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न्‍यासों का कराधान:
निजी न्‍यासों का कराधान
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  • जब निजी लाभार्थियों के भाग (शेयर) का निर्धारण किया जाता है :-


    • प्रत्‍येक लाभार्थियों को मिलने वाला भाग प्रातिनिधित्‍व निर्धारिती के रूप में न्‍यासी (न्‍यासियों) की ओर से अथवा आय के पात्र (न्‍यासियों) की ओर से अथवा आय के पात्र लाभार्थी की ओर से सीधे ही निर्धारण किए जाने के लिए दायी है। ऐसा निर्धारण प्रत्‍येक लाभार्थी की कुल आय पर लागू दर पर किया जाता है।‍

    • जब न्‍यास की आय में व्‍यवसाय का लाभ व नफ़ा सम्मिलित अथवा शामिल होते है तो आय कर न्‍यासी (न्‍यासियों) की ओर से अधिकतम सीमांत दर पर सम्‍पूर्ण आय पर वसूल किया जाएगा। यह प्रावधान उस स्थिति में लागू नहीं होता है, जब न्‍यास की उन पर निर्भर किसी संबंधी के एकमात्र लाभ के लिए किसी व्‍यक्ति द्वारा घोषणा की गई हो और ऐसा न्‍यास उनके द्वारा इस प्रकार घोषित एकमात्र न्‍यास हो।
  • जब लाभार्थियों का निजी भाग अनिश्चित अथवा अज्ञात होता है [धारा 164 के अधीन]:-
    • न्‍यासी प्रतिनिधित्‍व निर्धारिती के रूप में कर के लिए दायी है।

    • जहां आय में व्‍यवसाय का लाभ व नफ़ा सम्मिलित अथवा शामिल है, वहां उन मामलों से छोड़कर, जहां न्‍यास की उन पर निर्भर किसी संबंधी के एकमात्र लाभ के लिए घोषणा की गई है और न्‍यास उनके द्वारा इस प्रकार घोषित एकमात्र न्‍यास भी है, न्‍यास की सम्‍पूर्ण आय को अधिनियम सीमांत कर दर पर प्रभारित किया जाता है।

    • जहां आय में व्‍यवसाय का लाभ और नफ़ा शामिल अथवा सम्मिलित नहीं है, वहां आये को अधिकतम सीमांत कर दर पर प्रभारित किया जाता है।

  • तथापि, अधिकतम सीमांत कर दर निम्‍नलिखित मामलों में लागू नहीं है और आय कर में प्रभार्य होगी, क्‍योंकि वह व्‍यक्तियों के संघ (एओपी) की आय थी :-

    1. जहां किसी लाभार्थियों के पास आयकर अधिनियम के अधीन कर में प्रभार्य कोई अन्‍य आय नहीं है और कोई भी लाभभोगी किसी अन्‍य न्‍यास के अधीन लाभार्थी नहीं है; अथवा
    2. जहां संबद्ध आय अथवा संबद्ध आय का भाग किसी व्‍यक्ति द्वारा वसीयत द्वारा घोषित किसी न्‍यास के अधीन प्राप्ति योग्‍य है।
    3. जहां न्‍यास एक गैर-वसीयती न्‍यास हैं, जिसे उनके समर्थक के रखरखाव हेतु उन पर मुख्‍य रूप से निर्भर अवस्‍थापक के संबंधियों के एकमात्र लाभ के लिए 1 मार्च, 1970 से पहले सृजित किया गया अथवा जहां अवस्‍थापक एक हिंदू अविभाजित परिवार है, वहां उसे उन पर इस प्रकार निर्भर उसके एकमात्र लाभ के लिए सृजित किया गया है अथवा
    4. जहां न्‍यास को ऐसे व्‍यवसाय अथवा व्‍यापार में नियुक्‍त व्‍यक्तियों के एकमात्र लाभ के लिए कोई व्‍यसवाय अथवा व्‍यापार करने वाले किसी व्‍यक्ति द्वारा सद्भाव से सृजित किसी अन्‍य निधि अथवा भविष्‍य निधि, अधिवार्षिता निधि, अपदान निधि, पेंशन निधि की ओर से सृजित किया गया है।
  • उपयुक्‍त (i) (ii) और (iii) के मामलों में, संबद्ध आय न्‍यासियों की ओर से कर योग्‍य है, मानो कि यह व्‍यक्तियों के संघ की कुल आय थी, जबकि उपर्युक्‍त (iv) के अधीन आने वाली आय को कर से छूट है।

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