Spacer
 
Spacer
  Business.gov.in Indian Business Portal
An Initiative of India.gov.in
 
 
तीव्र मीनू
 
कराधान
spacer
Industry & Services निजी कराधान
Industry & Services भागीदारी हेतु कराधान
Industry & Services सीमा शुल्‍क
Industry & Services संपदा कर
Industry & Services निगमित कराधान
Industry & Services एजेंट हेतु कराधान
Industry & Services उत्‍पाद शुल्‍क
Industry & Services पेन
Industry & Services व्‍यावसाय सत्ताओं के अन्‍य रूपों का कराधान
Industry & Services प्रतिनिधित्‍व कार्यालयों का कराधान
Industry & Services सेवा कर
Industry & Services टीडीएस, टीसीएस, टीएएन (टेन)
Industry & Services मूल्‍य वर्धित कर (वैट)
Industry & Services प्रत्‍यक्ष कर संहिता
   
 
taxation
Taxation
व्‍यावसाय सत्ताओं के अन्‍य रूपों का कराधान:
लघु उद्योगों का कराधान
Previous Page
spacer
लघु उद्योग (एसएसआई) एक औद्योगिक उपक्रम है जिसमें संयंत्र एवं मशीनरी, चाहे वह स्‍वामित्‍वाधीन धारित हो अथवा पट्टे या किराया खरीद पर हो, की नियत परिसम्‍पत्तियों में निवेश एक करोड़ से अधिक न हो। तथापि, सरकारी द्वारा इस निवेश सीमा में समय समय पर परिवर्तन किया जाता है।

लघु क्षेत्र में उद्यमियों के लिए सामान्‍यत: देश के किसी भी भाग में इकाइयां स्‍थापित करने के लिए केन्‍द्र सरकार या राज्‍य सरकार से ऋण प्राप्‍त करना अपेक्षित नहीं है। लघु इकाई का पंजीकरण भा अनिवार्य नहीं हैं। किन्‍तु राज्‍य निदेशालय या उद्योग आयुक्‍त अथवा डीआईसी के साथ इसका पंजीकरण इकाई को विभिन्‍न प्रकार की सरकारी सहायता यथा उद्योग विभाग से वित्तीय सहायता, राज्‍य वित्त निगमों तथा अन्‍य वाणिज्यिक बैंकों में मध्‍यम एवं दीर्घावधिक ऋण, राष्‍ट्रीय लघु उद्योग निगम इत्‍यादि से किराया खरीद आधार पर मशीनरी आदि प्राप्‍त करने के लिए अर्हक बना देता है। लघु उद्योग के संवर्धन के लिए विशेष योजनाओं अर्थात ऋण गारंटी योजना, पूंजीगत आर्थिक सहायता, चयनित मदों पर अपचित सीमा शुल्‍क, आईएसओ – 9000 प्रमाणन प्रतिपूर्ति के लाभ तथा अनेक अन्‍य प्राप्‍त करने के लिए भी पंजीकरण एक अनिवार्य अपेक्षा है।

लघु उद्योग मंत्रालय देश में लघु उद्योग की संवृद्धि तथा विकास के लिए एक नोडल अभिकरण के रूप में कार्य करता है। मंत्रालय लघु उद्योगों का संवर्धन करने तथा उनकी प्रतिस्‍पर्द्धात्‍मकता बढ़ाने के उद्देश्‍य से नीतियों एवं कार्यक्रमों का निरूपण करता है। उन्‍हें क्रियान्वित करता है। इसकी सहायता विभिन्‍न सार्वजनिक क्षेत्रक उपक्रमों द्वारा की जाती है, जैसे :-

भारत जैसे विकासशील देश में, लघु उद्योगों देश के आर्थिक विकास में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे देश के औद्योगिक उत्‍पाद, निर्यातों, रोजगार तथा एक उद्यमकारिता आधार के सृजन में अपने योगदान के संदर्भ में भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था का एक महत्‍वपूर्ण खंड (हिस्‍सा) हैं। ये उद्योग कुल मिलाकर पारम्‍परिक से आधुनिक प्रौद्योगिकी की ओर आर्थि‍क संक्रमण के एक चरण के द्योतक हैं। लघु उद्योग उद्यमकारिता के आधार को व्‍यापक बनाने में एक अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लघु उद्योगों का विकास उद्योग का व्‍यापकधारित स्‍वामित्‍व हासिल करने, औद्योगिक क्षेत्र में पहल तथा उद्यम के विकीर्णन के लिए एक सहज तथा प्रभावी माध्‍यम की पेशकश करता है।

इनके महत्‍व को देखते हुए, पहली योजना से ही सरकारी नीति के ढांचे में भारत के समग्र आर्थिक विकास में इसके सामरिक महत्‍व को ध्‍यान में रखते हुए लघु उद्योग क्षेत्र के विकास की आवश्‍यकता पर विशिष्‍ट प्रकाश डाला गया है। तदनुसार, सरकार की लघु उद्योगों की और नीतिगत सहायता लघु उद्यमी श्रेणी के विकास के लिए अनुकूल तथा प्रेरक रही है। सरकार उपयुक्‍त नी‍तियों तथा संवर्धनात्‍मक योजनाओं का निर्माण करके तथा उन्‍हें क्रियान्वित करके लघु उद्योगों के विकास को उच्‍चतम वरीयता देती है।

लघु उद्योगों के लिए सरकार की सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण संवर्धनात्‍मक नीति उत्‍पादन या लाभों पर उदग्रहणीय प्रत्‍यक्ष अथवा अप्रत्‍यक्ष करों में छूट तथा रियायतों के रूप में राजकोषीय प्रोत्‍साहन हैं।

वित्तीय वर्ष 2005-06 से लघु उद्योग लाभों तथा फायदों (आयकर अधिनियम की धारा 80 आईबी के तहत) के संबंध में कटौतियों के लिए निम्‍न दरों पर दावा कर सकते हैं :-

  • यदि लघु उद्योग इकाई किसी कम्‍पनी के स्‍वामित्‍व में है तो उपलब्‍ध कटौती प्रथम 10 वर्षों के लिए 30 प्रतिशत है।
  • यदि लघु उद्योग इकाई किसी सहकारी समिति के स्‍वामित्‍व में है तो प्रथम 10 वर्षों के लिए उपलब्‍ध कटौती 25 प्रतिशत है।

लघु उद्योग इकाइयां निम्‍न शर्तों को पूरा करने के पश्‍चात इस कर छूट का उपयोग कर सकती है :-

  1. वे किसी अन्‍य औद्योगिक उपक्रम की सहायक कम्‍पनी या उसके स्‍वामित्‍वाधीन अथवा किसी औद्योगिक उपक्रम/व्‍यवसाय को विभाजित किए जाने या उसके पुनर्निर्माण के परिणाम स्‍वरूप नहीं हुआ होना चाहिए लघु उद्योग अनुमति प्राप्‍त वस्‍तुओं के किसी भी स्‍वरूप या किस्‍म का विनिर्माण कर सकती हैं। उनका व्‍यवसाय पहली अप्रैल 1991 तथा 31 मार्च 2002 के बीच आरंभ हुआ होना चाहिए। विद्युत की सहायता से संचालित विनिर्माण प्रक्रिया में उनके पास कम से कम 10 कामगार नियोजित होने चाहिए तथा विद्युत की सहायता के बिना संचालित विनिर्माण प्रक्रिया में कम से कम 20 कामगार नियोजित होने चाहिए।
  2. कुल आय से यह कर छूट उस निर्धारण वर्ष के लिए अनुमत की जाती है जिसमें इकाई वस्‍तुओं का निर्माण करना शुरू करती है।

लघु उद्योग इकाइयां केन्‍द्रीय उत्‍पाद प्रशुल्‍क अधिनियम, 1985 (1986 का 5) के अंतर्गत उत्‍पाद शुल्‍कों के अध्‍यधीन हैं। लघु उद्योग की इकाइयों के लिए उत्‍पाद शुल्‍क रियायतों की पात्रता लघु उद्योग इकाई पंजीकरण के बजाए वार्षिक व्‍यापार पर आधारित की गई हैं। 4 करोड़ रुपए से कम के व्‍यापर वाली लघु उद्योग इकाइयां ही रियायतों के लिए अर्हक हैं। भारत सरकार ने एक विनिर्दिष्‍ट उत्‍पादन पर केन्‍द्रीय उत्‍पाद शुल्‍क के भुगतान से पूर्ण छूट तथा तत्‍पश्‍चात स्‍लैबवार छूट प्रदान करके लघु उद्योग की इकाइयों को विभिन्‍न रियायतें उपलब्‍ध कराई हैं। इस प्रकार, इस संबंध में रियायतें निम्‍न हैं :-

  • 100 लाख रुपए तक की वस्‍तुओं का उत्‍पादन करने वाली लघु उद्योग इकाइयों को उत्‍पाद शुल्‍क के भुगतान से छूट प्राप्‍त है।
  • 60 लाख रुपए प्रति वर्ष से कम के व्‍यापार वाली लघु उद्योग इकाइयों को लिए तैयार उत्‍पादों का भंडारण करने के लिए पृथक भंडार कक्ष रखने की आवश्‍यकता नहीं है।
  • उनके द्वारा दैनिक स्‍टॉक लेखे इत्‍यादि जैसे सांविधिक अभिलेखों का अनुरक्षण किया जाना अपेक्षित नहीं है।
  • लघु उद्योग रियायत घरेलू खपत के लिए वस्‍तुओं के साथ साथ नेपाल तथा भूटान के लिए निर्यातित वस्‍तुओं के लिए उपलब्‍ध है।

रियायतों/छूटों के लिए विकल्‍पों का चुनाव

  • लघु उद्योग योजना (सेनवेट के बिना) :- यूनिट 100 लाख रुपए के व्‍यापार अथवा समाशोधन मूल्‍य तक पूर्ण छूट का उपयोग कर सकते हैं तथा तत्‍पश्‍चात वे 100-300 लाख रुपए की स्‍लैब दर में सामान्‍य शुल्‍क का भुगतान करेंगे। इस विकल्‍प का प्रयोग स्‍वत: किया जा सकता है। ऐसी लघु उद्योग इकाइयां 100 लाख रुपए के व्‍यापार तक पहुंचने के पश्‍चात ही निविष्टियों पर सेनवेट क्रेडिट का उपयोग कर सकते हैं। यह योजना लघु उद्योग छूट अधिसू‍चना एवं 8/2003 सीई के अंतर्गत उल्लिखित सभी इकाइयों पर प्रयोज्‍य है। यह अधिसूचना बुनियादी उत्‍पाद शुल्‍क तथा विशेष उत्‍पाद शुल्‍क के संबंध में छूट प्रदान करती है। विनिर्माण इस अधिसूचना में निहित छूट का उपयोग न करने का विकल्‍प चुन सकता है तथा इसके बजाए समाशोधनों पर शुल्‍क की सामान्‍य दर का भुगतान कर सकता है, किन्‍तु विकल्‍प के एक बार प्रयोग कर लिए जाने पर वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक वह जारी रहेगा।
  • लघु उद्योग योजना (सेनवेट के साथ) :- यूनिट अपने समस्‍त व्‍यापार पर निविष्टियों संबंधी सेनवेट क्रेडिट का उपयोग कर सकता है। 100 लाख रुपए तक के समाशोधन मूल्‍य के लिए यूनिटों को सामान्‍य शुल्‍क का 60 प्रतिशत अदा करना होगा तथा तत्‍पश्‍चात 100-300 लाख रुपए के समाशोधन मूल्‍य के लिए उन्‍हें सामान्‍य शुल्‍क दर अदा करनी है। निर्धारण योग्‍य मूल्‍य’का प्रयोग 100 तथा 300 लाख रुपए की सीमा का परिकलन करने के लिए किया जाता है जो करों को छोड़कर कारखाना द्वार पर थोक मूल्‍य के समकक्ष है। विनिर्माता इस विकल्‍प का चयन किसी भी समय रियायत तथा रियायती शुल्‍क दर के लिए अपने पात्रता का निर्धारण करके कर सकता है। इस विकल्‍प का प्रयोग करते समय, विनिर्माता सहायक केन्‍द्रीय उत्‍पाद आयुक्‍त को लिखित में सूचित करेगा जिसकी एक प्रति इसके अधीक्षक को देगा जिसमें निम्‍न ब्‍यौरे शामिल होंगे :- (क) विनिर्माता का नाम तथा पता; (ख) कारखाना/कारखानों का अवस्‍थल/के अवस्‍थल; (ग) विनिर्दिष्‍ट वस्‍तुओं के विनिर्माण के प्रयुक्‍त निविष्टियों का विवरण तथा तत्‍पश्‍चात इसका विवरण; (घ) तिथि जब से लघु उद्योग छूट अधिसूचना (सं. 9/2003 सीई) के अंतर्गत विकल्‍प का प्रयोग किया गया है; (ङ) विकल्‍प का प्रयोग करने की तिथि से विनिर्दिष्‍ट वस्‍तुओं (लघु उद्योग छूट अधिसूचना के अंतर्गत अ‍सम्मिलित समाशोधनों के मूल्‍य को छोड़कर) के समाशोधनों के सकल मूल्‍य।

समाशोधनों, जो लघु रियायतों के लिए अर्हक नहीं है, का मूल्‍य अर्थात जिन्‍हें लघु उद्योग छूट अधिसूचना के अंतर्गत शामिल नहीं किया गया है, निम्‍न प्रकार हैं :-

  • विनिर्दिष्‍ट वस्‍तुओं का समाशोधन जिन्‍हें विनिर्दिष्‍ट वस्‍तुओं के उत्‍पादन कारखाने के भीतर किन्‍ही विनिर्दिष्‍ट वस्‍तुओं के आगामी विनिर्माण के लिए निविष्टियों के रूप में प्रयुक्‍त किया गया हैं,
  • वस्‍त्रों (फैब्रिक) की बुनाई के लिए या ईथीलीन या प्रोपीलीन पोलीमर्स से बने थैलों या बारों का विनिर्माण के लिए उत्‍पादन के कारखाने के भीतर प्रयुक्‍त प्‍लास्टिक की स्ट्रिपों का समाशोधन;
  • किसी अन्‍य व्‍यक्ति के ब्रांड नाम या व्‍यापार नाम के साथ किसी लघु उद्योग इकाई द्वारा विनिर्मित वस्‍तुओं का समाशोधन (जब तक कि वस्‍तुओं का विनिर्माण ग्रामीण क्षेत्रों में न किया गया हो;
  • लघु उद्योग इकाई द्वारा कैप्टिव खपत के लिए विनिर्मित वस्‍तुओं का समाशोधन;
  • किसी अन्‍य अधिसूचना के अंतर्गत छूट प्राप्‍त वस्‍तुओं का समाशोधन।

लघु उद्योगों को प्रक्रियात्‍मक रियायतें

  • त्रैमासिक विवरणी :- रियायतों का उपयोग करने वाली लघु उद्योग इकाइयों द्वारा ईआर-। विवरणी प्रस्‍तुत की जानी आवश्‍यक नहीं है। उन्‍हें केवल अनुवर्ती माह की 20 तारीख तक त्रैमासिक ईआर-। विवरणी प्रस्‍तुत करनी है।
  • लघु उद्योग इकाइयों को अनुवर्ती माह की 15 तारीख तक शुल्‍क का भुगतान करना है। उन्हें प्रत्‍येक वर्ष मार्च में माह के अंत तक शुल्‍क का भुगतान भी करना है।
  • लघु उद्योगों के लिए निर्यात प्रक्रियाविधियां :- उत्‍पाद शुल्‍क प्रावधानों के अंतर्गत असम्मिलत लघु उद्योग इकाइयों को सरलीकृत निर्यात प्रक्रियाविधियों का अनुसरण करना है जैसे उन्‍हें एआरई-। प्रपत्र इत्‍यादि को तैयार नहीं करना है।
  • उत्‍पाद निरीक्षक, अधिकारी तथा लेखापरीक्षा दल लघु उद्योग इकाइयों का दौरा केसल विशिष्‍ट प्रयोजन के लिए तथा सहायक आयुक्‍त में विशिष्‍ट अनुमति प्राप्‍त करने के पश्‍चात ही कर सकते हैं। उन्‍हें पंजीकृत (अधिकृत) व्‍यक्ति द्वारा अनुरक्षित आगुंतक बही में संगत विवरण प्रविष्‍ट करने होंगे। सामान्‍यत:, लघु उद्योग इकाई की लेखापरीक्षा दो या पांच वर्षों में एक बार की जानी है (उन यूनिटों को छोड़कर जो 1 करोड़ या अधिक के शुल्‍क का भुगतान करते हैं जिनकी लेखापरीक्षा प्रत्‍येक वर्ष की जाएगी।

^ ऊपर

 
केन्‍द्रीय उत्‍पाद एवं सीमाशुल्‍क बोर्ड
केन्‍द्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड
 
 
Government of India
spacer
 
 
Business Business Business
 
  खोजें
 
Business Business Business
 
Business Business Business
 
मैं कैसे करूँ
Business कम्‍पनी पंजीकरण करूं
Business नियोक्‍ता के रूप में पंजीकरण करें
Business केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) में शिकायत भरें
Business टैन कार्ड के लिए आवेदन करें
Business आयकर विवरणी भरें
 
Business Business Business
 
Business Business Business
 
  हमें सुधार करने में सहायता दें
Business.gov.in
हमें बताएं कि आप और क्‍या देखना चाहते हैं।
 
Business Business Business
Business
Business Business Business
 
निविदाएं
नवीनतम शासकीय निविदाओं को देखें और पहुंचें...
 
Business Business Business
Business
Business Business Business
 
 
पेटेंट के बारे में जानकारी
Business
कॉपीराइट
Business
पेटेंट प्रपत्र
Business
अभिकल्पन हेतु प्रपत्र
 
 
Business Business Business
 
 
 
Spacer
Spacer
Business.gov.in  
 
Spacer
Spacer