| अनुषंगी लाभ कर (एफबीटी)
वित्त अधिनियम, 2005 ने एक नया कर, जिसका नाम है अनुषंगी लाभ कर (एफबीटी) आरंभ किया है। इस कर की लेवी से संबंधित प्रावधान आयकर अधिनियम,1961 के अध्याय XIIH (धारा 115W से 115WL तक) में दिए गए हैं।
अनुषंगी लाभ कर (एफबीटी) नियोक्ता द्वारा दिया जाने वाला एक अतिरिक्त आय कर है जो अनुषंगी लाभों के मूल्य पर दिया जाता है अथवा कर्मचारियों को दिया जाना उपयुक्त होता है। एफबीटी ऐसे नियोक्ता द्वारा देय होता है जो एक कंपनी, फर्म, व्यक्तियों का एक संघ है, जिसमें न्यास या व्यक्तियों का एक निकाय, स्थानीय प्राधिकरण, एक एकल व्यापारी, या एक कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति शामिल नहीं है। यह तर्क तब भी देय है जहां नियोक्ता की कर योग्य आय नहीं है। अनुषंगी लाभों की परिभाषा है ऐसा कोई लाभ, सेवा, सुविधा या एमएनटी प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से जो किसी नियोक्ता द्वारा अपने रोजगार के कारण से अपने कर्मचारियों (पूर्व कर्मचारियों सहित) को दिया जाता है। और इसमें कुछ विशिष्ट शीर्षों पर व्यय अथवा भुगतान शामिल है।
यह लाभ प्रत्यक्ष रूप से एफबीटी लागू करने के लिए प्रदान नहीं किया जाता है। इसे तब भी लागू किया जा सकता है यदि यह लाभ एक तृतीय पक्ष द्वारा अथवा नियोक्ता के एक सहयोगी द्वारा अथवा नियोक्ता के साथ एक करारनामे के तहत दिया जाता है।
अनुषंगी लाभों के मूल्य की गणना धारा 115WC के प्रावधानों के तहत की जाती है। एफबीटी अनुषंगी लाभों के कर योग्य मूल्य पर निर्धारित प्रतिशत पर देयता होता है। इसके अलावा घरेलू और विदेशी दोनों प्रकार की कंपनियों के मामले में अधिभार एफबीटी की मात्रा पर कर योग्य होगा। इन राशियों पर शिक्षा उप-कर देय होगा।
प्रत्येक कंपनी आकलन वर्ष की 31 अक्तूबर को धारा 115WD के प्रावधानो के तहत निर्धारित प्रपत्र में आकलन करने वाले अधिकारी के पास अनुषंगी लाभों की विवरणी जमा करेगी। यदि नियोक्ता निर्दिष्ट समय सीमा के अंदर कथित धारा के अतर्गत निर्दिष्ट विवरणी जमा करने में असफल रहता है तो उसे धारा 271FB के तहत दण्ड वहन करना होगा।
न्यूनतम वैकल्पिक कर (एमएटी)
एक कंपनी आयकर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार अभिकलित आय पर कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी, परन्तु कंपनी के लाभ और हानि के लेखा कंपनी अधिनिमय के प्रावधानों के अनुसार बनाए जाते हैं।
एमएटी का प्रावधान कंपनियों के लिए आरंभ किया गया है, जिसे ‘शून्य कर कंपनी’ के नाम से जाना जाता है। ये ऐसी कंपनियां है, जिनमें लेखा पुस्तकों में लाभ दर्शाए जाते हैं और शेयर धारकों को लाभांश दिए जाते हैं, किन्तु कोई आयकर नहीं दिया जाता है। लेखा पुस्तक के लाभ का अर्थ है निवल लाभ, जिसे निवल लाभ और हानि के खाते में दर्शाया जाता है। कंपनी द्वारा सनदी लेखाकार द्वारा प्रमाणित करने के बाद फार्म 29B में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है कि लेखा पुस्तक के लाभ कथित धारा के अनुसार अभिकलित किए गए हैं।
एमएटी के तहत जहां कहीं एक कंपनी की कुल आय पर आयकर देय होता है, जो पिछले वर्ष के संदर्भ में है तो यह ‘इसकी लेखा पुस्तकों के लाभ के निर्धारित प्रतिशत’ से कम होता है, इस लेखा के पुस्तक के लाभ को कंपनी की कुल आय माना जाएगा और उक्त कुल आय पर देय कर ‘इसकी लेखा पुस्तकों के लाभ के निर्धारित प्रतिशत’ होगा तथा इसके साथ अधिभार और शिक्षा उप-कर जोड़े जाएंगे।
एमएटी के लिए कर क्रेडिट : धारा 115JAA, के अनुसार एक ऐसा कर क्रेडिट है, जिसमें एक कंपनी द्वारा किसी निर्दिष्ट अगले आकलन वर्षों में सामान्य दरों पर देय कर की तुलना में एमएटी का भुगतान किया जाता। इसे कुल आय पर कर और एमएटी के बीच अंतर पर देने के अनुमति होगी जिसे उस आकलन वर्ष के लिए दिया जाएगा।
एमएटी के प्रावधान निम्नलिखित पर लागू नहीं है:-
- कुछ विशिष्ट मूल संरचनात्मक सुविधाओं के विकास, अनुरक्षण और प्रचालन के व्यापार से होने वाली आय।
- विशिष्ट क्षेत्रों या निर्दिष्ट पिछड़े जिलों में स्थित इकाइयों से होने वाली आय।
- विशिष्ट क्षति वाली कंपनियों की आय।
- निर्यात से होने वाले लाभ।
घरेलू कंपनियों के वितरित लाभ पर कर या लाभांश वितरण कर (डीडीटी)
आयकर अधिनियम की धारा 115-O के तहत घरेलू कंपनी द्वारा किसी राशि, वितरित या भुगतान की गई राशि को लाभांश द्वारा घोषित किया जाता है, जो लाभांश कर पर प्रभार योग्य होगी। केवल एक घरेलू कंपनी (एक विदेशी कंपनी नहीं) पर कर की देयता है। वितरित लाभ पर कर आय कर में होने वाले लाभ के अतिरिक्त है जो कुल आय के संदर्भ में आयकर प्रभार योग्य है। यह तभी लागू है जो लाभांश अंतरिम या अन्यथा है। यह तभी लागू है जब उक्त लाभांश का भुगतान वर्तमान लाभ या संचित लाभ पर किया जाता है।
कर का भुगतान लाभांश की घोषण, वितरण या भुगतान की तिथि के 14 दिनों के अंदर किया जाएगा, जो भी पहले हो। इस घोषणा में असफल रहने पर अधिनियम की धारा 15-P के तहत प्रत्येक माह के विलंब पर निर्धारित ब्याज का भुगतान करना होगा।
कंपनियों पर सम्पत्ति कर
सम्पत्ति कर अधिनियम के तहत ‘निर्धारिती’ की ‘निवल सम्पत्ति’ पर प्रभारित किया जाता है। सभी कंपनियां (सार्वजनिक या निजी) सम्पत्ति कर देने के लिए उत्तरदायी होती है, यदि उनकी कर योग्य ‘निवल सम्पत्ति’ निर्धारित सीमाओं से अधिक हो जाती है। इस प्रकार सभी कंपनियों को अन्य सम्पत्ति कर निर्धारितियों के समकक्ष लाया जाता है।
निवल सम्पत्ति एक कंपनी की वह सम्पत्ति है जो कंपनी द्वारा रखे गए ऋण के ‘कुल’ मूल्य पर मूल्यांकन की तिथि पर कंपनी की निर्दिष्ट परिसम्पत्तियों के कुल मूल्य से अधिक हो, जो कथित परिसम्पत्तियों के संबंध में व्यय किए गए हैं।
अधिक जानकारी के लिए सम्पत्ति कर पर हमारा अगला खण्ड देखें।
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