| |
|
|
 |
|
|
|
 |
जब सीमा शुल्क का उदग्रहण यथा मूल्य दरों पर किया जाता है अर्थात इसके मूल्य के आधार पर किया जाता है तो निरंकुशता से बचने के लिए तथा विभिन्न सीमा शुल्क संगठनों में समरूप दृष्टिकोण सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मूल्यनिर्धारण हेतु व्यापक दिशानिर्देश निर्धारित करना अनिवार्य हो जाता है। सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 में देश में आयात एवं निर्यात वस्तुओं के मूल्यनिर्धारण का आधार निर्धारित किया गया है।
सीमा शुल्क मूल्यनिर्धारण के लिए प्रावधान :-
- प्रशुल्क मूल्य :- केन्द्र सरकार को किसी भी उत्पाद के लिए मूल्य नियत करने की शक्ति दी गई है जिन्हें प्रशुल्क मूल्य कहा जाता है। यदि किन्हीं वस्तुओं के लिए प्रशुल्क मूल्य नियत किए जाते है तो यथा मूल्य शुल्कों का परिकलन ऐसे प्रशुल्क मूल्यों के संदर्भ में किया जाएगा। किसी भी श्रेणी की आयातित या निर्यात वस्तुओं के लिए प्रशुल्क मूल्यों को ऐसी या समान प्राकर की वस्तुओं के रूझान को ध्यान में रखकर नियत किया जाएगा तथा उसे सरकारी राजपत्र में अधिसूचित किया जाएगा।
- जब कोई प्रशुल्क मूल्य निर्धारित नहीं किया जाता :-
- निर्यात वस्तुओं के मामले में, धारा 14 की उप धारा (1) के प्रावधानों में मूल्यनिर्धारण की पूर्ण संहिता दी गई है। निर्यात वस्तुओं के मूल्यनिर्धारण के लिए इस धारा में निर्दिष्ट मानदंड पूर्णतया प्रयोज्य है तथा सामान्यत: ''एफओबी'' अर्थात बोर्ड पर नि:शुल्क मूल्य को अंतरराष्ट्रीय बीमा तथा माल भाड़ा लागत को निकालने के पश्चात विचार में लिया जाता है। इस धारा के अनुसार, वस्तु का मूल्य निम्नानुसार माना जाएगा :-
- वह कीमत जिस पर ऐसी या समान प्रकार की वस्तुओं को सामान्यत: बेचा जाता है या बिक्री के लिए प्रस्तावित किया जाता है।
- आयात तथा निर्यात के समय परिदाय की कीमत। सीमा शुल्क मूल्य का निर्धारण करने के लिए आयात के समय तथा स्थल में विचार में लिया जाना चाहिए। भाड़ा, पारगमन बीमा, अलदान, तथा प्रहस्तन प्रभारों सहित वस्तुओं के गंतव्य स्थल तक सभी व्ययों को विचार में लिया जाना है।
- कीमत अंतरराष्ट्रीय व्यापार के क्रम में होनी चाहिए।
- क्रेता तथा विक्रेता का एक दूसरे के व्यवसाय में कोई हित नहीं होना चाहिए।
- कीमत बिक्री या बिक्री के लिए पेशकश की एकमात्र विचारणार्थ होनी चाहिए।
- प्रविष्टि बिल के प्रस्तुतीकरण की तिथि को केन्द्र सरकार द्वारा यथा नियत विनिमय दर को विचार में लिया जाएगा। प्रविष्टि बिल के प्रस्तुतीकरण के समय केन्द्र सरकार द्वारा यथा निर्धारित यथा प्रयोज्य विदेशी मुद्रा विनिमय दर को विचार में लिया जाएगा। हो सकता है यह दर उस तिथि को बाजार प्रवृत्त दर हो या न हो। विदेशी मुद्रा विनिमय दर का निर्धारण करने के लिए संगत तिथि प्रविष्टि बिल के प्रस्तुतीकरण की तिथि है।
- आयातित वस्तुओं के मामले में, मूल्यनिर्धारण सीमा शुल्क मूल्यनिर्धारण (आयातित वस्तुओं की कीमत का निर्धारण) नियमावली, 1988 के अनुसार किया जाता है। सीमा शुल्क मूल्यनिर्धारण नियमावली में डब्ल्यूटीओ सीमा शुल्क मूल्यनिर्धारण करार का अनुसरण कियाजाता है। नियमों के अनुसार आयातित वस्तुओं को मूल्य ''लेन देन मूल्य'' होगा अर्थात वस्तुओं के लिए वस्तुत: प्रदत्त या संदेय मूल्य जब उन्हें मूल्यनिर्धारण कारकों द्वारा समायोजन के पश्चात तथा निम्न क अध्यधीन भारत को निर्यात के लिए बेचा जाता है :-
- मूल्यनिर्धारण शर्तों का अनुपालन
- सीमा शुल्क प्राधिकारी घोषित मूल्य की सत्यता तथा यथार्थता से संतुष्ट हो।
^ ऊपर |
| |
|
|