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एओपी/बीओआई की आय में किसी सदस्य के भाग पर तीन विभिन्न तरीकों से व्यवहार किया जाएगा :-
- जहां संघ अथवा निकाय अधिकतम सीमांत दर पर अथवा अधिकतम सीमांत दर की अपेक्षा उच्चतर दर पर कर में चार्ज करने योग्य है, वहां इसमें किसी सदस्य के भाग को अंत में उसकी कुल आय में शामिल नहीं किया जाएगा (धारा 86)
- जहां संघ अथवा निकाय निजी व्यक्ति आदि पर लागू सामान्य दरों पर कर में चार्ज करने योग्य (प्रभार्य) है, वहां इसमें किसी सदस्य के भाग को उसकी कुल आय में शामिल नहीं किया जाएगा, परन्तु उस पर छूट दी जाएगी।
- जहां संघ अथवा निकाय की कुल आय पर कोई आयकर प्रभार्य नहीं होता है वहां इसमें किसी सदस्य के भाग को उसकी कुल आय के भाग के रूप में कर में पूरी तरह से प्रभारित किया जाएगा और उस पर कोई छूट नहीं दी जाएगी। इस प्रकार, जहां ए ओ पी/बी ओ आई निजी व्यक्तियों आदि पर लागू सामान्य दरों पर कर योग्य होता है, परन्तु उसकी आय कर योग्य सीमा से नीचे होती है, जिससे कि ए ओ पी/बी ओ आई की कुल आय पर कोई आयकर प्रभार्य नहीं होता है, वहां ऐसे संघ अथवा निकाय में किसी सदस्य का भाग उसके निर्धारण में पूरी तरह से कर योग्य होगा।
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