| निवेशों का कराधान जैसे कच्ची सामग्री, संघटक और अन्य मध्यवर्ती की बहुत सी सीमाएं थीं। उत्पादन प्रक्रिया में कच्ची सामग्री प्रक्रिया अवस्था से गुजरती है जब तक कि अंतिम उत्पाद तैयार होता है। इस प्रकार से पहला विनिर्माता का प्रतिफल दूसरे विनिर्माता के लिए निवेश होता है और यह क्रम चलते रहता है। जब इन सामग्रियों को उत्पाद के विनिर्माण 'क' में प्रयुक्त किया जाता है तो अंतिम उत्पाद की लागत न केवल निवेश की लागत के कारण बढ़ती है अपितु ऐसे निवेश पर भुगतान किए गए शुल्क के कारण भी बढ़ती है। चूंकि अंतिम उत्पाद पर शुल्क यथा मूल्य आधार पर होता है और उत्पाद 'क' की अंतिम लागत में कच्ची सामग्रियों पर दोहरा कराधान होता है। दूसरे शब्दों में कर का भार बढ़ता जाता है जैसे जैसे कच्ची सामग्री और अंतिम उत्पाद एक अवस्था से दूसरी अवस्था पर गुजरते हैं। क्योंकि प्रत्येक अनुवर्ती खरीददार को दोबारा सामग्री पर कर का भुगतान करना पड़ता है जिस पर पहले ही कर लग चुका है। यह कास्केडिंग प्रभाव या दोहरा कराधान कहलाता है।
यह बहुधा उत्पादन संरचना की विकृत कर दिया है और कर का सही निर्धारण अनुमत नहीं किया। इसलिए सरकार ने सतत आधार पर निवेशों को उत्पाद शुल्क और समान शुल्कों को हटाकर केंद्रीय उत्पाद शुल्क प्रणाली की इन कमियों को दूर करने का प्रयास किया। इस उद्देश्य को प्राप्त करने की आदर्श प्रणाली मूल्यवर्धित कराधान अपनाना (वैट) हो सकती थी। तथापि, कुछ व्यावहारिक मुश्किलों के चलते पूर्ण रूप से मूल्यवर्धित कराधान अपनाना संभव नहीं पाया।
इसलिए सरकार ने नई स्कीम मोडवैट (परिवर्तित मूल्य वर्धित कर) विकसित किया। मोडवैट स्कीम अनिवार्य रूप से कराधान की वैट स्कीम का अनुसरण करती है अर्थात यदि एक विनिर्माता क दूसरे विनिर्माता ख से कुछ संघटक खरीदता है (कच्ची सामग्री) तो उसने अपने उत्पाद शुल्क का भुगतान कर दिया होता और इस उत्पाद शुल्क की वसूली क से इसकी विक्रय कीमत में कर ली गई होती है। अब क को अपने द्वारा विनिर्मित उत्पाद पर उत्पाद शुल्क चुकाना है तथा कच्ची सामग्री का आपूर्तिकर्ता ख द्वारा चुकाए गए उत्पाद शुल्क भी वहन करना है। मोडवैट स्कीम के तहत विनिर्माता विनिर्माण में अपने द्वारा प्रयुक्त कच्ची सामग्री और संघटकों पर चुकाए गए उत्पाद शुल्क का श्रेय ले सकता है। यह केवल तब उत्पाद शुल्क हो सकता है। यह केवल तब उत्पाद शुल्क हो सकता है जब प्रत्येक विनिर्माता द्वारा प्रत्येक अवस्था में मूल्य में वर्धन होता है।
मोडवैट स्कीम का विनियमन केंद्रीय उत्पाद शुल्क नियम के नियम 57 क से 57 प और उनके अधीन जारी अधिसूचनाओं के द्वारा होता है (केंद्रीय उत्पाद शुल्क नियम, 2002 वित्त अधिनियम,2002 की धारा 143)
मोडवैट स्कीम उसी क्रम का राजस्व सुनिश्चित करती है और साथ-साथ अंतिम उत्पाद की कीमत कम हो सकती है। कास्केड प्रभाव समाप्त करने के द्वारा लागत कम करने और कर ढांचा में बेहतर यौक्तिकीकरण करने एवं अंतिम उत्पाद पर कराधेय कर की राशि में सुनिश्चितता लाने के अतिरिक्त यह स्कीम उपभोक्ता को किसी उत्पाद की लागत पर कराधान के प्रभाव को सटीक रूप से समझने में सहायता करेगी और इसलिए विनिर्माताओं की ओर से अंतिम उत्पादों की कीमतों को बढ़ाने संबंधी अनैतिक प्रयास का विरोध करने में समर्थ बनाएगी, जिसके कारण अधिक कर देना पड़ता है।
बाद में मोडवैट स्कीम का पुनर्गठन सेनवैट (केंद्रीय मूल्य वर्धित कर) स्कीम में किया गया। एक नयी नियमावली 57 क क से 57 क ट, सेनवैट क्रेडिट नियमावली, 2004, के तहत तैयार किया गया और मोडवैट स्कीम में जो भी अड़चनें थी, उन्हें समाप्त कर दिया गया और तुलनात्मक दृष्टि से आकलनों को स्वतंत्र किया गया।
सेनवैट स्कीम के अधीन अंतिम उत्पाद का विनिर्माता या कराधेय सेवा प्रदाता को उत्पाद शुल्क तथा सेवा कर जिनका भुगतान फैक्टरी में किसी भी इनपुट प्राप्ति पर किया गया है या अंतिम उत्पाद के विनिर्माता द्वारा प्राप्त किसी प्रकार की इनपुट सेवा का श्रेय लेने के लिए अनुमत होगा।
‘इनपुट’ शब्द का अर्थ है : -
- हल्का डीजल तेल, हाई स्पीड डीजल और मोटर स्पिरिट जिसे आम तौर पर पेट्रोल के रूप में जाना जाता है को छोड़कर सभी सामग्री जिनका उपयोग अंतिम उत्पाद के निर्माण या इसके संबंध में किया जाता है, प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप में और चाहे वे अंतिम उत्पाद में सन्निहित हों या अन्यथा और इनमें स्नेहक तेल, ग्रीज, कटिंग ऑयल, शीतलक, अंतिम उत्पाद के उप साधन जो अंतिम उत्पाद के साथ निकासी किया जाता है, पेंट या पैकिंग सामग्री के रूप में प्रयुक्त सामग्री, या ईंधन या विद्युत उत्पादन करने के लिए या प्रयुक्त भाप या अंतिम उत्पाद के विनिर्माण के संबंध में प्रयुक्त भाप या किसी अन्य प्रयोजन के लिए फैक्टरी या उत्पादन के भीतर प्रयुक्त सभी सामग्री;
- हल्का डीजल तेल, हाई स्पीड डीजल ऑयल, मोटर स्पिरिट जिसे आम तौर पर पेट्रोल के रूप में जाना जाता है और मोटर वाहन किसी आउटपुट सेवा प्रदाय के लिए प्रयुक्त होता है, को छोड़कर सभी सामग्री;
व्याख्या 1 : हल्का डीजल तेल, हाई स्पीड डीजल ऑयल या मोटर स्पिरिट, को किसी भी प्रयोजन के लिए इनपुट नहीं माना जाएगा।
व्याख्या 2 : इनपुट में पूंजीगत माल के विनिर्माण में प्रयुक्त सामग्री शामिल हैं जो विनिर्माण फैक्टरी में प्रयुक्त होती हैं।;"
"इनपुट सेवा" शब्द का अर्थ है ऐसी कोई सेवा: -
- कराधेय सेवा प्रदाता द्वारा आउटपुट सेवा प्रदान करने के लिए प्रमुक्त की जाती है; या
- विनिर्माता द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अंतिम उत्पाद के विनिर्माण में या इसके संबंध में प्रयुक्त किया जाता है और उठाने की जगह से अंतिम उत्पाद की निकास के लिए प्रयुक्त होती है।
और ऐसी सेवाएं शामिल हैं जो फैक्टरी, आउटपुट सेवा प्रदाता का अहाता या ऐसे फैक्टरी से संबंधित कार्यालय या अहाता, विज्ञापन या बिक्री संवर्धन, बाजार अनुसंधान, उठाने की जगह तक भण्डारण, इनपुट की अधिप्राप्ति, व्यापार संबंधी कार्यकलाप, जैसाकि लेखाकरण, लेखापरीक्षण, वित्त पोषण, भर्ती और गुणवत्ता नियंत्रण कोचिंग और प्रशिक्षण, कंप्यूटर नेटवर्किंग, ऋण दर निर्धारण, शेयर रजिस्ट्री और प्रतिभूति, इनपुट या पूंजी माल का आगम परिवहन या उठाने की जगह तक बाध्य परिवहन;"
विनिर्माता और सेवा प्रदाता अपने द्वारा प्रदाता अपने द्वारा प्रयुक्त पूंजी माल का सेनवैट क्रेडिट ले सकते हैं। संयंत्र और मशीनरी एवं संबद्ध मदें विनिर्माता द्वारा खरीदे जाते हैं। ऐसे माल को पूंजी माल के रूप में जाना जाता है उन पर शुल्क भुगतान होता है। पूंजी माल का उपयोग अंतिम उत्पाद के विनिर्माण में किया जाता या आउटपुट सेवा मुहैया कराने के लिए प्रयुक्त होता है। पूंजी माल पर प्रदत्त शुल्क के संबंध में सेनवैट क्रेडिट केवल उसी वित्तीय वर्ष में प्रदत्त शुल्क का पचास प्रतिशत की राशि तक लिया जाएगा और शेष राशि का क्रेडिट वित्तीय वर्ष के बाद किसी भी वित्तीय वर्ष में लिया जा सकता है जिनमें पूंजी माल प्राप्त किए जाते हैं।
शुल्क भुगतान दस्तावेज जिनके एवज में सेनवैट क्रेडिट लिया जा सकता है, निम्नलिखित है :-
- निम्नलिखित द्वारा जारी बीजक
- इनुपट या पूंजी माल का विनिर्माता
- आयातक
- अपने डिपो या सुपुर्दगी एजेंट के अहाते से आयातक,
- बशर्ते कि डिपो/परिसर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में पंजीकृत हो
- पहली/द्वितीय अवस्था के व्यापारी
- पूरक बीजक
- प्रविष्टि हुंडी
- सीमा शुल्क निर्धारक द्वारा जारी प्रमाणपत्र
- इनपुट सेवा प्रदाता द्वारा जारी बीजक/हुंडी/चालान
- सेवा कर का भुगतान प्रमाणित करने वाल चलान
शुल्क क्रेडिट केवल तब अनुमत होता है जब नीचे दी गई शर्तें पूरी की जाती है :-
- इनपुट या पूंजी माल पर शुल्क क्रेडिट लेने का मूल मानदंड यह है कि सामग्री का उपयोग अंतिम उत्पाद के विनिर्माण में किया जाएगा।
- माल के साथ उचित निर्धारित दस्तावेज होंगे।
- अंतिम उत्पादों पर पूरी तरह शुल्क में टूट या प्रभार योग्य शुल्क से शून्य दर नहीं किया जाएगा।
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