| सीमा शुल्क का उदग्रहण अक्सर वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आधिक्य लाभप्रदत्ता को समाप्त करने के लिए किया जाता है जिनके संबंध में उस विशिष्ट समय पर देशीय (घरेलू) कीमतें कम हैं। किन्तु आयात शुल्कों का विस्तार अत्यंत व्यापक है। आयात शुल्क सामान्यत: निम्न प्रकार के होते हैं :-
मूलभूत (बुनियादी) शुल्क :- यह मानक दर है अथवा किन्हीं अन्य देशों से आयात के मामले में अधिमानी दर हैं।
अतिरिक्त सीमाशुल्क :- यह भारत में उत्पादित या विनिर्मित समान प्रकार की वस्तुओं पर उदग्रहणीय केन्द्रीय उत्पाद शुल्क के समतुल्य है। अतिरिक्त शुल्क को आमतौर पर प्रतिकारी शुल्क अथवा सी बी डी कहा जाता है। यह तभी संदेय है यदि आयातित वस्तु इस प्रकार की है मानों वह भारत में उत्पादित हुई हो, इसकी उत्पादन प्रक्रिया केन्द्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम 1944 की परिभाषा के अनुसार ‘विनिर्माण’ के समतुल्य होगी। उत्पाद शुल्क में छूट का प्रभाव अतिरिक्त सीमाशुल्क में छूट प्रदान करने का है।
अतिरिक्त शुल्क का परिकलन अवतरण प्रभारों तथा मूलभूत सीमाशुल्क सहित वस्तुओं के सकल मूल्य के मूल्याधार पर किया जाता है। अन्य शुल्क जैसे डम्पिंग रोधी शुल्क, सुरक्षोपाय, शुल्क इत्यादि को शामिल नहीं किया जाता। भार एवं माप मानक अधिनियम, 1076 के प्रावधानों द्वारा शमिल वस्तुओं के मामले में मूल्याधार ऐसी वस्तुओं के लिए केन्द्रीय उत्पाद अधिनियम, 1944 के अंतर्गत यथा अधिसूचित, छूट का घटा कर वस्तुओं के पैकेज पर घोषित खुदरा बिक्री मूल्य होगा।
यथार्थ प्रतिकारी शुल्क या अतिरिक्त सीमा शुल्क :- इसका उदग्रहण समान प्रकार की भारतीय वस्तुओं पर उनकी निविष्टियों पर उच्च उत्पाद शुल्क के कारण भारतीय वस्तुओं को अलाभ को प्रतिसंतुलित करने के लिए किया जाता है। इसका उदग्रहण स्वदेशी वस्तुओं को एक समान प्रतिस्पर्द्धा क्षेत्र उपलब्ध कराना है जिन को विभिन्न आंतरिक करों का भार वहन करना पड़ता है। इस अतिरिक्त शुल्क के लिए मूल्याधार खुदरा बिक्री कीमत प्रावधान को घटाकर सीमा शुल्क प्रशुल्क अधिनियम, 1975 के अंतर्गत प्रतिकारी शुल्क के मामले की भांति होगा। इस अतिरिक्त शुल्क को आयातित वस्तुओं पर शिक्षा उपकर के उदग्रहण के लिए निर्धारण योग्य मूल्य में शामिल नहीं किया जाएगा। विनिर्माता अपने तैयार उत्पादों पर उत्पाद शुल्क के भुगतान के लिए इस अतिरिक्त शुल्क का क्रेडिट लेने में समर्थ होंगे।
डम्पिंग रोधी शुल्क/सुरक्षोपाय शुल्क :- यह देशीय (घरेलू) उद्योग का अनुचित क्षति में संरक्षित करने के उद्देश्य में विनिर्दिष्ट वस्तुओं के आयात पर लगाया जाने वाला शुल्क है। यह 100 प्रतिशत ईओयू (निर्यातोन्मुखी इकाइयों) तथा एफटीज़ेड (मुक्त व्यापार क्षेत्रों) में इकाइयों तथा एईज़ेड (विशेष आर्थिक क्षेत्रों) द्वारा आयातित वस्तुओं पर प्रयोज्य नहीं होगा। वस्तुओं के आयात पर, डम्पिंग रोधी शुल्क में छूट केवल प्रत्याहरण की एक विशेष ब्रांड दर के रूप में दी जाती है। सुरक्षोपाय शुल्कों के लिए अनुचित व्यापार व्यवहार जैसे निर्यातकारी देशों की ओर से डम्पिंग या आर्थिक सहायता का पता लगाने की आवश्यकता नहीं है। किन्तु उन्हें विभिन्न देशों से आयातों में भेदभाव नहीं करना चाहिए। सुरक्षोपाय कार्रवाई का सहारा केवल तभी लिया जाता है यदि यह सिद्ध हो जाए कि आयातों में अकसमात वृद्धि से घरेलू उद्योग को गम्भीर क्षति पहुंची है या पहुंचने की आशंका है।
शिक्षा उपकर :- यह सकल सीमाशुल्क की प्रतिशतता के रूप में निर्धारित दर पर उदग्रहणीय है। यदि वस्तुओं को शुल्क में पूर्ण छूट दी जाती है अथवा उन पर शून्य शुल्क प्रमार्य है अथवा उन्हें निर्धारित प्रक्रिया यथा ब्रांड के तहत समाशोधन के अंतर्गत शुल्क भुगतान के बिना समाशोधित किया जाना है, तो कोई उपकर नहीं लगाया जाएगा। |