संयुक्त उद्यम (जे वी) को संयुक्त नियंत्रण रखते हुए आर्थिक गतिविधियों को शुरू करने के लिए उनके इक्विटी भाग का अंशदान करने वाली प्रत्येक पार्टी के साथ, दो अथवा दो से अधिक पार्टियों के बीच किए गए अनुबंधात्मक करार के रूप में परिभाषित किया गया है। ऐसे करार में, सभी पार्टियां उद्यम के लाभ के लिए विभिन्न वित्तीय और परिचालन नीतियों को शासित करने और व्यय, राजस्व आदि की भागीदारी करने के लिए सहमत है। अन्य शब्दों में, कोई भी एकल उद्यमकर्ता गतिविधि के एक पक्षीय नियंत्रण की स्थिति में नहीं है।
संयुक्त उद्यम कंपनियों को भारतीय कंपनी अधिनियम के अधीन सामान्यतया निर्मित किया जाता है। ये कंपनियां प्राइवेट लिमिटेड अथवा पब्लिक लिमिटेड कंपनियां हो सकती है।
भारतीय बाजार में प्रवेश करने वाली विदेशी कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किया गया अत्यंत सामाय तरीका भारतीय कंपनी सहित संयुक्त उद्यम पर कार्य करना है। संयुक्त उद्यम विदेशी निवेशक के लिए निम्नलिखित लाभ प्रदान कर सकते है :-
- भारतीय भागीदार का मान्य वितरण/विपणन संबंधी गठन उपलब्ध है।
- भारतीय भागीदार के वित्तीय संसाधन की सहज उपलब्धता
- भारतीय भागीदारों के मान्य संपर्क, जिससे विदेशी निवेशक द्वारा प्रचालन कार्यों के गठन की सहज प्रक्रिया में मदद मिलेगी।
यह संभव है कि वर्तमान कंपनी के साथ ऐसा संयुक्त उद्यम शुरू किया जाए अथवा भारतीय भागीदार के साथ एक नई कंपनी शुरू की जाए। इस मामले में, भारतीय कंपनी को बनाए रखने की जरूरत है और उसे कंपनी में विदेशी निवेश की अनुमति देने का अनुरोध करते हुए विदेशी संवर्धन बोर्ड अथवा भारतीय रिजर्व बैंक को पहुंच करनी होगी।