Spacer
 
Spacer
  Business.gov.in Indian Business Portal
An Initiative of India.gov.in
 
 
तीव्र मीनू
 
कराधान
spacer
Industry & Services निजी कराधान
Industry & Services भागीदारी हेतु कराधान
Industry & Services सीमा शुल्‍क
Industry & Services संपदा कर
Industry & Services निगमित कराधान
Industry & Services एजेंट हेतु कराधान
Industry & Services उत्‍पाद शुल्‍क
Industry & Services पेन
Industry & Services व्‍यावसाय सत्ताओं के अन्‍य रूपों का कराधान
Industry & Services प्रतिनिधित्‍व कार्यालयों का कराधान
Industry & Services सेवा कर
Industry & Services टीडीएस, टीसीएस, टीएएन (टेन)
Industry & Services मूल्‍य वर्धित कर (वैट)
Industry & Services प्रत्‍यक्ष कर संहिता
   
 
taxation
Taxation
संयुक्‍त उद्यमों की कंपनियां:
संयुक्‍त उद्यमों के कराधान से संबंधित प्रावधान
Previous Page
spacer
संयुक्‍त उद्यम पर आय कर अधिनियम,1961 के प्रावधानों के अधीन कर लगेगा। यह आयकर से संबंधित सभी मामलों के लिए अम्‍ब्रेला अधिनियम है और यह इस अभिनियम के प्रावधानों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बनाने (आयकर नियमावली, 1962) हेतु केन्‍द्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को शक्तियां प्रदत्त करता है। सीबीडीटी वित्त मंत्रालय में राजस्‍व विभाग का एक भाग है। इसे भारत में विभिन्‍न प्रत्‍यक्ष करों से संबंधित सभी मामलों का कार्य भार दिया गया है और यह आयकर विभाग के जरिए प्रत्‍यक्ष कर कानून के प्रशासन के लिए जिम्‍मेदार है। आयकर अधिनियम को वित्त अधिनियम के द्वारा वार्षिक संशोधन करने के लिए प्रस्‍तुत किया गया है जिसमें तदनुरूपी वर्ष के लिए आयकर और अन्‍य करों की दरों का उल्‍लेख होता है।

संयुक्‍त उद्यम का कराधान पार्टियों के बीच होने वाले करार पर निर्भर करता है, जो संयुक्‍त उद्यम को बनाता है। यदि संयुक्‍त उद्यम को भागीदारी फर्म अथवा एक कंपनी के रूप में स्‍थापित किया जाता है तो इस पर तदनुसार अर्थात भागीदारी फर्म अथवा कंपनी के रूप में कर लगाया जाता है। परन्‍तु अन्‍य सभी मामलों में, संयुक्‍त उद्यम को व्‍यक्तियों का संघ (ए ओ पी) अथवा निजी निकाय (बी ओ आई) माना जाता है।

व्‍यक्तियों का संघ (ए ओ पी) आयकर अधिनियम के अधीन निर्धारण की यूनिट अथवा सत्ता होता है। व्‍यक्तियों के संघ (ए ओ पी) से ऐसे दो अथवा दो से अधिक व्‍यक्ति होते हैं, जो आय अर्जित करने की दृष्टि से एक सामान्‍य उद्देश्‍य से एक साथ कार्य करते हैं। व्‍यक्ति शब्‍दावली में कोई कंपनी अथवा संघ अथवा निजी निकाय, चाहे वह निगमित है या नहीं, शामिल होता है। संघ को संविदा के आधार पर निर्मित किए जाने की जरूरत नहीं होती है। अत:, यदि दो अथवा दो से अधिक व्‍यक्ति कार्य व्‍यापार करने के लिए संयुक्‍त रूप से कार्य करते हैं, तो अनका ए ओ पी (व्‍यक्तियों के संघ) के रूप में निर्धारण किया जाएगा। परन्‍तु, व्‍यक्तियों के संघ (ए ओ पी) से अभिप्राय किसी और प्रत्‍येक व्‍यक्तियों का सम्मिश्रण नहीं होता है। इसका अभिप्राय केवल यही है कि जब वे आय उत्‍पादित करने वाली गतिविधियों में स्‍वयं जुड़ जाते हैं तो वे व्‍यक्तियों का संघ बन जाते हैं।

निजी निकाय (बी ओ आई) से अभिप्राय निजी व्‍यक्तियों के समूह से है, जो कुछ आय अर्जित करने के उद्देश्‍य से कुछ गतिविधि को अंजाम देते हैं। इसमें केवल निजी व्‍यक्ति ही शामिल होंगे। कंपनियों अथवा फर्म जैसी सत्ता निजी निकाय के सदस्‍य नहीं हो सकते है। बी ओ आई से उसके द्वारा आय के भाग प्राप्ति और उस राशि, जिस पर ऐसे बी ओ आई द्वारा पहले ही से कर अदा किया गया है, के संबंध में किसी निर्धारिती द्वारा आयकर देय नहीं होगा।

^ ऊपर

 
 
Government of India
spacer
 
 
Business Business Business
 
  खोजें
 
Business Business Business
 
Business Business Business
 
मैं कैसे करूँ
Business कम्‍पनी पंजीकरण करूं
Business नियोक्‍ता के रूप में पंजीकरण करें
Business केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) में शिकायत भरें
Business टैन कार्ड के लिए आवेदन करें
Business आयकर विवरणी भरें
 
Business Business Business
 
Business Business Business
 
  हमें सुधार करने में सहायता दें
Business.gov.in
हमें बताएं कि आप और क्‍या देखना चाहते हैं।
 
Business Business Business
Business
Business Business Business
 
निविदाएं
नवीनतम शासकीय निविदाओं को देखें और पहुंचें...
 
Business Business Business
Business
Business Business Business
 
 
पेटेंट के बारे में जानकारी
Business
कॉपीराइट
Business
पेटेंट प्रपत्र
Business
अभिकल्पन हेतु प्रपत्र
 
 
Business Business Business
 
 
 
Spacer
Spacer
Business.gov.in  
 
Spacer
Spacer