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"भत्ते" को कर्मचारियों की विशिष्ट अपेक्षाओं की पूर्ति करने के लिए वेतन के अतिरिक्त नियमित रूप से दी गई नियमित राशि अथवा अन्य धन – संपत्ति के रूप में परिभाषित किया गया है। अधिकांश भत्ते कर योग्य होते हैं जैसे नगर प्रतिपूर्ति भत्ता (सी सी ए), टिफिन भत्ता, नियत चिकित्सा भत्ता और सेवक भत्ता। किसी रियायत के नकदीकरण से प्राप्त राशि भी कर योग्य होती है।
- मकान किराया भत्ता :- वर्ष के दौरान प्राप्त किए गए मकान किराए के भत्ते में से कम – से कम निम्नलिखित तीन राशियों को आय में शामिल नहीं किया जाएगा।
- मुंबई, चेन्नै, कलकत्ता अथवा दिल्ली में रहने वाले व्यक्तियों के लिए वार्षिक वेतन के 50 प्रतिशत के समकक्ष राशि, परन्तु अन्य नगरों में रहने वाले व्यक्तियों के लिए 40 प्रतिशत राशि
- प्राप्त किए गए मकान किराया भत्ता की वास्तविक राशि
- वार्षिक वेतन के 10 प्रतिशत से अधिक वास्तव में प्रदत्त किराया राशि (यहां वेतन में मूल वेतन, महंगाई भत्ता, निश्चित प्रतिशत पर कमीशन शामिल है, परन्तु इसमें अन्य भत्ते शामिल नहीं हैं)
- परिवहन भत्ता :- आवास से कार्यालय तक यात्रा करने के लिए परिवहन भत्ता में 800 रुपए प्रति माह तक छूट है।
- शैक्षणिक, अनुसंधान व अन्य व्यावसायिक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए कोई भत्ता। विशिष्ट उद्देश्य से इस सीमा तक भत्ते का इस्तेमाल किया जाता है।
- बच्चों के लिए शिक्षा भत्ता :- 100 रुपए प्रति माह प्रति बच्चा, अधिकतम दो बच्चों तक।
- अपने बच्चे पर छात्रावास व्यय की पूर्ति करने के लिए किसी कर्मचारी को प्रदान किया गया कोई भत्ता :- 300 रुपए प्रति माह प्रति बच्चा, अधिकतम दो बच्चों तक।
केवल निजी व्यक्ति की स्थिति में वेतन आय कर योग्य है। किसी अन्य प्रकार के व्यक्ति जैसे कि कोई फर्म, कंपनियां वेतन आय अर्जित कर सकती हैं। |
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