आयकर अधिनियम के अधीन, पूर्व वर्ष में प्रभावित पूंजी परिसंपत्ति के अंतरण से प्राप्त किसी लाभ अथवा नफ़ा को '
पूंजी लाभ' के अधीन आयकर में चार्ज किया जाएगा और उसे पूर्व वर्ष, जिसमें निर्धारित छूट देते हुए ऐसे पूंजी लाभ में छूट देते हुए ऐसे पूंजी लाभ में छूट दिए जाने तक अंतरण किया जाता है, की आय माना जाएगा।
'पूंजी लाभ' से अभिप्राय पूंजी परिसंपत्ति के अंतरण से प्राप्त कोई लाभ अथवा नफ़ा से है। यदि कोई पूंजी परिसंपत्ति बेची अथवा अंतरित की जाती है तो ऐसी बिक्री से प्राप्त लाभ अंतरण किए जाने के वर्ष में पूंजी लाभ के रूप में कर योग्य है। पूंजी लाभ जिस मूल्य पर पूंजी परिसंपत्ति अर्जित की जाती है उस मूल्य व ऐसी परिसंपत्ति बेचने के मूल्य के बीच का अंतरण होता है। तकनीकी दृष्टि से, पूंजी लाभ अर्जन लागत व परिसंपत्ति अंतरण अथवा बिक्री की तारीख पर बाजार के उचित मूल्य के बीच का अंतरण होता है।
पूंजी परिसंपत्ति से अभिप्राय अधिसूचित क्षेत्र की स्थिति में उससे 8 किलोमीटर के भीतर अथवा नगर पालिका क्षेत्रों के अलावा व्यापार माल, निजी सामान, कृषि भूमि तथा गोल्ड बांड को छोड़कर सभी चल अथवा अचल संपत्ति से है। जेवर व आभूषण निजी सामान नहीं होता है और उसकी बिक्री पर पूंजी लाभ लगेगा। पूंजी परिसंपत्तियां दो प्रकार की होती हैं अर्थात् दीर्घावधि और अल्पावधि। पूंजी परिसंपत्ति को बेचने अथवा अंतरित करने से पहले, उसे 36 माह अथवा उससे कम माह के लिए रखे जाने पर उसे अल्पावधि पूंजी परिसंपत्ति कहा जाता है और उसकी अवधि 36 माह से अधिक होने की स्थिति में, परिसंपत्ति को दीर्घावधि पूंजी परिसंपत्ति कहा जाता है। शेयरों, डिबेंचरों और म्युचुअल निधि यूनिटों की स्थिति में, उसे रखने की अपेक्षित अवधि एकमात्र 12 माह होती है। अल्पावधि पूंजी परिसंपत्ति के अंतरण से ''अल्पावधि पूंजी लाभ'' (एसटीसीजी) से वृद्धि होती है और दीर्घावधि पूंजी परिसंपत्ति के अंतरण से ''दीर्घावधि पूंजी लाभ'' (एलटीसीजी) में वृद्धि होती है। कर की विभिन्न दरें दीर्घावधि और अल्पावधि पूंजी परिसंपत्तियों के अंतरण पर प्राप्त लाभ पर लागू होती है। अल्पावधि पूंजी परिसंपत्ति पर प्राप्त लाभ पर नियमित आय के रूप में कर लगाया जाता है।