| आयकर अधिनियम के अधनी, 'कारोबार अथवा व्यवसाय के लाभ व नफ़ा' पर कर भी लगाया जाता है। "व्यवसाय" शब्दावली में व्यापार, वाणिज्य अथवा विनिर्माण के रूप में किसी (क) व्यापार (ख) वाणिज्य (ग) विनिर्माण अथवा (घ) कोई जोखिम अथवा संस्था शामिल है। ''शामिल'' शब्दावली एकमात्र दक्षता से प्राप्त विशेष जानकारी रखने हेतु व्यावसायिक योग्यता, रोगी का अध्ययन व उसका अनुप्रयोग करने के पश्चात् अर्जित किए जाने वाली "विशेष जानकारी" की ओर इंगित करती है। ''लाभ व नफ़ा'' शब्द को अधिशेष के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसके द्वारा कारोबार अथवा व्यवसाय से प्राप्त प्राप्तियां इन प्राप्तियों को अर्जित करने के उद्देश्य से आवश्यक व्यय से अधिक होती है। हानियों को शामिल करने के लिए भी इन शब्दों को समझा जाए, ताकि एक दृष्टि से प्राप्त प्राप्तियां इन प्राप्तियों को अर्जित करने के उद्देश्य से आवश्यक व्यय से अधिक होती है। हानियों को शामिल करने के लिए भी इन शब्दों को समझा जाए, ताकि एक दृष्टि से ''लाभ व नफ़ा'' प्लस आय को दर्शाए, जबकि हानियां माइनस आय को इंगित करती है।
निम्नलिखित प्रकार की आय कारोबार अथवा व्यवसाय के लाभ व नफ़ा शीर्ष के अधीन कर में प्रभार्य होती है:-
- किसी व्यवसाय अथवा कारोबार का लाभ और नफ़ा;
- अधिनियम की धारा 28 में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति द्वारा प्राप्त अथवा उसको देय कोई क्षतिपूर्ति अथवा अन्य भुगतान;
- उसके सदस्यों के लिए की गई विशिष्ट सेवाओं से किसी व्यापार, व्यवसाय अथवा सदृश संघ द्वारा प्राप्त आय;
- आयात पात्रता लाइसेंस की बिक्री पर लाभ, नकद क्षतिपूर्ति राशि के रूप में प्रोत्साहन व शुल्क वापसी;
- व्यवसाय से उत्पन्न को लाभ अथवा अनुलब्धियों का मूल्य चाहे उसे राशि में परिवर्तित किया गया है अथवा नहीं;
- किसी फर्म के भागीदार द्वारा ऐसी किसी फर्म से प्राप्त कोई ब्याज, वेतन, बोनस, कमीशन अथवा पारिश्रमिक;
- कोई राशि, चाहे उसे किसी व्यवसाय के संबंध में कोई गतिविधियां कार्यान्वित न करने के लिए अथवा माल के प्रक्रमण अथवा विनिर्माण में सहायता प्रदान करने के लिए संभावित प्रविधि अथवा सदृश प्रकृति के वाणिज्यिक अधिकार अथवा किसी अन्य व्यवसाय अथवा किसी जानकारी, पेटेंट, कॉपीराइट, विशेषाधिकार की भागीदारी न करने के लिए किसी करार के अधीन नकद अथवा किसी रूप में प्राप्त किया गया है अथवा वह प्राप्ति योग्य है।;
- मुख्य बीमा नीति के अधीन प्राप्त की गई कोई राशि;
- सट्टेबाजी से संबंधित लेन देनों से प्राप्त आय।
निम्नलिखित मामलों में, व्यापार अथवा व्यवसाय से प्राप्त आय "व्यवसाय अथवा कारोबार के लाभ और नफ़ा" शीर्ष के अधीन कर योग्य नहीं है:-
- गृह संपत्ति का किराया " गृह संपत्ति से प्राप्त आय" शीर्ष के अधीन पर योग्य है। यद्यपि, संपत्ति किराया आदाता के बिक्री माल को संघटित करती है अथवा किराया आदाता संपत्तियों को किराए पर देने के व्यवसाय से जुड़ा होता है।
- शेयरों पर मानद लाभांश "अन्य स्रोतों से प्राप्त आय" शीर्ष के अधीन कर योग्य है।
- लॉटरियों, दौड़ आदि की जीत से प्राप्त राशि "अन्य स्रोतों से आय" शीर्ष के अधीन कर योग्य है।
जब तक ऐसे लाभ में छूट दी जाती है, तब तक किसी अन्य व्यवसाय का लाभ व नफ़ा कर योग्य है।
''व्यवसाय अथवा कारोबार के लाभ व नफ़ा'' शीर्ष के अधीन कर योग्य आय की परिकलना को शासित करने के सामान्य सिद्धांत :-
- निर्धारिती द्वारा व्यवसाय अथवा कारोबार को कार्यान्वित किया जाएगा। इसमें व्यावसाय का स्वामित्व नहीं रखा जाता है, जिसमें महत्वपूर्ण तथा यह है कि इसमें व्यवसाय अथवा कारोबार को कार्यान्वित करने वाला वह शक्ति होती है जिस पर कर लगाया जाता है।
- व्यवसाय अथवा कारोबार से प्राप्त आय पर पूर्व वर्ष के दौरान किसी समय पर निर्धारिती द्वारा कोई कारोबार अथवा व्यवसाय किए जाने की स्थिति में ही इस शीर्ष के अधीन कर लगाया जाता है। यह आय आगामी निर्धारण वर्ष के दौरान कर योग्य होती है।
- निर्धारिती द्वारा कार्यान्वित किए गए विभिन्न व्यवसाय अथवा कारोबार के लाभ व नफ़ा को कर में अलग से चार्ज नहीं किया जाता है अर्थात् कर भार को निर्धारिती द्वारा कार्यान्वित किए गए सभी व्यवसायों अथवा कारोबारों से प्राप्त सकल आय के अनुसार प्रस्तुत किया जाता है। परन्तु, सट्टेबाजी के व्यवसाय के लाभ और हानि को अलग से रखा जाता है।
- यह कानूनी स्वामित्व ही नहीं है, अपितु यह लाभदायी स्वामित्व भी है, जिस पर विचार किया जाएगा।
- किसी व्यवसाय अथवा कारोबार को बंद करने पर किसी निर्धारिती द्वारा प्राप्त लाभ कर योग्य नहीं है, क्योंकि उस स्थिति में कोई व्यवसाय कार्यान्वित नहीं किया जाता है। तथापि, यदि कारोबार को बंद करने की प्रक्रिया इस प्रकार की होती है कि उसे किसी व्यापार को कार्यान्वित करने के लिए शामिल किया जा सकें, तो ऐसा लाभ पूंजी लाभ अथवा व्यवसाय आय के रूप में कर योग्य होगा।
- कर योग्य लाभ लेखा वर्ष में उत्पन्न अथवा प्रोद्भूत लाभ होता है। भविष्य में घटत होने वाले प्रत्याशित अथवा संभावित लाभ अथवा हानियों पर कर योग्य आय प्राप्त करने के लिए विचार नहीं किया जाता है। इसके साथ ही, लाभ, जो कर योग्य होते हैं, वास्तविक लाभ होते हैं, न कि कल्पित लाभ होते हैं। वाणिज्यिक दृष्टि से वास्तविक लाभ से अभिप्राय व्यवसाय करने वाले व्यक्ति को प्राप्त लाभ से है, न कि सीमित, तकनीकी अथवा कानूनी दृष्टि से प्राप्त लाभ से है।
- किसी वाणिज्यिक परिसंपत्ति द्वारा प्राप्त आय प्राप्ति, व्यवसाय मालिक द्वारा जिस तरीके से परिसंपत्ति का उपयोग किया जाता है, उस तरीके पर ध्यान दिए बिना व्यवसाय का लाभ होती है।
- किसी राशि अथवा व्यय के संबंध में पूर्व वर्ष के दौरान निर्धारिती द्वारा वसूल की गई कोई राशि, जिसकी पहिले कटौती के रूप में स्वीकृति दी गई थी, उसकी वसूली किए जाने के वर्ष की व्यवसाय आय के रूप में कर योग्य होती है।
- पुस्तक प्रविष्टियों का तरीका सामान्यतया इन प्रश्न का निर्णायक नहीं होता है कि निर्धारिती ने कोई लाभ अथवा हानि अर्जित की है।
- आय कर अधिनियम कारोबार अथवा अवैधता से संबद्ध नहीं होता है। अत: अवैध व्यवसाय अथवा कारोबार की आय में कर से छूट नहीं है।
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