वेतन किसी सुनिश्चित अथवा इंगित संविदा के परिणामस्वरूप की गई सेवा के लिए किसी व्यक्ति को आवधिक रूप से प्राप्त होने वाला अथवा उसके द्वारा प्राप्त पारिश्रमिक होता है। नियोक्ता – कर्मचारी संबंध का अस्तित्व बनाए रखना "वेतन" शीर्ष के अधीन विशेष प्राप्ति का कर निर्धारण करने की अपरिहार्य शर्त होती है। इस अनुभाग के अधीन, किसी भी भुगतान पर तब तक कर नहीं लगाया जाएगा, जब तक कि आदाता व भुगतानकर्ता के बीच नियोक्ता और कर्मचारी के संबंध स्थापित न हो जाएं। इस प्रकार, नियोक्ता कर्मचारी के संबंध अनुबंधात्मक होने चाहिए। संविदा को मौखिक अथवा सुनिश्चित रूप से अभिव्यक्त किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, कार्य व्यापार करने वाली उसकी भागीदारी फर्म से किसी भागीदार द्वारा प्राप्त किए गए वेतन को ''वेतन'' के रूप में चार्ज (प्रभार्य नहीं) नहीं किया जाएगा, परन्तु उसे कार्य व्यवसाय व व्यवसाय से प्राप्त लाभ व नफ़ा के रूप में प्रभार्य किया जाएगा। इसी प्रकार, एम पी अथवा एम एल ए (सांसद व विधायक) के रूप में किसी व्यक्ति द्वारा वेतन "अन्य स्रोतों से प्राप्त आय" के रूप में कर योग्य है, परन्तु यदि कोई व्यक्ति राज्य मंत्री/केंद्र सरकार के रूप में वेतन प्रापत करता है तो वह "वेतन" के रूप में कर योग्य है, जबकि उसके परिवार के सदस्यों द्वारा उसकी मृत्यु पर प्राप्त पेंशन (परिवार पेंशन) पर "अन्य स्रोतों से प्राप्त आय" के रूप में कर लगाया जाता है।
आयकर अधिनियम के अधीन, "वेतन" में निम्नलिखित शामिल है :-
- मजदूरी
- वार्षिकी अथवा पेंशन
- उपदान
- शुल्क, कमीशन, अनुलब्धियां अथवा वेतन के बदले लाभ
- अग्रिम वेतन
- भविष्य निधि से प्राप्ति
- निर्धारित सीमा से अधिक मान्य भविष्य निधि में नियोक्ता का अंशदान
- छुट्टी भुनाना
- सेवा संविदा आदि में अंतर होने के परिणामस्वरूप क्षतिपूर्ति
आयकर अधिनियम के अधीन स्वीकार्य वेतन आय से की गई कटौतियां इस प्रकार है:-
- मानक कटौती
- राज्य सरकार द्वारा वसूली किया गया व्यावसायिक/रोजगार कर
- मनोरंजन भत्ता
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