्यम से अनिवासी व्यक्ति कोई आय प्राप्त करता है;
- कोई ऐसा व्यक्ति जिसने अनिवासी व्यक्ति से भारत में एक पूंजीगत परिसम्पत्ति का अधिग्रहण किया है।
यदि एक व्यक्ति का आकलन एक अभिकर्ता के रूप में किया जाता है तो वह भारत के बाहर रहने वाले किसी व्यक्ति को इसके द्वारा दिए जाने वाले धन में से कुछ राशि रख सकता है, जिसकी ओर से उसके प्रति कर की देयता (प्रधान) बनती है, उसकी अनुमानित देयता के बराबर राशि। यदि रखी जाने वाली राशि के विषय में प्रधान और अभिकर्ता के बीच कोई असहमति है तो अभिकर्ता द्वारा आकलन अधिकारी से इस आशय का एक प्रमाणपत्र लिया जा सकता है, जिसमें देयता के अंतिम निपटान के लम्बन से संबंधित राशि का विवरण दिया गया हो, और इस प्रकार प्रमाणपत्र उसे उस राशि को धारित करने के लिए अधिकार प्रदान करेगा।
संपत्ति कर और अभिकर्ता
संपत्ति कर एक प्रत्यक्ष कर है, जो निर्धारिती की निवल संपत्ति पर प्रभारित किया जाता है। ‘निर्धारिती’ का अर्थ है एक ऐसा व्यक्ति जिसके द्वारा संपत्ति कर या अन्य कोई धनराशि संपत्ति कर अधिनियम, के प्रावधानों के तहत देय है और इसमें दिवंगत के कानूनी प्रतिनिधि, निष्पादनकर्ता, प्रशासक शामिल हैं और एक ऐसा व्यक्ति जो किसी अनिवासी व्यक्ति का अभिकर्ता बनने के लिए उपयुक्त हो।
अधिक जानकारी के लिए संपत्ति कर पर हमारा खंड देखें। |