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Taxation
निगमित कराधान :
किसी कंपनी की कर योग्‍य आय की परिकलना
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  • कंपनी की ‘कुल आय’ को सुनिश्चित करने के लिए‍ निम्‍नलिखित चार शीर्षों में आने वाली कुल आय को जोड़ें:-
    • आवासीय सम्‍पत्ति से आय, चाहे आवासीय या वाणिज्यिक, किराए पर दी गई या स्‍वयं निवास में प्रयुक्‍त।
    • जबकि आवासीय सम्‍पत्ति का उपयोग कंपनी के व्‍यापार के प्रयोजन हेतु किया जाता है तो यह इस शीर्ष में नहीं आता।
    • पूंजीगत प्राप्तियां।
    • प्रतिभूतियों पर ब्‍याज, लॉटरी, दौड़, पहेली आदि से जीती गई राशि सहित अन्‍य स्रोतों से होने वाली आय।

अन्‍य व्‍यक्तियों की आय भी कंपनी की आय में जोड़ी जाए। परन्‍तु शीर्ष ‘वेतन’ के तहत आने वाली आय को कंपनी में शामिल नहीं किया जाए।

  • इस प्रकार प्राप्‍त कुल आय ‘वर्तमान और अग्रेषित क्षतियां’ को एक सकल कुल आय ज्ञात करने के लिए अगले आकलन वर्षों में तय करने के लिए समायोजित किया जाए। इस प्रकार से प्राप्‍त कुल आय ‘सकल कुल आय’ के रूप में अभिकलित की जाती है। ‘तय की गई’ का अर्थ है प्रत्‍येक अन्‍य स्रोत/शीर्ष (धारा 79) के तहत अन्‍य आय के विरुद्ध कुछ क्षतियों का समायोजन करना। यह खण्‍ड शीर्ष ‘पूंजीगत प्राप्तियां’ के तहत क्षतियों के साथ अन्‍य क्षतियों पर लागू होता है।

अप्रयुक्‍त मूल्‍य ह्रास को अनिश्चित काल के लिए तय करने के लिए अग्रेषित किया जा सकता है। परन्‍तु क्षतियां या मूल्‍यह्रास को पीछे ले जाने की अनुमति नहीं है। तथापि व्‍यापार की क्षतियों को लगातार 8 वित्तीय वर्षों तक आगे ले जाया जा सकता है तथा इन्‍हें आने वाले वर्षों में हुए लाभ के प्रति समायोजित किया जा सकता है।

  • सकल कुल आय में से निर्धारित ‘कटौतियां’ को अध्‍याय VI A के अंतर्गत ‘निवल आय’ ज्ञात करने के लिए बनाया गया है।

सामान्‍य तौर पर व्‍यापार प्रयोजनों के लिए किए गए सभी व्‍यय कर योग्‍य आय में से घटाए जाते हैं, बशर्ते कि ये व्‍यय पूर्ण रूप से और विशिष्‍ट रूप से व्‍यावहारिक प्रयोजनों के लिए हों तथा ये व्‍यय पिछले वर्ष के दौरान आवश्‍यक रूप से किए/भुगतान किए गए हों तथा इनके समर्थन में संगत पत्र और अभिलेख उपलब्‍ध हों। परन्‍तु व्‍यक्तिगत या पूंजीगत प्रकार के व्‍यय कटौती योग्‍य नहीं होते हैं।

पूंजीगत व्‍यय केवल मूल्‍यह्रास के माध्‍यम से अथवा पूंजीगत प्राप्ति/क्षति के निर्धारण में सम्‍पत्ति के आधार पर कटौती योग्‍य होते हैं। ये कटौतियां मूल्‍यह्रास के संबंध में आयकर अधिनियम की धारा 32 के तहत सुनिश्चित परिसम्‍पत्तियों जैसे मशीनरी, भवन आदि और गैर-सुनिश्चित परिसम्‍पत्तियों जैसे तकनीक, पेटेंट आदि के संबंध में अनुमत होंगी, जिनका स्‍वामित्‍व निर्धारिती के पास है और इन्‍हें व्‍यापार/व्‍यावसाय के प्रयोजन हेतु उपयोग किया गया है। मूल्‍यह्रास को अधिनियम की धारा 43 के तहत उल्लिखित परिसम्‍पत्तियों के ब्‍लॉक के बट्टे खाते डाले गए मूल्‍य में से घटाया जाएगा। जबकि एक परिसम्‍पत्ति को निर्धारिती द्वारा पिछले वर्ष अधिग्रहीत किया गया है और इसे 180 दिनों से कम की अवधि के लिए व्‍यापार/व्‍यवसाय प्रयोजन हेतु उपयोग में लाया गया है, उक्‍त परिसम्‍पत्तियों के संदर्भ में कटौती को परिसम्‍पत्तियों के सभी ब्‍लॉक के लिए निर्धारित सामान्‍य मूल्‍य के 50 प्रतिशत तक सीमित किया जाएगा।

परन्‍तु उस आय के संबंध में किए गए किसी व्‍यय पर कटौती की अनुमति नहीं दी जाएगी जो कुल आय का भाग नहीं बनाते हैं।

  • कर की देयता का अभिकलन ‘निवल आय’ पर किया जाता है जो कर के प्रति प्रभार योग्‍य है। इसे या तो प्रोद्भवन आधार पर अथवा प्राप्ति आधार पर (इनमें से जो भी पहले हो) किया जाता है। जबकि यदि एक आय को प्रोद्भवन आधार पर कर में अभिकलित किया जाता है तो इसे प्राप्ति आधार पर कर की गणना में नहीं लिया जाएगा।

इस प्रकार अभिकलित कर के रूप कर में रियायत या कर के क्रेडिट को घटाया जाता है

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