| एक वस्तु पर उत्पाद शुल्क की दर का निर्धारण करने के लिए इसका वर्गीकरण एक पूर्व आवश्यकता है। उत्पाद शुल्क की देयता केन्द्रीय उत्पाद प्रशुल्क अधिनियम, 1985 (सीईटीए) में दिए गए वस्तुओं के वर्गीकरण के आधार पर है इस अधिनियम में वस्तुओं की एक सूची दी गई है, जिन पर केन्द्रीय उत्पाद शुल्क प्रभारित किया जाता है। इसे 20 अनुभागों में रखे गए 96 अध्यायों में विभाजित किया गया है। इन 20 अनुभागों में से प्रत्येक में वस्तुओं के एक स्थूल वर्ग को लिया गया है जैसे कि अनुभाग 1 में पशु और डेयरी उत्पाद शामिल हैं, अनुभाग 6 में रसायन और इससे जुड़े उद्योगों के उत्पाद शामिल हैं, जबकि अध्याय 11 में वस्त्र उद्योग और वस्त्र उद्योग से जुड़े समान शामिल हैं।
केन्द्रीय उत्पाद प्रशुल्क अधिनियम को 2004 में संशोधित किया गया था। पहले वस्तुओं के वर्गीकरण के लिए 6 अंकों का वर्गीकरण कोड होता था, जिसके स्थान पर बाद में 8 अंकों का वर्गीकरण कोड लाया गया है। इस 8 अंक की वर्गीकरण पद्धति के आरंभ होने के साथ वस्तुओं का एक विस्तृत वर्गीकरण अब उपलब्ध है। वस्तुओं का वर्गीकरण महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही इसका एक मात्र उपयुक्त वर्गीकरण है, जिसे प्रशुल्क की दर का निर्धारण किया जा सकता है।
केन्द्रीय उत्पाद प्रशुल्क में कर की दर का निर्धारण प्रत्येक मद के लिए अलग-अलग किया गया है। इन्हें आमतौर पर ‘प्रशुल्क दरें’ कहते हैं। एक विशेष उत्पाद पर प्रशुल्क की दर का निर्धारण करने के लिए व्यक्ति को सबसे पहले उस अध्याय का शीर्षक खोजना चाहिए जिसके अंतर्गत इस वस्तु का वर्गीकरण हो सकता है। इस वर्गीकरण के विरुद्ध संगत प्रशुल्क दरें रियायती अधिसूचना के साथ पढ़ी जाएं, यदि कोई हों। इस प्रकार कर की प्रभावी दर किसी वस्तु के लिए ज्ञात की जाती है।
कुछ वस्तुओं को केन्द्रीय उत्पाद प्रशुल्क अधिनियम, 1985 के तहत ‘उत्पाद के विशेष कर’ के अधीन रखा जाता है। कुछ अन्य वस्तुओं पर कुछ अन्य अधिनियमों जैसे उत्पाद का अतिरिक्त कर (विशेष महत्व की वस्तुएं) अधिनियम, 1957 या कुछ विशिष्ट उप-कर भी लगाए जा सकते हैं। |