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प्रत्‍यक्ष कर संहिता
प्रत्‍यक्ष कर संहिता में सभी प्रत्‍यक्ष करों, नामत: आयकर, लाभांश वितरण कर, अनुषंगी लाभ कर और संपत्ति कर से संबंधित कानूनों को समेकित तथा संशोधित किया जाना है, ताकि एक किफायती रूप से दक्ष, प्रभावी और साम्‍य योग्‍य प्रत्‍यक्ष कर प्रणाली स्थापित की जा सके, जो इसके स्‍वैच्छिक पालन की सुविधा प्रदान करें एवं कर - सकल घरेलू उत्‍पाद अनुपात को बढ़ाने में सहायता करें। इसका एक अन्‍य उद्देश्‍य विवादों के विस्‍तार को कम करना और मुकदमों को न्‍यूनतम रखना है।

यह इस प्रकार संकल्पित किया गया है कि कर व्‍यवस्‍था में स्‍थायित्‍व प्रदान किया जा सके, और यह कराधान के भलीभांति स्‍वीकृत सिद्धांतों और सर्वोत्तम अंतरराष्‍ट्रीय प्रथाओं पर आधारित है। अंतत इससे एकल एकीकृत कर दाता रिपोर्टिंग प्रणाली का मार्ग प्रशस्‍त होगा।

संहिता की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं

  • प्रत्यक्ष करों के लिए एकल संहिता: सभी प्रत्‍यक्ष करों को एकल संहिता के तहत लाया गया है और पालन की प्रक्रिया विधियों को एक समान बनाया गया है। इससे अंतत: एक एकीकृत कर दाता रिपोर्टिंग प्रणाली का मार्ग प्रशस्‍त होगा।

  • सरल भाषा का उपयोग: अर्थ व्‍यवस्‍था में विस्‍तार के साथ करदाताओं की संख्‍या में उल्‍लेखनीय वृद्धि होने की आशा है। इनमें से अधिकांश करदाताओं की संख्‍या कम होगी जो कर की मध्‍यम राशि का भुगतान करेंगे। अत: यह अनिवार्य है कि इनके द्वारा स्‍वैच्छिक पालन की सुविधा के माध्‍यम से पालन की लागत को कम रखा जाए। इसे प्राप्‍त करने के लिए प्रारूप तैयार करने में सरल भाषा का उपयोग किया गया है, ताकि कानून के प्रावधान का आशय, कार्यक्षेत्र और इसका विस्‍तार स्‍पष्‍ट रूप से समझाया जा सके। इसका प्रत्‍येक उप-अनुभाग छोटा वाक्‍य है जो केवल एक बिन्‍दु संप्रेषित करने का आशय रखता है। जहां तक संभव हुआ, सभी निर्देशों और अधिदेशों को प्रत्‍यक्ष रूप से बताने का प्रयास किया गया है। इसी प्रकार प्रावधानों और व्‍याख्‍याओं को हटा दिया गया है, क्‍योंकि इन्‍हें गैर विशेषज्ञ व्‍यक्तियों द्वारा समझा नहीं जा सकता। एक प्रावधान में निहित विभिन्‍न शर्तों को भी समेकित किया गया है। सभी अधिक महत्‍वपूर्ण, इस तथ्‍य को ध्‍यान में रखते हुए कि कर का एक कानून अनिवार्यत: एक वाणिज्यिक कानून है, सूत्रों और तालिकाओं का व्‍यापक उपयोग किया गया है।

  • मुकदमेबाजी की संभावना को कम करना: जहां कहीं संभव हुआ उन प्रावधानों में अस्‍पष्‍टता से बचने का प्रयास किया गया है जिनसे अनिवार्यत: आपसी विरोधी व्‍याख्‍याएं निकल सकती हैं। इसका उद्देश्‍य यह है कि कर प्रशासक और करदाता कानून के प्रावधानों पर सहमत हों तथा आकलन एक करदाता की कर देयता में परिणत हो। इस उद्देश्‍य को आगे बढ़ाने के लिए प्रक्रियागत मुद्दों पर दीर्घकालिक मुकदमेबाजी से बचने के लिए केन्‍द्र सरकार / बोर्ड को अधिकार भी सौंपे गए हैं।

  • लचीलापन: विधान की संरचना इस प्रकार विकसित की गई है, जो बार बार संशोधन का आश्रय न लेते हुए एक बढ़ती हुई अर्थव्‍यवस्‍था में होने वाले संरचना के परिवर्तनों को समायोजित करने में सक्षम है। अत: संभव सीमा तक इस विधान में अनिवार्य तथा सामान्‍य सिद्धांत प्रदर्शित किए गए हैं और विवरण के मामले नियमों / अनुसूचियों में शामिल किए गए हैं।

  • य‍ह सुनिश्चित करना कि कानून एक प्रपत्र में दर्शाया जा सकता है: अधिकांश करदाताओं के लिए विशेष रूप से छोटे और उपेक्षित वर्ग के करदाताओं के लिए कर कानून वही है जो प्रपत्र में दर्शाया जाता है। अत: कर कानून की संरचना इस प्रकार तैयार की गई है कि इसे एक प्रपत्र के रूप में युक्ति संगत रूप से पुन: उत्‍पादित किया जा सके।

  • प्रावधानों का समेकन: कर विधानों की बेहतर समझ प्रदान करने के लिए, परिभाषाओं से संबंधी प्रावधानों, प्रोत्‍साहनों, प्रक्रियाविधियों और करों की दरों को समेकित किया गया है। पुन:, विभिन्‍न प्रावधानों को इस प्रकार पुन: व्‍यवस्थित किया गया है कि ये अधिनियम की सामान्‍य योजना के अनुरूप हों।

  • विनियामक कार्यों का विलोपन: पारम्‍परिक रूप से कर विधान को एक विनियामक साधन के रूप में भी उपयोग किया जाता है। जबकि अर्थव्‍यवस्‍था के विभिन्‍न क्षेत्रों में स्‍थापित किए जा रहे विनियामक प्राधिकरणों के साथ कर विधान के विनियामक कार्य वापस ले लिए गए हैं। इससे सरलीकरण के कार्य में महत्‍वपूर्ण योगदान मिला है।

  • स्थायित्व प्रदान करना: वर्तमान में करों की दरें संगत वर्ष के वित्त अधिनियम में निर्धारित की गई हैं। अत: करों की वर्तमान दरों में अनिश्चितता और अस्‍थायित्‍व का एक विशेष स्‍तर है। इस संहिता के अंतर्गत करों की सभी दरें संहिता में पहली से चौथी अनुसूची तक निर्धारित करने का प्रस्‍ताव है और इस प्रकार एक वार्षिक वित्त विधेयक की आवश्‍यकता समाप्‍त हो जाएगी। दरों में परिवर्तन, यदि कोई हों, एक संशोधन विधेयक के रूप में संसद के सामने अनुसूची में उपयुक्‍त संशोधनों के माध्‍यम से किया जाएगा।

^ ऊपर

 
वित्त मंत्रालय
प्रत्‍यक्ष कर संहिता विधेयक, 2009
प्रत्‍यक्ष कर संहिता की दर
 
 
Government of India
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