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- फर्म की आय में भागीदार का हिस्सा (फर्म के लाभार्थ स्वीकृत किसी अल्प वयस्क सहित) अर्थात फर्म की कुल आय में उसका हिस्सा कर से छूट प्राप्त होगा (अधिनियम की धारा 10 (2 क)।
- यदि अधिनियम की धारा 184 तथा धारा 40 (ख) की शर्तें पूरी होती हों तो फर्म द्वारा भागीदारों को अदा किया गया संदेय कोई भी ब्याज, वेतन, बोनस, कमीशन या पारिश्रमिक भागीदारों के हाथों में कर योग्य होगा (उस सीमा तक जहां तक ये फर्म के पास कटौती के रूप में अनुज्ञेय है)।
- यहां निम्न बातें उल्लेखनीय हैं :-
- फर्म के पारिश्रमिक ‘वेतन’ शीर्ष के अंतर्गत कर योग्य नहीं है। अत: ऐसे पारिश्रमिक के संबंध में मानक कटौतियों का दावा नहीं किया जा सकता।
- ऐसी आय के अर्जन में उपगत किसी भी व्यय का दावा ऐसी आय से कटौती के रूप में किया जा सकता है। उदाहरणार्थ, यदि भागीदार फर्म को अपना पूंजी योगदान करने के लिए धन उधार लेता है तथा उसे अपने पूंजी अंशदान पर ब्याज की अदायगी की जाती है तो ऐसे ब्याज के भाग पर शीर्ष ‘व्यापार या पेशे के लाभ तथा फायदे’ के अंतर्गत कर लगाया जाएगा किन्तु उसके द्वारा उधार ली गई धनराशि पर अदा किए गए ब्याज को कटौती के रूप में अनुमत किया जाएगा।
- यदि फर्म के पास वेतन/ब्याज को पूर्णतया या अंशत: कटौती के रूप में अनुमत नहीं किया जाता तो पूर्ण वेतन/ब्याज या उसका वह भाग भागीदारों के पास कर योग्य नहीं है। अन्य शब्दों में, भागीदारों के पास सम्पूर्ण पारिश्रमिक/ब्याज (अधिनियम की धारा 40 (ख) तथा/अथवा धारा 184 के तहत अननुमत राशि को छोड़कर) कर के लिए प्रभार्य है।
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