सीमाशुल्क के उदग्रहण के लिए सभी वस्तुओं को समूहों तथा उपसमूहों में श्रेणीकृत किया जाएगा सीमा शुल्क प्रशुल्क अधिनियम, 1975, में वस्तुओं का श्रेणीकरण दिया गया है तथा तदनुसार शुल्क की दर को विनिर्दिष्ट किया गया हैं :-
- अनुसूची 1 में आयात के लिए वस्तुओं को श्रेणीकृत किया गया है तथा आयात शुल्कों की दर का निर्धारण किया गया है, इसमें प्रणाली बंद रूप में तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक वस्तुओं के श्रेणीकरण की अंतरराष्ट्रीय योजना जिसे ''वस्तु श्रेणीकरण की सुमेलीकृत प्रणाली'' कहा जाता है - के अनुसार आयात मदों की विभिन्न श्रेणियों को विनिर्दिष्ट किया गया है।.
- अनुसूची 2 में निर्यात के लिए वस्तुओं को श्रेणीकृत किया गया है तथा निर्यात शुल्क दरों का निर्धारण किया गया है।
इसके अतिरिक्त सीमा शुल्क अधिनियम अतिरिक्त शुल्क (सीबीडी), अधिमानी शुल्क, डम्पिंग रोधी शुल्क, संरक्षात्मक शुल्क, इत्यादि जैसे शुल्कों के लिए प्रावधान बनाता है।
शुल्कों का उदग्रहण विशिष्ट तथा यथा मूल्य आधार, दोनों पर किया जाता है, जबकि कुछेक ऐसे मामले है जहां कई बार विशिष्ट सह यथा मूल्य शुल्कों का संग्रहण भी आयातित मदों पर किया जाता है। जहां यथा मूल्य शुल्कों (अर्थात मूल्य के संदर्भ में शुल्क) का संग्रहण किया जाता हो, जो उदग्रहण की प्रबल विधि है, वस्तुओं के मूल्य का सीमा शुल्क अधिनियम के प्रावधानों तथा उसके तहत जारी सीमा शुल्क मूल्यनिर्धारण (आयातित वस्तुओं की कीमतों का निर्धारण) नियमावली, 1988 के अनुसार किया जाता है। ये प्रावधान अनिवार्यत: जीएटीटी आधारित मूल्यनिर्धारण प्रणाली का अनुकरण है तथा अंतरराष्ट्रीय रूप में अनुकरणीय हैं (इन्हें अब डब्ल्यूटीओ मूल्यनिर्धारण करार कहा जाता है)। आयातकर्ता तथा निर्धारण अधिकारी को सावधानीपूर्वक इन प्रावधानों का अध्ययन एवं अनुप्रयोग करना होगा ताकि कानून के अनुसार उचित मूल्यनिर्धारण के पश्चात यथा देय शुल्क वस्तुओं के सीमा शुल्क नियंत्रण से बाहर निकलने से पूर्व अदा हो जाएं। |